तिरु तेट्रि अंबलम्

Thiruthetriyambalam (Pallikonda Perumal Temple), Thirunangur

तिरुनांगूर का वह अकेला दिव्य देशम जहाँ पेरुमाल शयन मुद्रा में हैं — और जहाँ उत्सव में राम व कृष्ण दोनों निकलते हैं।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
पळ्ळिकोंड पेरुमाल (सेंगण्माल)
थायार
भुजंगवल्लि (सेंगमलवल्लि)
विमानम्
वेद विमान

मंगलाशासनम्: पासुरम्तिरुमंगै आळ्वार व पोइगै आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरु तेट्रि अंबलम् शिरकाळि से लगभग आठ किलोमीटर पूर्व, तिरुवेण्काडु के मार्ग पर, **तिरुनांगूर** के ग्यारह दिव्य देशम में से एक है। यहाँ विष्णु **पळ्ळिकोंड पेरुमाल** कहलाते हैं — और नाम ही मुद्रा बता देता है।

**"पळ्ळि कोंड" का अर्थ है शयन किए हुए।** मूर्ति **भुजंग शयनम्** में है — चतुर्भुज, पूर्व की ओर मुख किए, लेटी हुई। तिरुनांगूर के अधिकांश अन्य मंदिरों में पेरुमाल खड़े हैं; यहाँ वे विश्राम में हैं।

देवी **भुजंगवल्लि** — जिन्हें **सेंगमलवल्लि** भी कहा जाता है — गर्भगृह के समानांतर एक अलग मंदिर में विराजती हैं।

मंदिर में एक प्राकार है और उसके भीतर दो मंदिर — एक पेरुमाल का, एक देवी का। गर्भगृह के ऊपर **वेद विमान** है।

**एक बात इस मंदिर को ग्यारहों में अलग करती है।** यह अकेला ऐसा मंदिर है जिसकी उत्सव-मूर्तियों में **राम और कृष्ण दोनों** हैं — यानी विष्णु के दो सबसे बड़े अवतार एक ही मंदिर के उत्सव में साथ निकलते हैं।

तिरुमंगै आळ्वार ने अपने मंगलाशासनम् में यहाँ के भगवान को **सेंगण्माल** कहा — *जिनके नेत्र लाल कमल जैसे हैं*। पोइगै आळ्वार ने भी इसका मंगलाशासनम् किया।

  • तिरुनांगूर के ग्यारह दिव्य देशम में से एक।
  • पेरुमाल शयन मुद्रा में — भुजंग शयनम्, चतुर्भुज, पूर्वाभिमुख।
  • ग्यारह में यह अकेला मंदिर है जिसकी उत्सव-मूर्तियों में राम व कृष्ण दोनों हैं।
  • देवी भुजंगवल्लि (सेंगमलवल्लि) गर्भगृह के समानांतर अलग मंदिर में।
  • वेद विमान; एक प्राकार के भीतर दो मंदिर।
  • तिरुमंगै आळ्वार ने "सेंगण्माल" — लाल कमल जैसे नेत्रों वाले — कहा।

पौराणिक कथा

तिरुनांगूर के ग्यारह की साझा कथा तिरु अरिमेय विण्णगरम् के पृष्ठ पर है। यहाँ इस मंदिर की अपनी दो विशेषताएँ हैं।

जहाँ भगवान लेटे हुए हैं

तमिल में **"पळ्ळि कोंड" का अर्थ है शयन किए हुए**, और यहाँ का नाम ही मुद्रा बता देता है।

मूर्ति **भुजंग शयनम्** में है — शेषनाग पर लेटी हुई, चार भुजाओं वाली, पूर्व की ओर मुख किए।

तिरुनांगूर के अधिकांश मंदिरों में पेरुमाल खड़े हैं — वैकुंठ नाथन् खड़े, पुरुषोत्तमन् खड़े, वरदराज खड़े। कुछ में बैठे हैं।

यहाँ वे लेटे हैं।

वैष्णव परंपरा में शयन मुद्रा का अपना अर्थ है। खड़ा देवता देने को तत्पर है, बैठा देवता शासन कर रहा है, और लेटा देवता विश्राम में है — वही योगनिद्रा, जिसमें से सृष्टि निकलती है।

राम और कृष्ण, एक साथ

तिरुनांगूर के ग्यारह में यह अकेला मंदिर है जिसकी **उत्सव-मूर्तियों में राम और कृष्ण दोनों** हैं।

यह छोटी बात नहीं है। विष्णु के दस अवतारों में ये दो ही हैं जिन पर पूरे-पूरे महाकाव्य हैं, और भारत की भक्ति-परंपरा प्रायः इन्हें अलग-अलग बरतती है — राम के अपने मंदिर, कृष्ण के अपने; राम की अपनी परंपरा, कृष्ण की अपनी।

यहाँ दोनों एक ही मंदिर के उत्सव में साथ निकलते हैं।

और गर्भगृह में जो लेटे हैं, वे उन्हीं दोनों के मूल हैं।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Thiruthetriyambalam से. ग्यारहों की साझा कथा हेतु देखें तिरु अरिमेय विण्णगरम्।

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

दक्षिण भारत के मंदिरों में सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। तिरुनांगूर के ग्यारह मंदिर पास-पास हैं और प्रायः एक ही दिन में किए जाते हैं।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: शिरकाळि रेलवे स्टेशन · 8 किमी

हवाई मार्ग

तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे।

रेल मार्ग

शिरकाळि रेलवे स्टेशन — लगभग 8 किमी

शिरकाळि से 8 किमी पूर्व, तिरुवेण्काडु के मार्ग पर।

सड़क मार्ग

तिरुनांगूर

ग्यारह मंदिर आसपास ही हैं और एक दिन में किए जा सकते हैं।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी। तै मास की गरुड सेवै में तिरुनांगूर के ग्यारहों की उत्सव-मूर्तियाँ एकत्र होती हैं।

प्रमुख त्योहार

  • तिरुमंगै आळ्वार मंगलाशासन उत्सवम् / गरुड सेवै (तै मास)

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • तिरुनांगूर के अन्य दस दिव्य देशम — ग्यारहों पास-पास हैं।
  • तिरुवेण्काडु — मंदिर इसी मार्ग पर है।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प शिरकाळि व मयिलाडुतुरै में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री पळ्ळिकोंड पेरुमाल मंदिर
स्थानतिरुनांगूर, शिरकाळि से 8 किमी पूर्व, तिरुवेण्काडु मार्ग पर
ज़िलामयिलाडुतुरै
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरु तेट्रि अंबलम् — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न