मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
हनुमान गढ़ी अयोध्या में राम जन्मभूमि के निकट एक टीले पर है। मुख्य मंदिर तक पहुँचने के लिए **छिहत्तर सीढ़ियाँ** चढ़नी पड़ती हैं।
गर्भगृह में जो प्रतिमा है वह असामान्य है। वह केवल छह इंच की है, और हनुमान को **बाल रूप में, माता अंजनी की गोद में** दर्शाती है। प्रतिमा राम के नाम से अंकित चाँदी की तुलसी-माला धारण किए है।
यह चयन ध्यान देने योग्य है। हनुमान को प्रायः विशाल, गदाधारी, उड़ते हुए दिखाया जाता है — शक्ति के रूप में। यहाँ वे शिशु हैं, माँ की गोद में।
स्थानीय परंपरा कहती है कि रावण-विजय के बाद अयोध्या लौटने पर हनुमान यहीं एक गुफा में रहने लगे, ताकि रामकोट की रक्षा कर सकें। यानी यह रक्षक का स्थान है — और वह रक्षक यहाँ शिशु रूप में विराजता है।
- मुख्य मंदिर तक 76 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
- गर्भगृह में छह इंच की प्रतिमा — हनुमान बाल रूप में, माता अंजनी की गोद में।
- प्रतिमा राम के नाम से अंकित चाँदी की तुलसी-माला धारण किए है।
- स्थानीय परंपरा: रावण-विजय के बाद हनुमान यहीं रहकर रामकोट की रक्षा करते रहे।
- सन् 1855 में अवध के नवाब ने मंदिर के लिए भूमि-राजस्व का अनुदान दिया।
पौराणिक कथा
हनुमान गढ़ी की परंपरा रामायण के बाद की है — तब की, जब कथा समाप्त हो चुकी थी।
रुक जाना
स्थानीय परंपरा कहती है कि लंका-विजय और अयोध्या लौटने के बाद हनुमान वहीं रुक गए। वे यहाँ एक गुफा में रहने लगे, ताकि रामकोट की रक्षा कर सकें।
रामायण की कथा राम के राज्याभिषेक पर समाप्त होती है। पर हनुमान की भूमिका वहाँ समाप्त नहीं हुई — वे रुक गए, और पहरे पर बने रहे।
भक्ति-परंपरा में हनुमान को चिरंजीवी माना जाता है, यानी जो अब भी हैं। यह मंदिर उसी विश्वास का एक स्थान है: काम पूरा हो जाने के बाद भी कोई वहीं खड़ा रह गया।
स्रोत: स्थानीय स्थल-परंपरा; विवरण en.wikipedia.org/wiki/Hanuman_Garhi से सत्यापित
इतिहास
हनुमान गढ़ी का दर्ज इतिहास उन्नीसवीं शताब्दी में स्पष्ट होता है।
क्या दर्ज है
परंपरा मूल मंदिर का श्रेय राजा विक्रमादित्य को देती है। स्रोत यह भी दर्ज करते हैं कि आगे चलकर औरंगज़ेब के काल में यह ध्वस्त हुआ और वहाँ एक मस्जिद बनी; बाद में बैरागियों ने अवध के नवाब शुजाउद्दौला को परास्त कर वह भूमि ली और वहाँ हनुमान का नया मंदिर बनाया।
जो तिथि सबसे स्पष्ट है वह **1855** की है, जब अवध के नवाब ने मंदिर के लिए भूमि-राजस्व का अनुदान दिया।
यहाँ केवल वही दर्ज है जो स्रोत कहता है। इन घटनाओं की व्याख्या इस पृष्ठ का विषय नहीं है।
स्रोत: en.wikipedia.org/wiki/Hanuman_Garhi — 2026-08-04 को देखा गया
दर्शन का समय
हनुमान गढ़ी के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या आरती-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।
मंदिर प्रातःकाल से रात्रि तक दर्शन हेतु खुला रहता है। स्थानीय परंपरा है कि अयोध्या आने वाले पहले हनुमान गढ़ी के दर्शन करते हैं, इसलिए यहाँ दिन भर आवाजाही रहती है। मंगलवार व शनिवार को भीड़ अधिक होती है।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या
नगर के निकट ही है।
रेल मार्ग
अयोध्या धाम जंक्शन
लखनऊ, वाराणसी व दिल्ली से सीधी गाड़ियाँ।
सड़क मार्ग
अयोध्या
मंदिर नगर के मध्य में, राम जन्मभूमि के निकट है।
पैदल यात्रा (ट्रेक)
सड़क से मंदिर से लगभग किमी की चढ़ाई — लगभग कुछ मिनट · कठिनाई: सरल — पर 76 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
मंदिर एक टीले पर है और मुख्य गर्भगृह तक 76 सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं। सीढ़ियाँ चौड़ी व पक्की हैं, पर घुटनों की तकलीफ़ वाले यात्री इसे ध्यान में रखें।
स्रोत: 76 सीढ़ियों का आँकड़ा en.wikipedia.org/wiki/Hanuman_Garhi से
अंतिम चरण: सड़क तक वाहन आते हैं; उसके आगे 76 सीढ़ियाँ पैदल।
सुगमता: 76 सीढ़ियों का कोई विकल्प नहीं है — यह इस मंदिर की एकमात्र बाधा है।
कब जाएँ
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। हनुमान जयंती और राम नवमी पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं। मंगलवार व शनिवार को भीड़ अधिक रहती है।
प्रमुख त्योहार
- हनुमान जयंती
- राम नवमी
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- अयोध्या — अयोध्या, उत्तर प्रदेश
- राम मंदिर — पास ही; परंपरा है कि पहले हनुमान गढ़ी के दर्शन किए जाते हैं।
- कनक भवन — सीता व राम को कैकेयी द्वारा दिया गया भवन माना जाता है।
