तिरुनंदिपुर विण्णगरम्

Nathan Kovil (Jagannatha Perumal Temple), near Kumbakonam

108 में वह अकेला दिव्य देशम जिसका नाम शिव के वाहन नंदी पर पड़ा — क्योंकि विष्णु ने उन्हें शाप से मुक्त किया था।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
जगन्नाथ पेरुमाल (कुछ स्रोतों में श्रीनिवासन्)
थायार
शेण्बगवल्लि
तीर्थम्
नंदी तीर्थ

मंगलाशासनम्: तिरुमंगै आळ्वार के दस पद पासुरम्तिरुमंगै आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुनंदिपुर विण्णगरम् — जिसे **नाथन् कोइल** कहा जाता है — कुंभकोणम् के बाहरी क्षेत्र में एक गाँव में है। यहाँ विष्णु **जगन्नाथ पेरुमाल** रूप में विराजते हैं; कुछ स्रोत मूलवर को **श्रीनिवासन्** और देवी को **शेण्बगवल्लि** भी कहते हैं।

**नाम ही यहाँ की सबसे असाधारण बात है।**

**यह 108 दिव्य देशम में अकेला ऐसा मंदिर है जिसका नाम नंदी पर है** — यानी **शिव के वाहन** पर। विष्णु का एक मंदिर, और नाम शिव के बैल का।

कथा इसका कारण बताती है। परंपरा कहती है कि एक बार **नंदी** ने विष्णु के द्वारपालों का अनादर कर दिया। द्वारपालों ने शाप दे दिया कि उनका शरीर असह्य ताप से जलेगा।

नंदी शिव के पास गए। **शिव ने उन्हें विष्णु की शरण में भेजा** — कहा कि शेण्बारण्यम् में जाकर तप करो।

नंदी ने वहीं तप किया, विष्णु प्रसन्न हुए, और उन्हें शाप से मुक्त कर दिया।

इसीलिए स्थान का नाम तिरुनंदिपुर विण्णगरम् पड़ा, और मंदिर का तीर्थ आज भी **नंदी तीर्थ** कहलाता है।

**यह मंदिर एक और नाम से भी जाना जाता है — दक्षिण जगन्नाथम्**, क्योंकि इसकी समानता ओडिशा के **पुरी जगन्नाथ मंदिर** से बताई जाती है।

तिरुमंगै आळ्वार ने इसके **दस पद** रचे। मंदिर का प्रबंधन **वानमामलै मठ** के पास है।

  • 108 में अकेला दिव्य देशम जिसका नाम नंदी — शिव के वाहन — पर है।
  • परंपरा: विष्णु ने नंदी को द्वारपालों के शाप से मुक्त किया; शिव ने ही उन्हें वहाँ भेजा था।
  • मंदिर का तीर्थ आज भी नंदी तीर्थ कहलाता है।
  • दक्षिण जगन्नाथम् — पुरी के जगन्नाथ मंदिर से समानता के कारण।
  • तिरुमंगै आळ्वार के दस पद; प्रबंधन वानमामलै मठ के पास।

पौराणिक कथा

यह कथा एक अनादर से शुरू होती है — और उसका पात्र कोई असुर नहीं, शिव का अपना वाहन है।

नंदी का शाप

परंपरा कहती है कि एक बार **नंदी** ने विष्णु के द्वारपालों का अनादर कर दिया।

द्वारपालों ने शाप दिया कि उनका शरीर असह्य ताप से जलता रहेगा।

नंदी अपने स्वामी **शिव** के पास गए।

और यहीं इस कथा की सबसे उल्लेखनीय बात आती है — **शिव ने उन्हें विष्णु की ही शरण में भेजा**। कहा कि शेण्बारण्यम् जाकर तप करो।

नंदी ने वहीं तप किया। विष्णु प्रसन्न हुए और शाप हर लिया।

स्थान का नाम वहीं से पड़ा, और मंदिर का तीर्थ आज भी **नंदी तीर्थ** कहलाता है।

तीसरी बार, वही बात

इस क्षेत्र में यह **तीसरा** मंदिर है जहाँ शैव और वैष्णव परंपराएँ एक-दूसरे के विरुद्ध नहीं, एक-दूसरे के आश्रय के रूप में मिलती हैं।

**तिरुक्कंडियूर** में विष्णु ने **शिव** को ब्रह्महत्या-दोष से मुक्त किया।

**यहाँ** विष्णु ने **शिव के वाहन** को शाप से मुक्त किया — और भेजने वाले स्वयं शिव थे।

और इसके ठीक विपरीत, शिरकाळि के **काऴिच्चीराम विण्णगरम्** पर स्रोत आळ्वार और नयनार की भेंट को किसी की "विजय" की तरह लिखते हैं।

दोनों तरह की कथाएँ एक ही परंपरा से आती हैं, और प्रायः एक ही ज़िले से।

हम दोनों दर्ज कर रहे हैं। जो सुनाई जाए, वह हर पीढ़ी अपने आप चुनती है — पर चुनने के लिए दोनों का पता होना चाहिए।

दक्षिण का जगन्नाथ

इस मंदिर को **दक्षिण जगन्नाथम्** भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी समानता ओडिशा के **पुरी जगन्नाथ मंदिर** से बताई जाती है — वही पुरी, जो **चार धाम** में से एक है।

यह जोड़ ध्यान देने योग्य है। पुरी पूर्वी तट पर है, यह कुंभकोणम् के पास एक गाँव में। बीच में सैकड़ों किलोमीटर हैं।

पर नाम ने दूरी पाट दी — जैसे तिरुनांगूर के **तिरु मणिमाड कोविल** ने बद्री के नारायण को अपने साथ जोड़ लिया था।

भारत के तीर्थ अपने को अकेला नहीं रहने देते। हर छोटा मंदिर किसी बड़े धाम से अपना सूत्र खोज लेता है, और उसी सूत्र से पूरा जाल बुना जाता है।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/मठ स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। मंदिर कुंभकोणम् के पास है और क्षेत्र के अन्य दिव्य देशम के साथ किया जा सकता है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: कुंभकोणम् रेलवे स्टेशन

हवाई मार्ग

तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

वहाँ से सड़क मार्ग से लगभग दो घंटे।

रेल मार्ग

कुंभकोणम् रेलवे स्टेशन

वहाँ से नाथन् कोइल सड़क मार्ग से पास है।

सड़क मार्ग

नाथन् कोइल

कुंभकोणम् से स्थानीय बस व ऑटो उपलब्ध।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब मौसम सबसे अनुकूल रहता है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • कुंभकोणम् के दिव्य देशम — तिरुक्कुडंतै, तिरु विण्णगर, तिरुनारायूर, तिरुच्चेरै।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प कुंभकोणम् में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री जगन्नाथ पेरुमाल मंदिर
स्थाननाथन् कोइल, कुंभकोणम् के बाहरी क्षेत्र में
ज़िलातंजावुर
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनवानमामलै मठ

तिरुनंदिपुर विण्णगरम् — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न