तिरुक्कूडल

Koodal Azhagar Perumal Temple, Madurai

मदुरै के हृदय में वह दिव्य देशम जहाँ भगवान की मुद्राएँ अगल-बग़ल नहीं, एक के ऊपर एक हैं।

यह स्थान इनमें भी है:108 दिव्य देशम

दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
कूडल अऴगर — पहले तल पर बैठी मुद्रा में
थायार
श्रीदेवी व भूदेवी
तीर्थम्
हेम पुष्करिणी
विमानम्
अष्टांग विमान

मंगलाशासनम्: पासुरम्तिरुमंगै आळ्वार तथा अन्य आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुक्कूडल **मदुरै नगर के हृदय** में, **कृतमाला** नदी के तट पर है। यहाँ मूलवर **कूडल अऴगर** हैं।

**यहाँ की रचना असामान्य है — और वह ऊर्ध्वाधर है।**

अधिकांश मंदिरों में विभिन्न सन्निधियाँ अगल-बग़ल होती हैं। यहाँ वे **एक के ऊपर एक** हैं:

- **पहला तल** — **कूडल अऴगर**, **बैठी** मुद्रा में, श्रीदेवी और भूदेवी के साथ - **दूसरा तल** — **सूर्यनारायण**, **खड़ी** मुद्रा में, श्रीदेवी और भूदेवी के साथ

यानी दर्शन के लिए ऊपर चढ़ना पड़ता है, बग़ल में जाना नहीं।

यह विषय इस सूची में तीसरी बार, तीसरी युक्ति के साथ आ रहा है। **तिरु नागै** में तीनों मुद्राएँ एक ही परिसर में अगल-बग़ल हैं। **तिरुनीर्मलै** में चार मुद्राएँ हैं, पर वे तलहटी और पहाड़ी में बँटी हैं। और **यहाँ** वे एक ही भवन में, **तलों में** बँटी हैं।

गर्भगृह के ऊपर **अष्टांग विमान** है — यह इस सूची में **तिरुक्कोट्टियूर** के बाद दूसरा है, और 108 में यह रचना गिने-चुने मंदिरों पर ही मिलती है।

**एक और बात स्रोत विशेष रूप से बताते हैं:** यह **अकेला दिव्य देशम** है जहाँ **नवग्रह सन्निधि** है। (⚠️ यह दावा 108 के पूरे संग्रह पर है; हम इसे परंपरा के कथन के रूप में दर्ज कर रहे हैं।)

**इतिहास भी यहाँ दर्ज है।** **आठवीं शताब्दी** का एक शिलालेख **अर्ध मंडप** के निर्माण हेतु ग्रेनाइट के दान का उल्लेख करता है। **सोलहवीं शताब्दी** में **मदुरै नायकों** ने मंदिर का विस्तार किया — **ध्वजस्तंभ मंडपम्** और **हेम पुष्करिणी** के सामने का मंडप उन्हीं के बनवाए हैं।

  • मुद्राएँ तलों में बँटी हैं — पहले तल पर बैठे कूडल अऴगर, दूसरे पर खड़े सूर्यनारायण।
  • स्रोतों के अनुसार अकेला दिव्य देशम जहाँ नवग्रह सन्निधि है।
  • अष्टांग विमान — 108 में गिने-चुने मंदिरों पर।
  • मदुरै नगर के हृदय में, कृतमाला नदी के तट पर।
  • आठवीं सदी का शिलालेख; सोलहवीं सदी में मदुरै नायकों का विस्तार।

पौराणिक कथा

यहाँ कहने योग्य बात रचना है — और वह ऊपर की ओर जाती है।

एक के ऊपर एक

मंदिरों में देवता सामान्यतः **अगल-बग़ल** बैठते हैं। एक प्राकार, कई सन्निधियाँ, और भक्त एक से दूसरी तक चलता जाता है।

**यहाँ वे एक के ऊपर एक हैं।**

पहले तल पर **कूडल अऴगर** बैठे हैं, श्रीदेवी और भूदेवी के साथ। दूसरे तल पर **सूर्यनारायण** खड़े हैं।

यानी भक्त बग़ल में नहीं जाता — वह **ऊपर चढ़ता है**।

यह विषय इस सूची में तीसरी बार आया है, और हर बार स्थापत्य ने उसे अलग तरह से हल किया।

**तिरु नागै** में तीनों मुद्राएँ एक ही परिसर में, अगल-बग़ल हैं। **तिरुनीर्मलै** में चार हैं, पर वहाँ प्रकृति ने विभाजन कर दिया — एक तलहटी पर, तीन पहाड़ी पर। और **यहाँ** एक ही भवन में तल बना दिए गए।

तीनों जगह प्रश्न एक ही था: भगवान के कई रूप एक साथ कैसे रखे जाएँ? और तीनों ने अलग उत्तर दिया।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

इतिहास

आठवीं शताब्दी का एक शिलालेख अर्ध मंडप के निर्माण हेतु ग्रेनाइट के दान का उल्लेख करता है। सोलहवीं शताब्दी में मदुरै नायकों ने मंदिर का विस्तार किया — ध्वजस्तंभ मंडपम् और हेम पुष्करिणी के सामने का मंडप उन्हीं के बनवाए हुए हैं।

8वीं शताब्दी
अर्ध मंडप हेतु ग्रेनाइट के दान का शिलालेख
16वीं शताब्दी
मदुरै नायकों द्वारा विस्तार — ध्वजस्तंभ मंडपम् व हेम पुष्करिणी का मंडप

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक मंदिर/ट्रस्ट स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

सामान्यतः प्रातःकाल से मध्याह्न तक और फिर सायंकाल से रात्रि तक दर्शन होते हैं। मंदिर मदुरै नगर के भीतर ही है, इसलिए समय पूछकर जाना सरल है। ⚠️ दूसरे तल की सन्निधि के दर्शन का समय अलग हो सकता है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: मदुरै हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: मदुरै जंक्शन

हवाई मार्ग

मदुरै हवाई अड्डा

नगर के भीतर; पहुँच सरल।

रेल मार्ग

मदुरै जंक्शन

मंदिर नगर के हृदय में ही है।

सड़क मार्ग

मदुरै

नगर-बस व ऑटो उपलब्ध; मीनाक्षी मंदिर पास ही है।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है। ⚠️ दूसरे तल की सन्निधि तक सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं।

सुगमता: भूतल सुगम है; ऊपर की सन्निधि के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी होंगी।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: नवंबर से फ़रवरी, जब मदुरै का मौसम सबसे अनुकूल रहता है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • मीनाक्षी अम्मन् मंदिर — मदुरै के हृदय में, पास ही।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: शालीन वस्त्र।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के पर्याप्त विकल्प मदुरै में हैं; यह पूरे क्षेत्र के दिव्य देशम के लिए अच्छा आधार है।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री कूडल अऴगर पेरुमाल मंदिर
स्थानमदुरै (नगर के हृदय में)
ज़िलामदुरै
राज्यतमिलनाडु
प्रबंधनतमिलनाडु हिंदू धार्मिक व धर्मादाय बंदोबस्ती विभाग (HR&CE)

तिरुक्कूडल — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न