मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व
यह मंदिर प्रयागराज में संगम के निकट, किले के पास है। इसकी प्रतिमा भारत के किसी और हनुमान मंदिर जैसी नहीं।
**हनुमान यहाँ लेटे हुए हैं।** प्रतिमा लगभग बीस फुट लंबी और आठ फुट चौड़ी है, और वह भूमि से छह-सात फुट **नीचे** एक कक्ष में है — यानी दर्शन के लिए नीचे उतरना पड़ता है। इसे लगभग छह-सात सौ वर्ष पुरानी माना जाता है।
जहाँ भी हनुमान की प्रतिमा होती है, वे प्रायः खड़े होते हैं — उड़ते हुए, गदा उठाए, पर्वत लिए। यह अकेला ऐसा प्रसिद्ध स्थान है जहाँ वे विश्राम में हैं।
पर सबसे उल्लेखनीय बात हर वर्ष घटती है। **वर्षा-काल में गंगा का जल बढ़कर मंदिर तक आता है और प्रतिमा को छू लेता है।** परंपरा इसे इस रूप में देखती है कि गंगा स्वयं आकर उनका चरण-स्पर्श करती हैं। बाढ़ में प्रतिमा आंशिक रूप से जल में डूब जाती है, और जल उतरने पर वह फिर प्रकट होती है।
यानी यह वह मंदिर है जहाँ भक्त वर्ष भर आते हैं, और साल में एक बार नदी आती है।
- संभवतः विश्व का अकेला प्रसिद्ध हनुमान मंदिर जहाँ प्रतिमा शयन-मुद्रा में है।
- प्रतिमा लगभग 20 फुट लंबी व 8 फुट चौड़ी; भूमि से 6–7 फुट नीचे एक कक्ष में।
- लगभग 600–700 वर्ष पुरानी मानी जाती है।
- वर्षा-काल में गंगा का जल बढ़कर प्रतिमा को छू लेता है; बाढ़ में वह आंशिक रूप से डूब जाती है।
- संगम व किले के निकट; कुंभ के समय यहाँ लाखों लोग आते हैं।
पौराणिक कथा
इस प्रतिमा के मिलने की कथा भी जल से ही जुड़ी है।
नाव, नदी और खुदाई
परंपरा कहती है कि यह प्रतिमा एक नाव से ले जाई जा रही थी। रात में नाव पलट गई और प्रतिमा जल में समा गई।
बहुत वर्षों बाद, जब गंगा का जल-स्तर घटा, राम-भक्त बाबा बालगिरि जी महाराज को खुदाई करते समय वह प्रतिमा मिली।
जो प्रतिमा जल में डूबकर खोई थी, वह जल के हटने पर मिली — और आज भी हर वर्ष जल आकर उसे छू जाता है। कथा और भूगोल यहाँ एक ही बात दोहराते हैं।
स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्रोतों से, 2026-08-04 को देखे गए
दर्शन का समय
इस मंदिर के लिए कोई आधिकारिक दर्शन-समय या आरती-तालिका सत्यापित स्रोत पर उपलब्ध नहीं मिली।
मंदिर प्रातःकाल से रात्रि तक दर्शन हेतु खुला रहता है। मंगलवार व शनिवार को भीड़ अधिक रहती है, और कुंभ व माघ मेले के समय यहाँ लाखों लोग आते हैं।
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग
प्रयागराज हवाई अड्डा
नगर से कुछ ही दूरी पर।
रेल मार्ग
प्रयागराज जंक्शन
देश के कई नगरों से सीधी गाड़ियाँ आती हैं।
सड़क मार्ग
प्रयागराज
मंदिर संगम व किले के निकट है; नगर के भीतर ऑटो व ई-रिक्शा से पहुँचा जा सकता है।
अंतिम चरण: मंदिर तक सड़क जाती है; प्रतिमा के दर्शन के लिए कक्ष में नीचे उतरना पड़ता है।
सुगमता: मंदिर तक पहुँच सुगम है, पर प्रतिमा भूमि से नीचे होने के कारण कुछ सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं।
कब जाएँ
यह मंदिर वर्ष भर खुला रहता है, पर वर्षा-काल में गंगा का जल-स्तर बढ़ने पर प्रतिमा तक जल आ जाता है और बाढ़ की स्थिति में वह आंशिक रूप से डूब जाती है। उन दिनों दर्शन बाधित हो सकते हैं। यह कोई घोषित तिथि नहीं होती — यह पूरी तरह नदी पर निर्भर है, इसलिए जुलाई से सितंबर के बीच जाने से पहले स्थानीय स्थिति पूछ लेना उचित रहेगा।
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च। जुलाई से सितंबर के बीच गंगा का जल-स्तर बढ़ने पर दर्शन बाधित हो सकते हैं — उन महीनों में जाने से पहले स्थानीय स्थिति पूछ लें। माघ मेला व कुंभ के समय यहाँ लाखों लोग आते हैं।
प्रमुख त्योहार
- हनुमान जयंती
- माघ मेला
- कुंभ
आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल
- त्रिवेणी संगम — गंगा, यमुना व सरस्वती का संगम; पास ही।
- इलाहाबाद किला — अकबर द्वारा निर्मित; मंदिर उसी के निकट है।
- अक्षयवट — किले के भीतर स्थित प्राचीन वट वृक्ष।
