तिरुविदुवक्कोडु

Uyyavantha Perumal Temple, Thirumittacode

वह दिव्य देशम जिस पर कुलशेखर आळ्वार ने अपने सबसे मार्मिक पद रचे — वही कुलशेखर, जो राजा थे और आळ्वार बने।

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दिव्य देशम — एक नज़र में

पेरुमाल
उय्यवंद पेरुमाल
तीर्थम्
भारतप्पुऴा

मंगलाशासनम्: पासुरम्कुलशेखर आळ्वार

मंदिर का परिचय व धार्मिक महत्व

तिरुविदुवक्कोडु — मलयालम में **तिरुमित्तक्कोड** — केरल के **पालक्काड** ज़िले में, **भारतप्पुऴा** के तट पर है, पट्टांबि से लगभग **पाँच किलोमीटर** दूर। यहाँ विष्णु **उय्यवंद पेरुमाल** रूप में विराजते हैं।

मंदिर को लोकप्रिय रूप से **अंजुमूर्ति कोविल** भी कहा जाता है। (⚠️ "अंजु" यानी पाँच — पर इस नाम का ठीक-ठीक संदर्भ हमें किसी स्रोत में स्पष्ट नहीं मिला, इसलिए हम नाम दर्ज कर रहे हैं और उसकी व्याख्या नहीं गढ़ रहे।)

**इस मंदिर की सबसे बड़ी बात इसका आळ्वार-संबंध है।**

**कुलशेखर आळ्वार** ने इस मंदिर पर अत्यंत **मार्मिक पासुरम्** रचे — और उनका नाम यहाँ विशेष महत्व रखता है।

कुलशेखर आळ्वार बारह आळ्वारों में से एक हैं, और वे **चेर राजा** थे जिन्होंने राजपाट छोड़कर भक्ति का मार्ग लिया।

यानी वे **केरल की भूमि के अपने आळ्वार** हैं — और यह मंदिर उन्हीं के क्षेत्र में है।

यह इस सूची में एक परिचित बात है। **तिरुक्कुरुगूर** नम्माळ्वार की भूमि है, **तिरुक्कोळूर** मधुरकवि की, **महाबलिपुरम्** भूतत्ताळ्वार की।

पर कुलशेखर का प्रसंग अलग है। वे किसी गाँव के कवि नहीं थे — वे **राजा** थे, और उन्होंने वह छोड़ा।

इस सूची में एक और राजा ने भी अपना राज्य दिया था — **तिरुवनंतपुरम्** में, 1750 में, जब त्रावणकोर के शासक ने पूरा राज्य पद्मनाभस्वामी को समर्पित कर दिया।

दोनों केरल के हैं, और दोनों बार सत्ता ने स्वयं को भक्ति के अधीन कर दिया।

  • कुलशेखर आळ्वार ने इस मंदिर पर अत्यंत मार्मिक पासुरम् रचे।
  • कुलशेखर चेर राजा थे जिन्होंने राजपाट छोड़कर भक्ति का मार्ग लिया।
  • लोकप्रिय नाम अंजुमूर्ति कोविल।
  • भारतप्पुऴा के तट पर; पट्टांबि से लगभग 5 किमी।
  • मलै नाडु के तेरह दिव्य देशम में से एक।

पौराणिक कथा

यहाँ की सबसे बड़ी बात एक कवि की है — और वह कवि पहले राजा था।

वह राजा जो आळ्वार बना

**कुलशेखर आळ्वार** ने इस मंदिर पर अपने सबसे मार्मिक पद रचे।

और कुलशेखर कोई साधारण कवि नहीं थे। वे **चेर राजा** थे — और उन्होंने राजपाट छोड़कर भक्ति का मार्ग चुना।

बारह आळ्वारों में वे **केरल की भूमि के अपने आळ्वार** हैं।

इस सूची में हमने कई कवि-भूमियाँ देखीं — **तिरुक्कुरुगूर** में नम्माळ्वार जन्मे, **तिरुक्कोळूर** में मधुरकवि, **महाबलिपुरम्** में भूतत्ताळ्वार, **तेराऴुंदूर** में कंबन।

पर उनमें से कोई राजा नहीं था।

कुलशेखर के पास वह सब था जो छोड़ा जा सकता है — और उन्होंने छोड़ा।

और यह केरल में दूसरी बार है जब सत्ता ने स्वयं को भक्ति के अधीन कर दिया। **तिरुवनंतपुरम्** में 1750 में त्रावणकोर के राजा ने अपना **पूरा राज्य** पद्मनाभस्वामी को समर्पित कर दिया था, और उसके बाद शासक स्वयं को "पद्मनाभ दास" कहते आए।

एक राजा ने राज्य दे दिया और सेवक कहलाया। दूसरे ने राज्य छोड़ दिया और कवि हो गया।

स्रोत: स्थल-परंपरा; विवरण संबद्ध स्थल-स्रोतों से, 2026-08-05.

दर्शन का समय

इस मंदिर के दर्शन-समय किसी आधिकारिक देवस्वम् स्रोत पर सत्यापित नहीं हो सके।

⚠️ केरल के मंदिरों के वस्त्र-नियम कड़े हैं — पुरुषों को प्रायः ऊपरी वस्त्र उतारकर मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है। मध्याह्न का अवकाश लंबा रहता है।

हमने यहाँ कोई समय इसलिए नहीं छापा कि वह किसी आधिकारिक स्रोत पर उपलब्ध नहीं है। यात्रा-वेबसाइटों पर मिलने वाले समय आपस में मेल नहीं खाते, और एक ग़लत समय ऐसे स्थान पर बहुत महँगा पड़ता है।

कैसे पहुँचें

निकटतम एयरपोर्ट: कोच्चि / कोऴिक्कोड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
निकटतम रेलवे स्टेशन: पट्टांबि रेलवे स्टेशन · 5 किमी

हवाई मार्ग

कोच्चि / कोऴिक्कोड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

रेल मार्ग

पट्टांबि रेलवे स्टेशन — लगभग 5 किमी

वहाँ से लगभग 5 किमी।

सड़क मार्ग

पट्टांबि — लगभग 5 किमी

पालक्काड व शोरनूर से बस उपलब्ध।

अंतिम चरण: सड़क मंदिर तक जाती है; कोई चढ़ाई नहीं।

सुगमता: सुगम — कोई चढ़ाई नहीं।

कब जाएँ

सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फ़रवरी, जब मौसम सबसे अनुकूल रहता है।

आसपास के मंदिर व दर्शनीय स्थल

  • भारतप्पुऴा — मंदिर इसी नदी के तट पर है।

यात्रा सुझाव

वस्त्र: ⚠️ केरल-शैली के नियम लागू — पुरुषों को प्रायः मुंडु/धोती में प्रवेश करना होता है।

ठहरने की व्यवस्था: ठहरने के विकल्प पालक्काड व शोरनूर में हैं।

एक नज़र में

प्रकारमंदिर
मंदिरश्री उय्यवंद पेरुमाल मंदिर
स्थानतिरुमित्तक्कोड, पट्टांबि से लगभग 5 किमी, भारतप्पुऴा तट
ज़िलापालक्काड
राज्यकेरल
प्रबंधनमलबार / कोच्चिन् देवस्वम् व्यवस्था

तिरुविदुवक्कोडु — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न