श्री अयप्पा आरती

śrī ayyappā āratī

Ayyappa Aarti (Swami Ayyappa / Hariharaputra)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक अयप्पा स्वामी आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान अयप्पा हरि (विष्णु) व हर (शिव) के पुत्र — हरिहरपुत्र — माने जाते हैं, जो केरल के सबरीमला धाम में विराजमान हैं। यह आरती मण्डल काल व मकर संक्रांति (मकरविलक्कु) पर तथा भक्तों द्वारा "स्वामिये शरणम् अयप्पा" के जयघोष के साथ गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय अयप्पा स्वामी, जय हरिहरपुत्रा। सबरीमला विराजे, करूँ मैं तव सेवा॥

हे अयप्पा स्वामी, हे हरिहरपुत्र, आपकी जय हो! सबरीमला में विराजमान आपकी मैं सेवा करता हूँ।

हरि-हर के तुम नंदन, ब्रह्मचारी रूपा। योग-मुद्रा में बैठे, तेज अनूपा॥

आप हरि व हर के पुत्र, ब्रह्मचारी स्वरूप हैं; योग-मुद्रा में विराजमान आपका तेज अनुपम है।

अठारह सीढ़ी चढ़कर, भक्त दर्शन पाते। "स्वामिये शरणम्" कहकर, मन को हर्षाते॥

अठारह पवित्र सीढ़ियाँ चढ़कर भक्त दर्शन पाते हैं; "स्वामिये शरणम् अयप्पा" कहकर अपने मन को हर्षित करते हैं।

भय-संकट सब हरते, मनोरथ पूरण। शरण पड़े की रक्षा, करते दुख-चूरण॥

आप भय-संकट हर लेते हैं और मनोरथ पूर्ण करते हैं; शरण में आए जनों की रक्षा कर उनके दुःख चूर कर देते हैं।

अयप्पा की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, मनवांछित पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से अयप्पा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे अयप्पा स्वामी, हे हरिहरपुत्र, आपकी जय हो! सबरीमला में विराजमान आपकी मैं सेवा करता हूँ।
  2. आप हरि व हर के पुत्र, ब्रह्मचारी स्वरूप हैं; योग-मुद्रा में विराजमान आपका तेज अनुपम है।
  3. अठारह पवित्र सीढ़ियाँ चढ़कर भक्त दर्शन पाते हैं; "स्वामिये शरणम् अयप्पा" कहकर अपने मन को हर्षित करते हैं।
  4. आप भय-संकट हर लेते हैं और मनोरथ पूर्ण करते हैं; शरण में आए जनों की रक्षा कर उनके दुःख चूर कर देते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से अयप्पा की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।

लाभ

  • भय, संकट व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • मन में संयम, भक्ति व आत्मबल बढ़ता है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर सुख-शांति प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

मण्डल काल (व्रत के 41 दिन) मेंमकर संक्रांति (मकरविलक्कु) परशनिवार व नित्य संध्या में

पाठ विधि

भगवान अयप्पा के समक्ष दीप जलाकर पुष्प अर्पित करें, "स्वामिये शरणम् अयप्पा" के जयघोष के साथ आरती गाएँ। मण्डल व्रत व मकर संक्रांति पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री अयप्पा आरती — सामान्य प्रश्न