समय
5 मिनट
श्लोक/चौपाई
9
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
मण्डल काल; मकर संक्रांति (मकरविलक्कु); संध्या पूजा का समापन
उद्देश्य:शरणागति (Surrender)शांति (Peace)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण
हरिवरासनम् भगवान अयप्पा का संस्कृत शयन-गीत है, जो सबरीमला में रात को मंदिर के कपाट बंद होने से पहले गाया जाता है। इसके आठ श्लोक हैं, हर श्लोक "हरिहरात्मजं देवमाश्रये" — हरि-हर के पुत्र देव की शरण लेता हूँ — पर रुकता है, और बीच में टेक आती है: "शरणं अय्यप्पा स्वामि शरणं अय्यप्पा"।
FAQ
हरिवरासनम् — श्री अयप्पा शयन-गीत — सामान्य प्रश्न
भगवान अयप्पा का संस्कृत शयन-गीत (लोरी), जिसे श्री हरिहरात्मजाष्टकम् भी कहते हैं। सबरीमला में रात को मंदिर के कपाट बंद होने से पहले यही गाया जाता है। अयप्पा की कोई हिन्दी आरती दो मिलती प्रतियों में नहीं मिली, इसलिए यहाँ यही दिया गया है।
इस पर मतभेद है — कुछ इसे कोन्नकथु जानकी अम्मा (1923) की रचना मानते हैं, और कुछ कुम्बकुडी कुलथुर श्रीनिवास अय्यर (1947) की। यह 20वीं सदी की रचना है।
आठ — इसीलिए इसे हरिहरात्मज-अष्टकम् कहते हैं। हर श्लोक "हरिहरात्मजं देवमाश्रये" पर रुकता है, और बीच में "शरणं अय्यप्पा स्वामि शरणं अय्यप्पा" की टेक आती है।
चार प्रकाशित प्रतियों से — धर्मसूत्र (आधार), विज्ञानम्, हिंदूइज़्म FAQ और भक्तिभारत। दो जगह छोटे पाठ-भेद हैं (शरणकीर्तनं/चरणकीर्तनं, वाजि/माजि); आधार का पाठ रखा गया।
पर्व
