श्री विश्वकर्मा आरती

śrī viśvakarmā āratī

Vishwakarma Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक विश्वकर्मा आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के दिव्य शिल्पी, वास्तु व यंत्र-कला के अधिष्ठाता देव हैं; इन्हें देवताओं का अभियंता व निर्माता कहा जाता है। यह आरती विश्वकर्मा जयंती (कन्या संक्रांति, सितंबर) पर तथा कारखानों, यंत्रों व औजारों के पूजन में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा। सृष्टि-शिल्प के स्वामी, तुम जानत सब कर्मा॥

हे श्री विश्वकर्मा प्रभु, आपकी जय हो! आप सृष्टि-शिल्प के स्वामी हैं और समस्त कर्म (कला-कौशल) के ज्ञाता हैं।

देव-शिल्पी कहलाओ, रचना अद्भुत कीन्ही। स्वर्ग-लंका-द्वारका, तुमने ही दीन्ही॥

आप देव-शिल्पी कहलाते हैं, आपने अद्भुत रचनाएँ कीं; स्वर्गलोक, सोने की लंका व द्वारका — सब आपने ही निर्मित कीं।

यंत्र-शस्त्र-वास्तु के, तुम हो आदि-दाता। श्रम-शिल्प के पूजक की, करते भाग्य-विधाता॥

आप यंत्र, शस्त्र व वास्तु-कला के आदि-दाता हैं; श्रम व शिल्प के पूजकों के भाग्य-विधाता हैं।

व्यापार-उद्योग में बरकत, कारीगर सुख पाते। जो जन तुमको ध्याते, उन्नति वे पाते॥

आपकी कृपा से व्यापार-उद्योग में बरकत आती है और कारीगर सुख पाते हैं; जो आपका ध्यान करते हैं, वे उन्नति प्राप्त करते हैं।

विश्वकर्मा आरती, जो जन श्रद्धा गावे। कार्य-सिद्धि वह पावे, सुख-समृद्धि पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से विश्वकर्मा जी की यह आरती गाता है, वह कार्य-सिद्धि तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे श्री विश्वकर्मा प्रभु, आपकी जय हो! आप सृष्टि-शिल्प के स्वामी हैं और समस्त कर्म (कला-कौशल) के ज्ञाता हैं।
  2. आप देव-शिल्पी कहलाते हैं, आपने अद्भुत रचनाएँ कीं; स्वर्गलोक, सोने की लंका व द्वारका — सब आपने ही निर्मित कीं।
  3. आप यंत्र, शस्त्र व वास्तु-कला के आदि-दाता हैं; श्रम व शिल्प के पूजकों के भाग्य-विधाता हैं।
  4. आपकी कृपा से व्यापार-उद्योग में बरकत आती है और कारीगर सुख पाते हैं; जो आपका ध्यान करते हैं, वे उन्नति प्राप्त करते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से विश्वकर्मा जी की यह आरती गाता है, वह कार्य-सिद्धि तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

लाभ

  • व्यापार, उद्योग व कार्य में सफलता व बरकत आती है।
  • यंत्र, औजार व कार्यस्थल पर शुभता व सुरक्षा रहती है।
  • कौशल, उन्नति व समृद्धि की प्राप्ति होती है।

कब करें पाठ

विश्वकर्मा जयंती (कन्या संक्रांति) परकारखाने/यंत्र-पूजन के समयकिसी नए कार्य/निर्माण-आरंभ पर

पाठ विधि

भगवान विश्वकर्मा के समक्ष यंत्र, औजार व वाहन रखकर पुष्प, अक्षत व दीप अर्पित करें; कार्यस्थल की पूजा कर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। विश्वकर्मा जयंती पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री विश्वकर्मा आरती — सामान्य प्रश्न