श्री विश्वकर्मा आरती

śrī viśvakarmā āratī

Vishwakarma Aarti (Prabhu Shri Vishwakarma Ghar Aavo)

समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
विश्वकर्मा पूजा; नए औज़ार, मशीन या भवन का आरंभ
उद्देश्य:शुभ आरम्भ (Auspicious beginnings)कार्य-सिद्धि (Success in work)शिल्प-विद्या (Craftsmanship)
✓ संपूर्ण

"प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो, प्रभु विश्वकर्मा" देव-शिल्पी विश्वकर्मा की प्रचलित आरती है। इसमें टेक और चार पद हैं, जो विश्वकर्मा की तीन प्रसिद्ध रचनाएँ गिनाते हैं — सुदामा का कंचन महल, कृष्ण की द्वारिकापुरी और राम का सेतु — और अंत में माँगते हैं: "शिल्प विद्या का दो प्रकाश"।

परिचय

स्रोत: "प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री विश्वकर्मा आरती
IASTśrī viśvakarmā āratī
मूल स्रोत"प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो" — परंपरागत आरती
शुभ दिनविश्वकर्मा पूजा; नए औज़ार, मशीन या भवन का आरंभ
पाठ समय2–3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पी हैं, और यह आरती उनकी स्तुति उनके बनाए कामों से करती है।

सुदामा का महल (पद 1). "सुदामा की विनय सुनी और कंचन महल बनाये" — दरिद्र सुदामा के लिए सोने का महल।

द्वारिकापुरी (पद 2). "विनय करी भगवान कृष्ण ने द्वारिकापुरी बनाओ" — कृष्ण के कहने पर द्वारका का निर्माण।

राम-सेतु (पद 3). "रामचन्द्र ने पूजन की तब सेतु बांध रचि डारो" — राम की पूजा पर समुद्र पर सेतु रचा गया, जिससे सारी सेना पार हुई और लंका पर विजय मिली।

शिल्पी की माँग (पद 4). भक्त — प्रायः कारीगर और शिल्पी — माँगता है: "शिल्प विद्या का दो प्रकाश, मेरा जीवन सफल बनावो"।

आरती (लिरिक्स)

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प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो प्रभु विश्वकर्मा॥

(टेक) हे प्रभु श्री विश्वकर्मा, हमारे घर आइए, हे प्रभु विश्वकर्मा।

सुदामा की विनय सुनी और कंचन महल बनाये। सकल पदारथ देकर प्रभु जी दुखियों के दुख टारे॥

आपने सुदामा की विनती सुनी और सोने का महल बनाया; हे प्रभु, सब पदार्थ देकर आपने दुखियों के दुख दूर किए।

विनय करी भगवान कृष्ण ने द्वारिकापुरी बनाओ। ग्वाल बालों की रक्षा की प्रभु की लाज बचायो॥

भगवान कृष्ण ने विनती की कि द्वारिकापुरी बनाइए; आपने ग्वाल-बालों की रक्षा की और प्रभु की लाज बचाई।

रामचन्द्र ने पूजन की तब सेतु बांध रचि डारो। सब सेना को पार किया प्रभु लंका विजय करावो॥

जब रामचंद्र ने (आपकी) पूजा की, तब आपने सेतु बाँधकर रच दिया; सारी सेना को पार कराया और प्रभु को लंका पर विजय दिलाई।

श्री कृष्ण की विजय सुनो प्रभु आके दर्श दिखावो। शिल्प विद्या का दो प्रकाश मेरा जीवन सफल बनावो॥

श्री कृष्ण की विजय (का प्रसंग) सुनिए, हे प्रभु, आकर दर्शन दीजिए; शिल्प-विद्या का प्रकाश दीजिए और मेरा जीवन सफल बनाइए।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. (टेक) हे प्रभु श्री विश्वकर्मा, हमारे घर आइए, हे प्रभु विश्वकर्मा।
  2. आपने सुदामा की विनती सुनी और सोने का महल बनाया; हे प्रभु, सब पदार्थ देकर आपने दुखियों के दुख दूर किए।
  3. भगवान कृष्ण ने विनती की कि द्वारिकापुरी बनाइए; आपने ग्वाल-बालों की रक्षा की और प्रभु की लाज बचाई।
  4. जब रामचंद्र ने (आपकी) पूजा की, तब आपने सेतु बाँधकर रच दिया; सारी सेना को पार कराया और प्रभु को लंका पर विजय दिलाई।
  5. श्री कृष्ण की विजय (का प्रसंग) सुनिए, हे प्रभु, आकर दर्शन दीजिए; शिल्प-विद्या का प्रकाश दीजिए और मेरा जीवन सफल बनाइए।

लाभ

  • कारीगरों और शिल्पियों का पाठ — "शिल्प विद्या का दो प्रकाश"।
  • नए काम, औज़ार या भवन के आरंभ पर शुभ कामना।

कब करें पाठ

विश्वकर्मा पूजा के दिननए औज़ार, मशीन, वाहन या भवन के आरंभ परकार्यशाला और कारखाने की पूजा में

पाठ विधि

विश्वकर्मा जी के चित्र के साथ अपने औज़ार, मशीन या काम की सामग्री भी पूजा में रखें; दीपक जलाकर तिलक और पुष्प अर्पित करें। टेक "प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — श्री विश्वकर्मा आरती (आधार-पाठ) · dharmyaatra.in — श्री विश्वकर्मा जी की आरती · bhaktiras.in — विश्वकर्मा जी की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री विश्वकर्मा आरती — सामान्य प्रश्न