FAQ
श्री शनि देव — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि देव सूर्य व छाया के पुत्र तथा नवग्रहों में न्याय के अधिष्ठाता हैं। वे प्रत्येक जीव को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसी कारण उन्हें "कर्मफलदाता" कहा जाता है।
परंपरा के अनुसार श्री शनि देव का वाहन कौआ / गिद्ध है। उनकी शक्ति/संगिनी नीलादेवी मानी जाती हैं।
श्री शनि देव का बीज मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" है। रोमन में इसे "Om Sham Shanaishcharaya Namah" लिखा जाता है। मंत्र-जप श्रद्धा व नियमितता पर आधारित परंपरा है।
परंपरा में श्री शनि देव की आराधना के लिए शनिवार विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत, मंत्र-जप और संबंधित पाठ का विधान बताया जाता है।
श्री शनि देव को शनैश्चर, सूर्यपुत्र, छायासुत, मंदगति आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
श्याम वर्ण, नीलाम्बरधारी, हाथ में गदा/धनुष, कौए या गिद्ध पर आरूढ़, मंद गति। परंपरा में उन्हें न्याय, कर्मफल, अनुशासन, धैर्य का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री शनि देव से जुड़े 4 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
