ॐ शं शनैश्चराय नमः

oṃ śaṃ śanaiścarāya namaḥ

Shani Mantra

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शनिवार
उद्देश्य:शनि दोष शांति (Saturn Remedy)न्याय (Justice)धैर्य (Patience)
✓ संपूर्ण बीज मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः शनि देव का सबसे प्रचलित मंत्र है — इसमें "शं" बीजाक्षर है, और अर्थ है "शनैश्चर (शनि देव) को नमस्कार"। इसे शनि की शांति, धैर्य और न्याय के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार, विशेषकर शनिवार को।

परिचय

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

स्रोत: पारंपरिक नवग्रह शनि मंत्र

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ शं शनैश्चराय नमः
IASToṃ śaṃ śanaiścarāya namaḥ
प्रकारबीज मंत्र (मूल मंत्र भी)
देवताश्री शनि देव
मूल स्रोतपारंपरिक नवग्रह शनि मंत्र
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या नीलम माला
शुभ दिनशनिवार
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

ॐ शं शनैश्चराय नमः पारंपरिक नवग्रह शनि मंत्र के रूप में जाना जाता है। शनैश्चर (शनि देव) को नमस्कार। यहाँ "शं" शनि देव का बीजाक्षर है; यह मंत्र शनि की कृपा और कर्म-न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: ॐ — प्रणव — परब्रह्म का प्रतीक; शं — शनि का बीजाक्षर; शनैश्चराय — शनैश्चर (मंद गति से चलने वाले शनि) को; नमः — नमस्कार। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह बीज मंत्र है — अर्थात इसका केंद्र बीजाक्षर है, जिसका अर्थ शब्दकोश से नहीं, ध्वनि व परंपरा से लिया जाता है। इसी कारण बीज मंत्रों में उच्चारण-शुद्धि पर सबसे अधिक बल दिया जाता है, और परंपरा इनके लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ मानती है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या नीलम माला बताई जाती है। इसके लिए शनिवार विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

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मंत्र

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ॐ शं शनैश्चराय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ शं शनैश्चराय नमः॥

oṃ śaṃ śanaiścarāya namaḥ ||

Om Sham Shanaishcharaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "शं" को अनुस्वार सहित ("शम्") नासिक्य ध्वनि में बोलें। फिर "श-नै-श्च-रा-य" में "नै" व "श्च" का स्पष्ट उच्चारण करें और अंत में "न-मः"। मंत्र को धीमे व स्थिर स्वर में दोहराएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
शंशनि का बीजाक्षर
शनैश्चरायशनैश्चर (मंद गति से चलने वाले शनि) को
नमःनमस्कार

अर्थ (हिन्दी)

  1. शनैश्चर (शनि देव) को नमस्कार। यहाँ "शं" शनि देव का बीजाक्षर है; यह मंत्र शनि की कृपा और कर्म-न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

लाभ

  • शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव में राहत मिलती है।
  • धैर्य, अनुशासन और कर्म के प्रति निष्ठा बढ़ती है।
  • बाधाएँ दूर होकर न्यायपूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या नीलम माला

उत्तम समय: शनिवार संध्या

जप का उत्तम समय

शनिवार कोसाढ़ेसाती व ढैय्या के काल मेंसंध्या समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शनि देव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर नीले या काले आसन पर बैठें और लोहे/नीलम या रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। शनिवार को नित्य जप व सेवा (जैसे जरूरतमंदों को भोजन) विशेष शुभ माना जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराblog.shlokmantra.com — नवग्रह बीज मंत्र · hindi.webdunia.com — 9 ग्रहों के मंत्र और उनका दान
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शनि देव

Lord Shani (Saturn)

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

देवता वर्गन्याय · कर्मफल · अनुशासन · धैर्य
वाहनकौआ / गिद्ध
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