श्री शनिदेव आरती

śrī śanideva āratī

Shani Dev Aarti (Jai Jai Shri Shanidev)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शनिवार संध्या; शनि जयंती
उद्देश्य:शनि-शांति (Pacifying Saturn)रक्षा (Protection)धैर्य (Patience)
✓ संपूर्ण

"जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" शनिदेव की प्रचलित आरती है। इसके पाँच पद हैं — परिचय (सूर्य के पुत्र, माता छाया), रूप (श्याम अंग, वक्र दृष्टि, चार भुजाएँ, हाथी की सवारी), शृंगार, भोग (लोहा, तिल, तेल, उड़द) और अंत में शरण: "विश्वनाथ धरत ध्यान, हम हैं शरण तुम्हारी"।

परिचय

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

स्रोत: "जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री शनिदेव आरती
IASTśrī śanideva āratī
देवताश्री शनि देव
मूल स्रोत"जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" — परंपरागत आरती
शुभ दिनशनिवार संध्या; शनि जयंती
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

शनिदेव का नाम सुनते ही भय की बात होने लगती है, पर यह आरती उन्हें पहली ही पंक्ति में "भक्तन हितकारी" — भक्तों का हित करने वाले — कहती है।

परिचय (पद 1). "सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी" — शनि सूर्य के पुत्र हैं और छाया उनकी माता।

रूप (पद 2–3). श्याम अंग, वक्र दृष्टि (टेढ़ी नज़र — वही दृष्टि जिससे शनि की पीड़ा का भय जुड़ा है), चार भुजाएँ, नीले वस्त्र और हाथी की सवारी। सिर पर मुकुट, माथे पर तेज और गले में मोतियों की माला।

भोग (पद 4). मोदक, मिठाई, पान-सुपारी — और शनि के विशेष द्रव्य: "लोहा, तिल, तेल, उड़द, महिषी है अति प्यारी"। शनिवार को तेल, तिल और उड़द के दान की परंपरा इसी से जुड़ती है।

शरण (पद 5). देवता, दानव, ऋषि-मुनि और नर-नारी सब उनका स्मरण करते हैं, और स्वयं विश्वनाथ (शिव) उनका ध्यान करते हैं — इसलिए भक्त कहता है: "हम हैं शरण तुम्हारी"।

आरती (लिरिक्स)

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जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

हे भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव, आपकी जय हो, जय हो! हे प्रभु, आप सूर्य के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

आपका अंग श्याम (साँवला) है, दृष्टि वक्र (टेढ़ी) है, और आप चार भुजाएँ धारण करते हैं; हे नाथ, आप नीले वस्त्र धारण करते हैं और हाथी पर सवारी करते हैं।

क्रीट मुकुट शीश सहज दिपत है लिलारी। मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी॥

सिर पर किरीट-मुकुट है और माथा सहज ही दमकता है; गले में मोतियों की माला शोभा पाती है — इस छवि पर मैं बलिहारी जाता हूँ।

मोदक और मिष्ठान चढ़े, चढ़ती पान सुपारी। लोहा, तिल, तेल, उड़द महिषी है अति प्यारी॥

आपको मोदक और मिठाइयाँ चढ़ती हैं, पान-सुपारी चढ़ती है; लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको अत्यंत प्रिय हैं।

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान हम हैं शरण तुम्हारी॥

देवता, दानव, ऋषि-मुनि और नर-नारी सब आपका स्मरण करते हैं; विश्वनाथ (शिव) भी आपका ध्यान करते हैं — हम आपकी शरण में हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव, आपकी जय हो, जय हो! हे प्रभु, आप सूर्य के पुत्र हैं और छाया आपकी माता हैं।
  2. आपका अंग श्याम (साँवला) है, दृष्टि वक्र (टेढ़ी) है, और आप चार भुजाएँ धारण करते हैं; हे नाथ, आप नीले वस्त्र धारण करते हैं और हाथी पर सवारी करते हैं।
  3. सिर पर किरीट-मुकुट है और माथा सहज ही दमकता है; गले में मोतियों की माला शोभा पाती है — इस छवि पर मैं बलिहारी जाता हूँ।
  4. आपको मोदक और मिठाइयाँ चढ़ती हैं, पान-सुपारी चढ़ती है; लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको अत्यंत प्रिय हैं।
  5. देवता, दानव, ऋषि-मुनि और नर-नारी सब आपका स्मरण करते हैं; विश्वनाथ (शिव) भी आपका ध्यान करते हैं — हम आपकी शरण में हैं।

लाभ

  • शनिवार की पूजा का समापन — आरती शनि को पहली पंक्ति में "भक्तन हितकारी" कहती है।
  • शरणागति का भाव — "हम हैं शरण तुम्हारी"।
  • पद 4 शनि के प्रिय द्रव्य गिनाता है — लोहा, तिल, तेल, उड़द — जिनका शनिवार को दान किया जाता है।

कब करें पाठ

शनिवार संध्या कोशनि जयंती परसाढ़ेसाती या ढैया के समय शनि-पूजा में

पाठ विधि

शनिवार संध्या को शनिदेव के समक्ष सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएँ; काले तिल, उड़द और नीले पुष्प अर्पित करें — पद 4 यही द्रव्य गिनाता है। टेक "जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — शनिदेव की आरती (आधार-पाठ) · divineaarti.com — Shani Dev Aarti · bhaktvatsal.com — शनिदेव जी की आरती · bhaktibharat.com — आरती: श्री शनिदेव जी · bhaktitak.com — श्री शनि देव आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में छाप नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री शनि देव

Lord Shani (Saturn)

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

देवता वर्गन्याय · कर्मफल · अनुशासन · धैर्य
वाहनकौआ / गिद्ध
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मुख्य मंत्रॐ शं शनैश्चराय नमः
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