समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण
FAQ
श्री शनिदेव आरती — सामान्य प्रश्न
शनिदेव की आरती शनिवार को, विशेषकर संध्या काल में करना सर्वोत्तम माना जाता है; शनि जयंती पर इसका विशेष महत्व है।
शनिदेव को सरसों/तिल का तेल, काले तिल, उड़द, नीले पुष्प व लोहे की वस्तु अर्पित करना शुभ माना जाता है।
श्रद्धापूर्वक शनि आरती व पूजा से साढ़ेसाती व ढैया की पीड़ा कम होती है तथा मन को धैर्य व स्थिरता मिलती है।
हाँ, शनिदेव न्याय के देव हैं; सच्चे कर्म व श्रद्धा से उनकी आराधना करने पर भय व संकट दूर होते हैं।
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