समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शनिवार संध्या; शनि जयंती
उद्देश्य:शनि-शांति (Pacifying Saturn)रक्षा (Protection)धैर्य (Patience)
✓ संपूर्ण
"जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" शनिदेव की प्रचलित आरती है। इसके पाँच पद हैं — परिचय (सूर्य के पुत्र, माता छाया), रूप (श्याम अंग, वक्र दृष्टि, चार भुजाएँ, हाथी की सवारी), शृंगार, भोग (लोहा, तिल, तेल, उड़द) और अंत में शरण: "विश्वनाथ धरत ध्यान, हम हैं शरण तुम्हारी"।
FAQ
श्री शनिदेव आरती — सामान्य प्रश्न
पाँच — परिचय, रूप, शृंगार, भोग और शरण। पाँचों प्रकाशित प्रतियों में ये पाँचों पद हैं; हर पद के बाद टेक "जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" गाई जाती है।
आरती की पहली ही पंक्ति कहती है — "सूरज के पुत्र प्रभु, छाया महतारी": शनि सूर्य के पुत्र हैं और छाया उनकी माता।
आरती का चौथा पद बताता है — मोदक, मिठाई, पान-सुपारी, और विशेष रूप से "लोहा, तिल, तेल, उड़द"। शनिवार को तेल का दीपक जलाने और तिल-उड़द के दान की परंपरा यहीं से जुड़ती है।
दो प्रचलित पाठ हैं। भक्तिभारत और भक्तितक "मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी" और अंत में "शरण हैं तुम्हारी" छापते हैं; द्रिक पंचांग, डिवाइन आरती और भक्तवत्सल "मोदक और मिष्ठान चढ़े, चढ़ती पान सुपारी" और "हम हैं शरण तुम्हारी"। अर्थ दोनों का एक है; यहाँ तीन प्रतियों वाला पाठ रखा गया है।
पाँच प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार), डिवाइन आरती, भक्तवत्सल, भक्तिभारत और भक्तितक। पाँचों पद सबमें हैं।
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