श्री शनिदेव आरती

śrī śanideva āratī

Shani Dev Aarti (Jai Jai Shri Shanidev)

समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

स्रोत: पारंपरिक शनिदेव आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री शनिदेव सूर्यपुत्र तथा न्याय व कर्मफल के अधिष्ठाता देव हैं। यह आरती शनिवार को शनिदेव की पूजा के पश्चात गाई जाती है, जिससे साढ़ेसाती, ढैया व शनि दोष की पीड़ा शांत होकर कर्मफल में संतुलन आता है।

आरती (लिरिक्स)

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जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

हे भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव, आपकी जय हो! आप सूर्य के पुत्र तथा माता छाया के लाल हैं।

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

श्याम वर्ण शरीर, टेढ़ी दृष्टि व चार भुजाओं वाले; नीले वस्त्र धारण किए तथा गज (हाथी/गिद्ध) पर सवार रहने वाले प्रभु।

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

मस्तक पर मुकुट सुशोभित है व ललाट दीप्तिमान है; गले में मोतियों की माला अति शोभा देती है — मैं बलिहारी जाता हूँ।

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

आपको मोदक, मिष्ठान्न, पान व सुपारी अर्पित किए जाते हैं; लोहा, तिल, तेल, उड़द तथा भैंस (महिषी) आपको अति प्रिय हैं।

जो यह शनि चालीसा पढ़ै सुनै नित धारी। अन्त समय भयभीत बने नहिं संकट भारी॥

जो भक्त नित्य श्रद्धापूर्वक शनिदेव की वंदना पढ़ता-सुनता है, उस पर कोई भारी संकट नहीं आता तथा वह भयमुक्त रहता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव, आपकी जय हो! आप सूर्य के पुत्र तथा माता छाया के लाल हैं।
  2. श्याम वर्ण शरीर, टेढ़ी दृष्टि व चार भुजाओं वाले; नीले वस्त्र धारण किए तथा गज (हाथी/गिद्ध) पर सवार रहने वाले प्रभु।
  3. मस्तक पर मुकुट सुशोभित है व ललाट दीप्तिमान है; गले में मोतियों की माला अति शोभा देती है — मैं बलिहारी जाता हूँ।
  4. आपको मोदक, मिष्ठान्न, पान व सुपारी अर्पित किए जाते हैं; लोहा, तिल, तेल, उड़द तथा भैंस (महिषी) आपको अति प्रिय हैं।
  5. जो भक्त नित्य श्रद्धापूर्वक शनिदेव की वंदना पढ़ता-सुनता है, उस पर कोई भारी संकट नहीं आता तथा वह भयमुक्त रहता है।

लाभ

  • साढ़ेसाती, ढैया व शनि दोष की पीड़ा शांत होती है।
  • कर्मफल में संतुलन तथा न्याय की प्राप्ति होती है।
  • विघ्न, विलंब व भय दूर होकर धैर्य व स्थिरता आती है।

कब करें पाठ

शनिवार कोसंध्या काल मेंशनि दोष/साढ़ेसाती के समयशनि जयंती पर

पाठ विधि

शनिवार संध्या को शनिदेव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, काले तिल व नीले पुष्प अर्पित करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ और तत्पश्चात तेल-दीप का दान करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शनि देव

Lord Shani (Saturn)

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

देवता वर्गन्याय · कर्मफल · अनुशासन · धैर्य
वाहनकौआ / गिद्ध
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मुख्य मंत्रॐ शं शनैश्चराय नमः
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श्री शनिदेव आरती — सामान्य प्रश्न

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