श्री ब्रह्मा आरती

śrī brahmā āratī

Brahma Aarti (Pitu Matu Sahayak Swami Sakha)

समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
पूर्णिमा; किसी शुभ कार्य का आरंभ
उद्देश्य:शरणागति (Surrender)शांति (Peace)शुभ आरम्भ (Auspicious beginnings)
✓ संपूर्ण

प्रकाशक "ब्रह्मा जी की आरती" के रूप में जिस रचना को छापते हैं, वह है — "पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो"। इसके पाँच छंद हैं, और हर पंक्ति "…हो" पर समाप्त होती है। यह भगवान को पिता, माता, सहायक, स्वामी और सखा — सब एक साथ कहकर पुकारती है।

परिचय

स्रोत: "पितु मातु सहायक स्वामी सखा" — प्रकाशक इसे ब्रह्मा जी की आरती के रूप में छापते हैं

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री ब्रह्मा आरती
IASTśrī brahmā āratī
मूल स्रोत"पितु मातु सहायक स्वामी सखा" — प्रकाशक इसे ब्रह्मा जी की आरती के रूप में छापते हैं
शुभ दिनपूर्णिमा; किसी शुभ कार्य का आरंभ
पाठ समय2–3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती रूप-वर्णन नहीं करती; यह केवल संबंध गिनाती है — जिसका कोई और आधार नहीं, उसके रखवाले वही हैं।

सब संबंध एक में (छंद 1). "पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो; जिनके कुछ और आधार नहीं, तिनके तुम ही रखवारे हो"।

भूलने वाला भक्त, न भूलने वाले प्रभु (छंद 3). "भूल गये हैं हम तो तुमको, तुम तो हमरी सुधि नाहिं बिसारे हो" — हम उन्हें भूल गए, पर वे हमारी सुध कभी नहीं भूलते; और उनके उपकारों का कोई अंत नहीं, जो क्षण-क्षण बढ़ते जाते हैं।

जीवन का जीवन (छंद 5). "इस जीवन के तुम जीवन हो, इन प्राणन के तुम प्यारे हो" — और अंत में छाप के साथ समर्पण: प्रभु को पाकर अब किसी और के सहारे की क्या ज़रूरत।

छाप. अंतिम छंद में द्रिक पंचांग और आरती ज्ञान "प्रताप" छापते हैं, और दो अन्य प्रकाशक "कमल" — रचयिता के बारे में किसी प्रति में और जानकारी नहीं।

आरती (लिरिक्स)

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पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो। जिनके कुछ और आधार नहीं, तिनके तुम ही रखवारे हो॥

आप ही पिता, माता, सहायक, स्वामी और सखा हैं — आप ही हमारे एकमात्र नाथ हैं; जिनका कोई और आधार नहीं, उनके रखवाले आप ही हैं।

सब भाँति सदा सुखदायक हो, दुःख निर्गुण नाशन हारे हो। प्रतिपाल करो सिगरे जग को, अतिशय करुणा उर धारे हो॥

आप हर प्रकार से सदा सुख देने वाले हैं, दुख और दुर्गुणों का नाश करने वाले हैं; आप सारे जगत का पालन करते हैं, और हृदय में अत्यधिक करुणा धारण किए हैं।

भूल गये हैं हम तो तुमको, तुम तो हमरी सुधि नाहिं बिसारे हो। उपकारन को कछु अन्त नहीं, छिन ही छिन जो विस्तारे हो॥

हम तो आपको भूल गए हैं, पर आप हमारी सुध कभी नहीं भूलते; आपके उपकारों का कोई अंत नहीं, जिन्हें आप क्षण-क्षण बढ़ाते जाते हैं।

महाराज महा महिमा तुम्हरी, मुझसे बिरले बुधवारे हो। शुभ शान्ति निकेतन प्रेमनिधि, मन मन्दिर के उजियारे हो॥

हे महाराज, आपकी महिमा महान है — मुझ जैसे (अल्पबुद्धि) से विरले ही बुद्धिमान (उसे जानते) हैं; आप शुभ और शांति के धाम, प्रेम के सागर और मन-मंदिर के उजाले हैं।

इस जीवन के तुम जीवन हो, इन प्राणन के तुम प्यारे हो। तुम सों प्रभु पाय 'प्रताप' हरि, केहि के अब और सहारे हो॥

आप इस जीवन के भी जीवन हैं, इन प्राणों के प्रिय हैं; हे हरि, आप जैसे प्रभु को पाकर ("प्रताप" कहते हैं) अब और किसके सहारे की ज़रूरत है?

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अर्थ (हिन्दी)

  1. आप ही पिता, माता, सहायक, स्वामी और सखा हैं — आप ही हमारे एकमात्र नाथ हैं; जिनका कोई और आधार नहीं, उनके रखवाले आप ही हैं।
  2. आप हर प्रकार से सदा सुख देने वाले हैं, दुख और दुर्गुणों का नाश करने वाले हैं; आप सारे जगत का पालन करते हैं, और हृदय में अत्यधिक करुणा धारण किए हैं।
  3. हम तो आपको भूल गए हैं, पर आप हमारी सुध कभी नहीं भूलते; आपके उपकारों का कोई अंत नहीं, जिन्हें आप क्षण-क्षण बढ़ाते जाते हैं।
  4. हे महाराज, आपकी महिमा महान है — मुझ जैसे (अल्पबुद्धि) से विरले ही बुद्धिमान (उसे जानते) हैं; आप शुभ और शांति के धाम, प्रेम के सागर और मन-मंदिर के उजाले हैं।
  5. आप इस जीवन के भी जीवन हैं, इन प्राणों के प्रिय हैं; हे हरि, आप जैसे प्रभु को पाकर ("प्रताप" कहते हैं) अब और किसके सहारे की ज़रूरत है?

लाभ

  • शरणागति का भाव — "जिनके कुछ और आधार नहीं, तिनके तुम ही रखवारे हो"।
  • प्रभु की करुणा पर भरोसा — "तुम तो हमरी सुधि नाहिं बिसारे हो"।
  • किसी शुभ कार्य के आरंभ और पूर्णिमा की पूजा में सरल प्रार्थना।

कब करें पाठ

पूर्णिमा कोकिसी शुभ कार्य के आरंभ मेंप्रातः व संध्या प्रार्थना में

पाठ विधि

दीपक जलाकर हाथ जोड़ें और पाँचों छंद धीमे, भाव से पढ़ें या गाएँ। यह आरती रूप-वर्णन नहीं, प्रार्थना है — इसलिए इसे अर्थ समझते हुए पढ़ना अधिक उपयुक्त है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — आरती श्री ब्रह्मा जी (आधार-पाठ) · aartigyan.com — ब्रह्मा जी की आरती · knowledgegallery.in — ब्रह्मा जी की आरती · lordshiva.co.in — ब्रह्मा जी की आरती
रचयिताछाप "प्रताप" (दो प्रतियों में "कमल")
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री ब्रह्मा आरती — सामान्य प्रश्न

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