श्री ब्रह्मा आरती

śrī brahmā āratī

Brahma Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक ब्रह्मा आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता तथा त्रिदेवों में प्रथम हैं; इन्हें चतुर्मुख, विधाता व प्रजापति कहा जाता है। पुष्कर (राजस्थान) में इनका प्रसिद्ध मंदिर है। यह आरती कार्तिक पूर्णिमा व सृष्टि-वंदना हेतु गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय ब्रह्मा देवा, स्वामी जय ब्रह्मा देवा। सृष्टि रचयिता तुम हो, करूँ मैं तव सेवा॥

हे ब्रह्मा देव, आपकी जय हो! आप सृष्टि के रचयिता हैं; मैं आपकी सेवा करता हूँ।

चतुर्मुख रूप विराजे, हंस पर असवारी। कर में वेद-कमण्डलु, माला अति प्यारी॥

चार मुख वाले रूप में विराजमान, हंस पर सवारी करते हुए; हाथों में वेद, कमण्डलु व माला अति शोभा देते हैं।

सावित्री संग शोभे, ज्ञान-विधाता हो। वेदों के तुम स्रोता, जग के दाता हो॥

देवी सावित्री के संग सुशोभित, आप ज्ञान के विधाता हैं; आप वेदों के स्रोत व जगत को देने वाले हैं।

पुष्कर धाम विराजे, तीर्थ अति पावन। भक्तन को सुख देते, हरते मन के अघन॥

अति पवित्र तीर्थ पुष्कर धाम में आप विराजमान हैं; भक्तों को सुख देते हैं और मन के पापों को हर लेते हैं।

ब्रह्मा जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। ज्ञान-विवेक वह पावे, सुख-शान्ति पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से ब्रह्मा जी की यह आरती गाता है, वह ज्ञान-विवेक तथा सुख-शांति प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे ब्रह्मा देव, आपकी जय हो! आप सृष्टि के रचयिता हैं; मैं आपकी सेवा करता हूँ।
  2. चार मुख वाले रूप में विराजमान, हंस पर सवारी करते हुए; हाथों में वेद, कमण्डलु व माला अति शोभा देते हैं।
  3. देवी सावित्री के संग सुशोभित, आप ज्ञान के विधाता हैं; आप वेदों के स्रोत व जगत को देने वाले हैं।
  4. अति पवित्र तीर्थ पुष्कर धाम में आप विराजमान हैं; भक्तों को सुख देते हैं और मन के पापों को हर लेते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से ब्रह्मा जी की यह आरती गाता है, वह ज्ञान-विवेक तथा सुख-शांति प्राप्त करता है।

लाभ

  • ज्ञान, विवेक व बुद्धि में वृद्धि होती है।
  • मन को शांति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • सृष्टि व कर्म के प्रति श्रद्धा व समझ बढ़ती है।

कब करें पाठ

कार्तिक पूर्णिमा (पुष्कर मेला) परप्रातः पूजा मेंकिसी शुभ कार्य-आरंभ पर

पाठ विधि

भगवान ब्रह्मा के समक्ष श्वेत/पीले पुष्प व दीप अर्पित करें, वेद-वंदना करते हुए आरती गाएँ। कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर में पूजा का विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री ब्रह्मा आरती — सामान्य प्रश्न

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