समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
पूर्णिमा; किसी शुभ कार्य का आरंभ
उद्देश्य:शरणागति (Surrender)शांति (Peace)शुभ आरम्भ (Auspicious beginnings)
✓ संपूर्ण
प्रकाशक "ब्रह्मा जी की आरती" के रूप में जिस रचना को छापते हैं, वह है — "पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो"। इसके पाँच छंद हैं, और हर पंक्ति "…हो" पर समाप्त होती है। यह भगवान को पिता, माता, सहायक, स्वामी और सखा — सब एक साथ कहकर पुकारती है।
FAQ
श्री ब्रह्मा आरती — सामान्य प्रश्न
द्रिक पंचांग, आरती ज्ञान, नॉलेज गैलरी और लॉर्डशिवा — चारों प्रकाशक "पितु मातु सहायक स्वामी सखा" को ब्रह्मा जी की आरती के रूप में छापते हैं। इसके पाँच छंद हैं।
दोनों रूप प्रचलित हैं, दो-दो प्रतियों में — द्रिक पंचांग और आरती ज्ञान "तुम सों प्रभु पाय 'प्रताप' हरि" छापते हैं, नॉलेज गैलरी और लॉर्डशिवा "पाए 'कमल' हरि"। यह रचयिता की छाप है; यहाँ द्रिक पंचांग का रूप रखा गया है। रचयिता के बारे में किसी प्रति में और जानकारी नहीं।
चार प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार), आरती ज्ञान, नॉलेज गैलरी और लॉर्डशिवा। पाँचों छंद चारों में हैं।
पर्व
