राम नवमी

Ram Navami

मार्च–अप्रैल

महत्व

राम नवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है — धर्मशास्त्रों के अनुसार वही दिन जब मर्यादा-पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ था।

यह चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन भी है, इसलिए अनेक घरों में नवरात्र का पारण इसी दिन होता है। जन्म का काल मध्याह्न माना जाता है, अतः पूजा का मुख्य समय दोपहर रहता है।

अयोध्या में इस दिन विशेष उत्सव होता है। देश भर में रामचरितमानस का पाठ, राम-कीर्तन, शोभायात्रा तथा व्रत की परंपरा है।

पूजन विधि व परंपरा

  • मध्याह्न काल में राम जन्मोत्सव
  • रामचरितमानस अथवा रामरक्षा स्तोत्र का पाठ
  • राम आरती व राम चालीसा
  • झूला-श्रृंगार तथा शोभायात्रा
  • उपवास; पंचामृत व पंजीरी का भोग
  • हवन तथा प्रसाद वितरण
  • चैत्र नवरात्र का पारण

व्रत कथा

राम नवमी की सम्पूर्ण व्रत कथा, पूजन सामग्री, चरण-दर-चरण विधि, व्रत के नियम तथा लाभ — सब कुछ एक ही पृष्ठ पर दिया गया है।

राम नवमी व्रत कथा पढ़ें

तिथि / पंचांग

तिथिनवमी
पक्षशुक्ल
माहचैत्र
समय (लगभग)मार्च–अप्रैल
आराध्यश्री राम
मूल परंपरावाल्मीकि रामायण, बालकाण्ड — पुत्रकामेष्टि यज्ञ तथा राम-जन्म प्रसंग
व्रत प्रकारतिथि व्रत (चैत्र शुक्ल नवमी) — मध्याह्न पूजन सहित
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/राम_नवमी — चैत्र शुक्ल नवमी; श्रीराम के जन्म का दिन
आज का पंचांग

राम नवमी — सामान्य प्रश्न

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