श्री राम आरती

śrī rāma āratī

Ram Aarti (Shri Ramchandra Kripalu)

समय
4 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान विष्णु के अवतार और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।

स्रोत: श्री रामचन्द्र कृपालु स्तुति — रचयिता गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका), सामान्यतः आरती-काल में गाई जाती है

आरती (लिरिक्स)

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श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥

हे मन! कृपालु श्री रामचंद्र का भजन कर, जो संसार के भयंकर भय का हरण करते हैं; जिनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण नवविकसित कमल के समान सुंदर व अरुण हैं।

कन्दर्प अगणित अमित छबि, नवनील नीरज सुन्दरम्। पटपीत मानहुँ तड़ित रुचि, शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥

जिनकी छवि असंख्य कामदेवों से भी अधिक मनोहर और नवीन नीलकमल-सी सुंदर है; पीताम्बर मानो बिजली-सी चमक वाला है — ऐसे जनकनंदिनी सीता के वर श्रीराम को मैं नमन करता हूँ।

भजु दीनबन्धु दिनेश, दानव दैत्य वंश निकन्दनम्। रघुनन्द आनन्द कन्द, कोशल चन्द दशरथ नन्दनम्॥

दीनों के बंधु, सूर्य-समान तेजस्वी, दानव-दैत्य वंश का नाश करने वाले; रघुकुल को आनंदित करने वाले, कोशल देश के चंद्रमा और दशरथनंदन श्रीराम का भजन कर।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक, चारु उदारु अंग विभूषणम्। आजानु भुज शर चाप धर, सङ्ग्राम जित खर दूषणम्॥

सिर पर मुकुट, कानों में कुण्डल, मस्तक पर तिलक और अंगों पर सुंदर आभूषण; घुटनों तक लंबी भुजाओं वाले, धनुष-बाण धारी, जिन्होंने संग्राम में खर-दूषण को परास्त किया।

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनम्॥

तुलसीदास कहते हैं — हे शिव, शेष व मुनियों के मन को आनंदित करने वाले प्रभु! काम-क्रोधादि दुष्ट गणों का नाश करते हुए मेरे हृदय-कमल में निवास कीजिए।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे मन! कृपालु श्री रामचंद्र का भजन कर, जो संसार के भयंकर भय का हरण करते हैं; जिनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण नवविकसित कमल के समान सुंदर व अरुण हैं।
  2. जिनकी छवि असंख्य कामदेवों से भी अधिक मनोहर और नवीन नीलकमल-सी सुंदर है; पीताम्बर मानो बिजली-सी चमक वाला है — ऐसे जनकनंदिनी सीता के वर श्रीराम को मैं नमन करता हूँ।
  3. दीनों के बंधु, सूर्य-समान तेजस्वी, दानव-दैत्य वंश का नाश करने वाले; रघुकुल को आनंदित करने वाले, कोशल देश के चंद्रमा और दशरथनंदन श्रीराम का भजन कर।
  4. सिर पर मुकुट, कानों में कुण्डल, मस्तक पर तिलक और अंगों पर सुंदर आभूषण; घुटनों तक लंबी भुजाओं वाले, धनुष-बाण धारी, जिन्होंने संग्राम में खर-दूषण को परास्त किया।
  5. तुलसीदास कहते हैं — हे शिव, शेष व मुनियों के मन को आनंदित करने वाले प्रभु! काम-क्रोधादि दुष्ट गणों का नाश करते हुए मेरे हृदय-कमल में निवास कीजिए।

लाभ

  • मन से भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है।
  • जीवन में धर्म, मर्यादा और सत्य का बल मिलता है।
  • राम-नाम स्मरण से मन को परम शांति प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

रामनवमी परप्रातः व संध्या पूजा मेंमंगलवार को

पाठ विधि

श्रीराम के समक्ष तुलसीदल, पुष्प व पीले वस्त्र अर्पित करें। दीप-धूप जलाकर "श्री राम जय राम जय जय राम" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। रामनवमी पर रामचरितमानस पाठ के साथ आरती श्रेष्ठ मानी जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरागोस्वामी तुलसीदास — विनय पत्रिका · पारंपरिक हिन्दू स्तुति-आरती संग्रह
रचयितागोस्वामी तुलसीदास
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री राम

Lord Rama

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान विष्णु के अवतार और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।

देवता वर्गधर्म · मर्यादा · सत्य · आदर्श
मुख्य मंत्रॐ रां रामाय नमः
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श्री राम आरती — सामान्य प्रश्न

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