श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली

śrī rāma aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Rama Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
राम नवमी; चैत्र नवरात्रि; गुरुवार
उद्देश्य:पाप-नाश (Freedom from Sin)रक्षा (Protection)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली भगवान श्रीराम के 108 नामों की सूची है, जो श्रीराम से आरंभ होकर पर (सबसे परे) पर समाप्त होती है। हर नाम "ॐ … नमः" रूप में पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना तथा माला-जप दोनों के लिए उपयुक्त है। पाठ में 8–10 मिनट लगते हैं।

परिचय

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान विष्णु के अवतार और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।

स्रोत: पारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — श्रीराम से आरंभ, "पर" पर समाप्त

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री राम अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī rāma aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री राम
मूल स्रोतपारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — श्रीराम से आरंभ, "पर" पर समाप्त
शुभ दिनराम नवमी; चैत्र नवरात्रि; गुरुवार
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली भगवान श्रीराम के 108 नामों की सूची है। नामावली-रूप में हर नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना — प्रत्येक नाम पर एक तुलसी-दल अर्पित करना — तथा माला-जप, दोनों के लिए उपयुक्त है।

इस सूची की सबसे स्पष्ट विशेषता यह है कि यह आधी रामकथा और आधा वेदांत है, और दोनों आपस में गुँथे हुए हैं। बीच का लंबा खंड सीधे रामायण से आता है — ताटकान्तक (31), अहल्याशापशमन (44), हरकोदण्डखण्डन (27), खरध्वंसी (24), विराधवधपण्डित (25), मायामारीचहन्ता (57), दूषणत्रिशिरोहन्ता (35), वालिप्रमथन (16), सुग्रीवेप्सितराज्यद (66), सेतुकृत् (83), दशग्रीवशिरोहर (29), विभीषणपरित्राता (26)। किंतु अंतिम पच्चीस नाम कथा छोड़कर तत्त्व पर चले जाते हैं — परमात्मा (97), परब्रह्म (98), सच्चिदानन्दविग्रह (99)।

अंत का ढाँचा असामान्य है और ध्यान देने योग्य है। नाम 100 से 106 तक लगातार सात नाम "पर" से बनते हैं — परम ज्योति, परम धाम, पराकाश, परात्पर, परेश, पारग, पार। और 108वाँ नाम केवल पर है, बिना किसी विशेषण के। यानी सूची जितने विशेषण जोड़ सकती थी जोड़कर, अंत में उन्हें हटा देती है और केवल "जो परे है" कहकर रुक जाती है।

एक नाम भक्ति-परंपरा के लिए विशेष है — नाम 22 सदा हनुमदाश्रित, अर्थात "जिनका सदा हनुमान जी आश्रय लेते हैं"। श्रीराम के 108 नामों में हनुमान जी का नाम आना उस अटूट संबंध का संकेत है जो दोनों परंपराओं को जोड़ता है।

दो नाम इतिहास की दृष्टि से रोचक हैं। नाम 95 है शिवलिङ्गप्रतिष्ठातृ — जिन्होंने शिवलिंग की प्रतिष्ठा की; यह रामेश्वरम् का प्रसंग है, जहाँ सेतुबंध से पूर्व श्रीराम ने शिव-पूजन किया। और नाम 58 सीधे महादेव है। एक वैष्णव सूची में शिव का इस तरह आना उसी हरि-हर अभेद परंपरा का अंग है जो शिव व विष्णु दोनों की नामावलियों में मिलती है।

नाम 34 अपनी सादगी में सबसे मार्मिक है — भवरोगस्य भेषजम्, अर्थात "भव-रोग की औषधि"। संसार को रोग और राम-नाम को दवा कहना, इस पूरी सूची का एक वाक्य में सार है।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

परिचय, रघुवंश व सत्य-व्रत (नाम 1–27)

  1. 1.
    ॐ श्रीरामाय नमःश्रीराम
  2. 2.
    ॐ रामभद्राय नमःकल्याणकारी राम
  3. 3.
    ॐ रामचन्द्राय नमःचंद्रमा के समान सौम्य राम
  4. 4.
    ॐ शाश्वताय नमःशाश्वत, नित्य
  5. 5.
    ॐ राजीवलोचनाय नमःकमल-सदृश नेत्रों वाले
  6. 6.
    ॐ श्रीमते नमःश्री से युक्त
  7. 7.
    ॐ राजेन्द्राय नमःराजाओं के इंद्र
  8. 8.
    ॐ रघुपुङ्गवाय नमःरघुवंश में श्रेष्ठ
  9. 9.
    ॐ जानकीवल्लभाय नमःजानकी जी के वल्लभ
  10. 10.
    ॐ जैत्राय नमःजैत्र; विजयशील
  11. 11.
    ॐ जितामित्राय नमःशत्रुओं को जीत लेने वाले
  12. 12.
    ॐ जनार्दनाय नमःजनों के कष्ट दूर करने वाले
  13. 13.
    ॐ विश्वामित्रप्रियाय नमःविश्वामित्र को प्रिय
  14. 14.
    ॐ दान्ताय नमःदान्त; संयमी
  15. 15.
    ॐ शरणत्राणतत्पराय नमःशरणागत की रक्षा में तत्पर
  16. 16.
    ॐ वालिप्रमथनाय नमःबालि का वध करने वाले
  17. 17.
    ॐ वाग्मिने नमःवाग्मी; सुवक्ता
  18. 18.
    ॐ सत्यवाचे नमःसत्य वचन वाले
  19. 19.
    ॐ सत्यविक्रमाय नमःजिनका पराक्रम सत्य है
  20. 20.
    ॐ सत्यव्रताय नमःसत्य ही जिनका व्रत है
  21. 21.
    ॐ व्रतधराय नमःव्रत धारण करने वाले
  22. 22.
    ॐ सदा हनुमदाश्रिताय नमःजिनका सदा हनुमान जी आश्रय लेते हैं
  23. 23.
    ॐ कौसलेयाय नमःकौसल्या के पुत्र
  24. 24.
    ॐ खरध्वंसिने नमःखर राक्षस का ध्वंस करने वाले
  25. 25.
    ॐ विराधवधपण्डिताय नमःविराध-वध में निपुण
  26. 26.
    ॐ विभीषणपरित्रात्रे नमःविभीषण की रक्षा करने वाले
  27. 27.
    ॐ हरकोदण्डखण्डनाय नमःशिव के कोदण्ड (धनुष) को खंडित करने वाले

रामकथा — वध-प्रसंग व वनवास (नाम 28–54)

  1. 28.
    ॐ सप्ततालप्रभेत्रे नमःसात ताल-वृक्षों को एक साथ भेदने वाले
  2. 29.
    ॐ दशग्रीवशिरोहराय नमःदशग्रीव रावण के सिर हरने वाले
  3. 30.
    ॐ जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमःजमदग्नि-पुत्र परशुराम का महान दर्प दलने वाले
  4. 31.
    ॐ ताटकान्तकाय नमःताड़का का अंत करने वाले
  5. 32.
    ॐ वेदान्तसाराय नमःवेदांत के सार
  6. 33.
    ॐ वेदात्मने नमःवेद-स्वरूप
  7. 34.
    ॐ भवरोगस्य भेषजाय नमःभव-रोग की औषधि
  8. 35.
    ॐ दूषणत्रिशिरोहन्त्रे नमःदूषण व त्रिशिरा का वध करने वाले
  9. 36.
    ॐ त्रिमूर्तये नमःत्रिमूर्ति-स्वरूप
  10. 37.
    ॐ त्रिगुणात्मकाय नमःतीनों गुणों की आत्मा
  11. 38.
    ॐ त्रिविक्रमाय नमःत्रिविक्रम-स्वरूप
  12. 39.
    ॐ त्रिलोकात्मने नमःतीनों लोकों की आत्मा
  13. 40.
    ॐ पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमःजिनके पुण्य-चरित्र का कीर्तन किया जाता है
  14. 41.
    ॐ त्रिलोकरक्षकाय नमःतीनों लोकों के रक्षक
  15. 42.
    ॐ धन्विने नमःधनुर्धारी
  16. 43.
    ॐ दण्डकारण्यकर्तनाय नमःदण्डकारण्य में विचरण करने वाले
  17. 44.
    ॐ अहल्याशापशमनाय नमःअहल्या का शाप शमन करने वाले
  18. 45.
    ॐ पितृभक्ताय नमःपिता के भक्त
  19. 46.
    ॐ वरप्रदाय नमःवर देने वाले
  20. 47.
    ॐ जितेन्द्रियाय नमःइंद्रियों को जीत लेने वाले
  21. 48.
    ॐ जितक्रोधाय नमःक्रोध को जीत लेने वाले
  22. 49.
    ॐ जितामित्राय नमःशत्रुओं को जीत लेने वाले
  23. 50.
    ॐ जगद्गुरवे नमःजगत् के गुरु
  24. 51.
    ॐ ऋक्षवानरसङ्घातिने नमःऋक्ष व वानर-सेना को संगठित करने वाले
  25. 52.
    ॐ चित्रकूटसमाश्रयाय नमःचित्रकूट में निवास करने वाले
  26. 53.
    ॐ जयन्तत्राणवरदाय नमःजयन्त की रक्षा कर वर देने वाले
  27. 54.
    ॐ सुमित्रापुत्रसेविताय नमःसुमित्रा-पुत्र लक्ष्मण द्वारा सेवित

महापुरुष-स्वरूप व गुण (नाम 55–81)

  1. 55.
    ॐ सर्वदेवादिदेवाय नमःसमस्त देवों के भी आदिदेव
  2. 56.
    ॐ मृतवानरजीवनाय नमःमृत वानरों को जीवित करने वाले
  3. 57.
    ॐ मायामारीचहन्त्रे नमःमायावी मारीच का वध करने वाले
  4. 58.
    ॐ महादेवाय नमःमहादेव-स्वरूप
  5. 59.
    ॐ महाभुजाय नमःविशाल भुजाओं वाले
  6. 60.
    ॐ सर्वदेवस्तुताय नमःसमस्त देवों द्वारा स्तुत
  7. 61.
    ॐ सौम्याय नमःसौम्य स्वभाव वाले
  8. 62.
    ॐ ब्रह्मण्याय नमःब्राह्मण्य; ब्रह्म-निष्ठ
  9. 63.
    ॐ मुनिसंस्तुताय नमःमुनियों द्वारा स्तुत
  10. 64.
    ॐ महायोगिने नमःमहायोगी
  11. 65.
    ॐ महोदाराय नमःमहान उदार
  12. 66.
    ॐ सुग्रीवेप्सितराज्यदाय नमःसुग्रीव को उनका अभीष्ट राज्य देने वाले
  13. 67.
    ॐ सर्वपुण्याधिकफलाय नमःसमस्त पुण्यों से भी अधिक फल देने वाले
  14. 68.
    ॐ स्मृतसर्वाघनाशनाय नमःस्मरण मात्र से समस्त पापों का नाश करने वाले
  15. 69.
    ॐ आदिपुरुषाय नमःआदिपुरुष
  16. 70.
    ॐ परमपुरुषाय नमःपरम पुरुष
  17. 71.
    ॐ महापुरुषाय नमःमहापुरुष
  18. 72.
    ॐ पुण्योदयाय नमःपुण्य का उदय
  19. 73.
    ॐ दयासाराय नमःदया के सार
  20. 74.
    ॐ पुराणपुरुषोत्तमाय नमःपुराण-वर्णित पुरुषोत्तम
  21. 75.
    ॐ स्मितवक्त्राय नमःमुस्कान भरे मुख वाले
  22. 76.
    ॐ मितभाषिणे नमःमित भाषण करने वाले
  23. 77.
    ॐ पूर्वभाषिणे नमःपहले स्वयं बोलने वाले; विनम्र
  24. 78.
    ॐ राघवाय नमःरघुवंशी राघव
  25. 79.
    ॐ अनन्तगुणगम्भीराय नमःअनन्त गुणों से गंभीर
  26. 80.
    ॐ धीरोदात्तगुणोत्तमाय नमःधीरोदात्त गुणों में उत्तम
  27. 81.
    ॐ मायामानुषचारित्राय नमःमाया से मनुष्य-चरित्र धारण करने वाले

सेतु से परब्रह्म तक — अंतिम समापन (नाम 82–108)

  1. 82.
    ॐ महादेवादिपूजिताय नमःमहादेव आदि द्वारा पूजित
  2. 83.
    ॐ सेतुकृते नमःसेतु का निर्माण करने वाले
  3. 84.
    ॐ जितवारीशाय नमःसमुद्र को जीत लेने वाले
  4. 85.
    ॐ सर्वतीर्थमयाय नमःसमस्त तीर्थों की स्वरूप
  5. 86.
    ॐ हरये नमःहरि
  6. 87.
    ॐ श्यामाङ्गाय नमःश्याम वर्ण अंगों वाले
  7. 88.
    ॐ सुन्दराय नमःसुंदर
  8. 89.
    ॐ शूराय नमःशूरवीर
  9. 90.
    ॐ पीतवाससे नमःपीत वस्त्र धारण करने वाले
  10. 91.
    ॐ धनुर्धराय नमःधनुष धारण करने वाले
  11. 92.
    ॐ सर्वयज्ञाधिपाय नमःसमस्त यज्ञों के अधिपति
  12. 93.
    ॐ यज्विने नमःयज्वा; यज्ञ करने वाले
  13. 94.
    ॐ जरामरणवर्जिताय नमःजरा व मृत्यु से रहित
  14. 95.
    ॐ शिवलिङ्गप्रतिष्ठात्रे नमःशिवलिंग की प्रतिष्ठा करने वाले
  15. 96.
    ॐ सर्वापगुणवर्जिताय नमःसमस्त अवगुणों से रहित
  16. 97.
    ॐ परमात्मने नमःपरमात्मा
  17. 98.
    ॐ परब्रह्मणे नमःपरब्रह्म
  18. 99.
    ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमःसच्चिदानंद स्वरूप
  19. 100.
    ॐ परस्मै ज्योतिषे नमःपरम ज्योति
  20. 101.
    ॐ परस्मै धाम्ने नमःपरम धाम
  21. 102.
    ॐ पराकाशाय नमःपरम आकाश-स्वरूप
  22. 103.
    ॐ परात्पराय नमःपर से भी पर
  23. 104.
    ॐ परेशाय नमःपरम ईश
  24. 105.
    ॐ पारगाय नमःपार तक ले जाने वाले
  25. 106.
    ॐ पाराय नमःपार-स्वरूप
  26. 107.
    ॐ सर्वदेवात्मकाय नमःसमस्त देवों की आत्मा
  27. 108.
    ॐ परस्मै नमःपर; सबसे परे

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • नाम 68 "स्मृतसर्वाघनाशन" के भाव से यह नामावली पाप-नाश तथा चित्त-शुद्धि के संकल्प से पढ़ी जाती है।
    • सूची रामायण के क्रम में चलती है, इसलिए पाठ के साथ बालकाण्ड से लंकाकाण्ड तक के प्रसंग स्वतः स्मरण हो जाते हैं।
    • नाम 34 "भवरोगस्य भेषजम्" — संसार-रोग की औषधि — इस पाठ का मूल भाव है; परंपरा में इसे मानसिक अशांति व भय की स्थिति में पढ़ा जाता है।
    • राम सहस्रनाम की तुलना में यह बहुत छोटी है (8–10 मिनट), अतः राम नवमी व नित्य पूजन में सुविधाजनक रहती है।

    कब करें पाठ

    राम नवमी परचैत्र नवरात्रि मेंगुरुवार को राम-पूजन के समयरामचरितमानस अथवा सुंदरकाण्ड के पाठ से पूर्व

    पाठ विधि

    आरंभ में "ॐ श्री रामाय नमः" तीन बार कहें। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है — प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक तुलसी-दल अथवा पुष्प अर्पित करते जाना। यदि यह संभव न हो तो तुलसी की माला लेकर जप किया जा सकता है; 108 नाम पूरे होने पर ठीक एक माला पूर्ण होती है। पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। अंत में राम चालीसा अथवा रामाष्टकम् पढ़कर आरती करने की परंपरा है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथपारंपरिक राम अष्टोत्तर शतनामावली — मूल ग्रंथ-संदर्भ अनिश्चित
    स्रोत परंपराdrikpanchang.com — भगवान श्रीराम की अष्टोत्तर शतनामावली (आधार सूची; 108 नाम, क्रमांक 1–108 सतत) · brahmabhakti.com — राम अष्टोत्तर शतनामावली; क्रम सहित स्वतंत्र पुष्टि (93.5% अक्षरशः समान) · दोष सुधारे गए (आधार drikpanchang): नाम 44 "अहल्याशापशमन" → अहल्याशापशमनाय; नाम 84 "जितवाराशये" → जितवारीशाय; नाम 65 "महोदराय" → महोदाराय। · वर्तनी-भेद दर्ज: नाम 100–101 — "परस्मै ज्योतिषे / परस्मै धाम्ने" (आधार) बनाम "परंज्योतिषे / परंधाम्ने"; अर्थ अपरिवर्तित। · ⚠️ मूल ग्रंथ व अध्याय-क्रमांक किसी उपलब्ध स्रोत में नहीं मिला, अतः कोई ग्रंथ-नाम नहीं दिया गया। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित।
    रचयितापारंपरिक
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: यह राम सहस्रनाम से भिन्न रचना है — वह 1018 नामों की स्वतंत्र सूची है जो "राजीवलोचन" से आरंभ होती है; यह 108 नामों की छोटी सूची है जो "श्रीराम" से आरंभ होकर "पर" पर समाप्त होती है। मूल ग्रंथ अनिश्चित है — किसी उपलब्ध स्रोत ने पुराण अथवा अध्याय-क्रमांक नहीं दिया, इसलिए यहाँ कोई ग्रंथ-नाम नहीं गढ़ा गया। तुलना-स्रोत के तीन विभक्ति/वर्तनी-दोष सुधारे गए हैं और वे नीचे स्रोत-सूची में दर्ज हैं।

    देव परिचय

    श्री राम

    Lord Rama

    मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान विष्णु के अवतार और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।

    देवता वर्गधर्म · मर्यादा · सत्य · आदर्श
    मुख्य मंत्रॐ रां रामाय नमः
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