श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली

śrī hanumāna aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Hanuman Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार; हनुमान जयंती
उद्देश्य:बल व साहस (Strength & Courage)रक्षा (Protection)संकट-निवारण (Relief from Crisis)
✓ संपूर्ण

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली हनुमान जी के 108 नामों की सूची है, जो आञ्जनेय से आरंभ होकर सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरन्धर पर समाप्त होती है। हर नाम "ॐ … नमः" रूप में पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना तथा माला-जप दोनों के लिए उपयुक्त है। पाठ में 8–10 मिनट लगते हैं।

परिचय

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

स्रोत: कालिकारहस्य वर्णित अष्टोत्तर शतनामावली — आञ्जनेय से आरंभ, सीतासमेत श्रीराम-पाद-सेवा पर समाप्त

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī hanumāna aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री हनुमान
मूल स्रोतकालिकारहस्य वर्णित अष्टोत्तर शतनामावली — आञ्जनेय से आरंभ, सीतासमेत श्रीराम-पाद-सेवा पर समाप्त
शुभ दिनमंगलवार व शनिवार; हनुमान जयंती
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली हनुमान जी के 108 नामों की सूची है और परंपरा में इसका मूल कालिकारहस्य में बताया जाता है। नामावली-रूप में हर नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना — प्रत्येक नाम पर एक पुष्प या सिंदूर-कण अर्पित करना — तथा माला-जप, दोनों के लिए उपयुक्त है।

इस सूची की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गुणों की सूची नहीं, कथा का क्रम है। आरंभ में परिचय के नाम हैं — आञ्जनेय, महावीर, हनूमान्, मारुतात्मज। फिर तंत्र-मंत्र और बंधन-मोचन के नाम — परमन्त्रनिराकर्ता, परयन्त्रप्रभेदक, कारागृहविमोक्ता, शृङ्खलाबन्धमोचक। फिर लगभग साठ नाम सीधे रामायण से आते हैं, लगभग उसी क्रम में जिसमें घटनाएँ घटीं — सागरोत्तारक, सिंहिकाप्राणभञ्जन, लङ्किनीभञ्जन, लङ्कापुरविदाहक, सीताशोकनिवारक, अक्षहन्ता, सञ्जीवननगाहर्ता, लक्ष्मणप्राणदाता, कालनेमिप्रमथन। यानी नामावली पढ़ते-पढ़ते सुंदरकाण्ड और लंकाकाण्ड दोनों स्मरण हो जाते हैं।

तीन नाम विशेष ध्यान देने योग्य हैं, क्योंकि वे रामायण से बाहर के हैं। नाम 16 है भीमसेनसहायकृत् और नाम 103 है पार्थध्वजाग्रसंवासी — दोनों महाभारत के प्रसंग हैं: हनुमान जी का भीम से मिलना, और अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजना। एक ही सूची में दोनों युगों के प्रसंग साथ रखे गए हैं, जो उनके चिरञ्जीवी (नाम 53) होने का ही निहित प्रमाण है।

अंतिम नाम इस पूरी सूची का उत्तर है। 107 नामों में बल, विद्या, तंत्र-विजय, आठ सिद्धियाँ — सब गिनाने के बाद 108वाँ नाम कहता है सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरन्धर, अर्थात "सीता सहित श्रीराम के चरण-सेवा का भार वहन करने वाले"। सारा पराक्रम अंत में सेवा पर आकर ठहर जाता है — यही इस नामावली की संरचना का मर्म है।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

परिचय व मूल स्वरूप (नाम 1–20)

  1. 1.
    ॐ आञ्जनेयाय नमःमाता अंजना के पुत्र
  2. 2.
    ॐ महावीराय नमःमहान वीर
  3. 3.
    ॐ हनूमते नमःहनु (ठोड़ी) वाले; वज्र-प्रहार से जिनकी हनु पर चिह्न बना
  4. 4.
    ॐ मारुतात्मजाय नमःपवनदेव के आत्मज अर्थात पुत्र
  5. 5.
    ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमःतत्त्व-ज्ञान देने वाले
  6. 6.
    ॐ सीतादेवीमुद्राप्रदायकाय नमःसीता देवी को श्रीराम की मुद्रिका देने वाले
  7. 7.
    ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमःअशोक वाटिका को उजाड़ने वाले
  8. 8.
    ॐ सर्वमायाविभञ्जनाय नमःसमस्त माया का भंजन करने वाले
  9. 9.
    ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमःसब प्रकार के बंधनों से मुक्त कराने वाले
  10. 10.
    ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमःराक्षसों का विध्वंस करने वाले
  11. 11.
    ॐ परविद्यापरिहाराय नमःशत्रु की विद्या (अभिचार) का परिहार करने वाले
  12. 12.
    ॐ परशौर्यविनाशनाय नमःशत्रु के शौर्य का नाश करने वाले
  13. 13.
    ॐ परमन्त्रनिराकर्त्रे नमःशत्रु के मंत्र-प्रयोग को निष्फल करने वाले
  14. 14.
    ॐ परयन्त्रप्रभेदकाय नमःशत्रु के यंत्र-प्रयोग को भेदने वाले
  15. 15.
    ॐ सर्वग्रहविनाशिने नमःसमस्त ग्रह-बाधाओं का नाश करने वाले
  16. 16.
    ॐ भीमसेनसहायकृते नमःभीमसेन की सहायता करने वाले (महाभारत-प्रसंग)
  17. 17.
    ॐ सर्वदुःखहराय नमःसब दुःखों को हरने वाले
  18. 18.
    ॐ सर्वलोकचारिणे नमःसमस्त लोकों में विचरण करने वाले
  19. 19.
    ॐ मनोजवाय नमःमन के समान वेग वाले
  20. 20.
    ॐ पारिजातद्रुमूलस्थाय नमःपारिजात वृक्ष के मूल में विराजने वाले

मंत्र-तंत्र, विद्या व बंधन-मोचन (नाम 21–40)

  1. 21.
    ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमःसमस्त मंत्रों का स्वरूप धारण करने वाले
  2. 22.
    ॐ सर्वतन्त्रस्वरूपिणे नमःसमस्त तंत्रों के स्वरूप
  3. 23.
    ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमःसमस्त यंत्रों के आत्म-स्वरूप
  4. 24.
    ॐ कपीश्वराय नमःवानरों के ईश्वर
  5. 25.
    ॐ महाकायाय नमःविशाल शरीर वाले
  6. 26.
    ॐ सर्वरोगहराय नमःसब रोगों को हरने वाले
  7. 27.
    ॐ प्रभवे नमःसमर्थ स्वामी
  8. 28.
    ॐ बलसिद्धिकराय नमःबल तथा सिद्धि प्रदान करने वाले
  9. 29.
    ॐ सर्वविद्यासम्पत्प्रदायकाय नमःसमस्त विद्या तथा संपत्ति देने वाले
  10. 30.
    ॐ कपिसेनानायकाय नमःवानर-सेना के नायक
  11. 31.
    ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमःजो भविष्य में चतुरानन अर्थात ब्रह्मा-पद को प्राप्त होंगे
  12. 32.
    ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमःआजीवन ब्रह्मचारी कुमार
  13. 33.
    ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमःरत्नजड़ित कुण्डलों से देदीप्यमान
  14. 34.
    ॐ चञ्चलद्वालसन्नद्धलम्बमानशिखोज्ज्वलाय नमःहिलती हुई पूँछ तथा लटकती उज्ज्वल शिखा से सुशोभित
  15. 35.
    ॐ गन्धर्वविद्यातत्त्वज्ञाय नमःगंधर्व-विद्या अर्थात संगीत के तत्त्व को जानने वाले
  16. 36.
    ॐ महाबलपराक्रमाय नमःमहान बल व पराक्रम वाले
  17. 37.
    ॐ कारागृहविमोक्त्रे नमःकारागार से मुक्त कराने वाले
  18. 38.
    ॐ शृङ्खलाबन्धमोचकाय नमःसाँकल के बंधन काटने वाले
  19. 39.
    ॐ सागरोत्तारकाय नमःसमुद्र को लाँघ जाने वाले
  20. 40.
    ॐ प्राज्ञाय नमःप्रज्ञावान, विवेकशील

रामदूत — सीता-खोज व लंका-प्रवेश (नाम 41–60)

  1. 41.
    ॐ रामदूताय नमःश्रीराम के दूत
  2. 42.
    ॐ प्रतापवते नमःप्रतापशाली
  3. 43.
    ॐ वानराय नमःवानर-रूप धारण करने वाले
  4. 44.
    ॐ केसरीसुताय नमःकेसरी के पुत्र
  5. 45.
    ॐ सीताशोकनिवारकाय नमःसीता जी का शोक दूर करने वाले
  6. 46.
    ॐ अञ्जनागर्भसम्भूताय नमःमाता अंजना के गर्भ से प्रकट हुए
  7. 47.
    ॐ बालार्कसदृशाननाय नमःजिनका मुख उगते सूर्य के समान है
  8. 48.
    ॐ विभीषणप्रियकराय नमःविभीषण का हित करने वाले
  9. 49.
    ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय नमःदशग्रीव (रावण) के कुल का अंत करने वाले
  10. 50.
    ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमःलक्ष्मण जी को प्राणदान देने वाले
  11. 51.
    ॐ वज्रकायाय नमःवज्र के समान कठोर शरीर वाले
  12. 52.
    ॐ महाद्युतये नमःमहान कांति वाले
  13. 53.
    ॐ चिरञ्जीविने नमःचिरंजीवी, अमर
  14. 54.
    ॐ रामभक्ताय नमःश्रीराम के अनन्य भक्त
  15. 55.
    ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमःदैत्यों के कार्यों को विफल करने वाले
  16. 56.
    ॐ अक्षहन्त्रे नमःरावण-पुत्र अक्षयकुमार का वध करने वाले
  17. 57.
    ॐ काञ्चनाभाय नमःस्वर्ण के समान आभा वाले
  18. 58.
    ॐ पञ्चवक्त्राय नमःपंचमुखी स्वरूप वाले
  19. 59.
    ॐ महातपसे नमःमहान तपस्वी
  20. 60.
    ॐ लङ्किनीभञ्जनाय नमःलंका की रक्षिका लंकिनी का मान भंग करने वाले

लंका-विजय व पराक्रम (नाम 61–80)

  1. 61.
    ॐ श्रीमते नमःश्री अर्थात ऐश्वर्य से युक्त
  2. 62.
    ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमःछाया पकड़ने वाली राक्षसी सिंहिका के प्राण हरने वाले
  3. 63.
    ॐ गन्धमादनशैलस्थाय नमःगंधमादन पर्वत पर निवास करने वाले
  4. 64.
    ॐ लङ्कापुरविदाहकाय नमःलंकापुरी को जला देने वाले
  5. 65.
    ॐ सुग्रीवसचिवाय नमःसुग्रीव के मंत्री
  6. 66.
    ॐ धीराय नमःधैर्यवान
  7. 67.
    ॐ शूराय नमःशूरवीर
  8. 68.
    ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमःदैत्य-कुल का अंत करने वाले
  9. 69.
    ॐ सुरार्चिताय नमःदेवताओं द्वारा पूजित
  10. 70.
    ॐ महातेजसे नमःमहान तेज वाले
  11. 71.
    ॐ रामचूडामणिप्रदाय नमःश्रीराम को सीता जी की चूड़ामणि लाकर देने वाले
  12. 72.
    ॐ कामरूपिणे नमःइच्छानुसार रूप धारण करने वाले
  13. 73.
    ॐ पिङ्गलाक्षाय नमःभूरे-पीले नेत्रों वाले
  14. 74.
    ॐ वार्धिमैनाकपूजिताय नमःसमुद्र तथा मैनाक पर्वत द्वारा पूजित
  15. 75.
    ॐ कबलीकृतमार्ताण्डमण्डलाय नमःसूर्य-मण्डल को ग्रास बना लेने वाले
  16. 76.
    ॐ विजितेन्द्रियाय नमःइंद्रियों को जीत लेने वाले
  17. 77.
    ॐ रामसुग्रीवसन्धात्रे नमःश्रीराम व सुग्रीव की मैत्री कराने वाले
  18. 78.
    ॐ महारावणमर्दनाय नमःमहारावण का मर्दन करने वाले (पाठान्तर — महिरावण; FAQ देखें)
  19. 79.
    ॐ स्फटिकाभाय नमःस्फटिक के समान निर्मल आभा वाले
  20. 80.
    ॐ वागधीशाय नमःवाणी के अधीश्वर

गुण, वाणी व योग (नाम 81–100)

  1. 81.
    ॐ नवव्याकृतिपण्डिताय नमःनवों व्याकरणों के पंडित
  2. 82.
    ॐ चतुर्बाहवे नमःचतुर्भुज स्वरूप
  3. 83.
    ॐ दीनबन्धवे नमःदीनों के बंधु
  4. 84.
    ॐ महात्मने नमःमहान आत्मा वाले
  5. 85.
    ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों पर वात्सल्य रखने वाले
  6. 86.
    ॐ सञ्जीवननगाहर्त्रे नमःसंजीवनी वाले पर्वत को ही उठा लाने वाले
  7. 87.
    ॐ शुचये नमःपवित्र
  8. 88.
    ॐ वाग्मिने नमःवाक्-चतुर, सुवक्ता
  9. 89.
    ॐ दृढव्रताय नमःदृढ़ व्रत वाले
  10. 90.
    ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमःकालनेमि का मर्दन करने वाले
  11. 91.
    ॐ हरिमर्कटमर्कटाय नमःवानरों में भी श्रेष्ठ वानर
  12. 92.
    ॐ दान्ताय नमःसंयमी, इंद्रिय-दमन करने वाले
  13. 93.
    ॐ शान्ताय नमःशांत स्वभाव वाले
  14. 94.
    ॐ प्रसन्नात्मने नमःप्रसन्न अंतःकरण वाले
  15. 95.
    ॐ शतकण्ठमदापहर्त्रे नमःशतकण्ठ का मद हरने वाले (पाठान्तर — दशकण्ठ; FAQ देखें)
  16. 96.
    ॐ योगिने नमःयोगी
  17. 97.
    ॐ रामकथालोलाय नमःरामकथा सुनने में मग्न रहने वाले
  18. 98.
    ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय नमःसीता जी की खोज में निपुण
  19. 99.
    ॐ वज्रदंष्ट्राय नमःवज्र के समान दाढ़ों वाले
  20. 100.
    ॐ वज्रनखाय नमःवज्र के समान नखों वाले

महाभारत-प्रसंग व अंतिम समर्पण (नाम 101–108)

  1. 101.
    ॐ रुद्रवीर्यसमुद्भवाय नमःरुद्र के अंश से उत्पन्न
  2. 102.
    ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमःइन्द्रजित के चलाए अमोघ ब्रह्मास्त्र को निवारने वाले
  3. 103.
    ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने नमःअर्जुन के रथ की ध्वजा के अग्र भाग पर विराजने वाले (महाभारत-प्रसंग)
  4. 104.
    ॐ शरपञ्जरभेदकाय नमःबाणों के पिंजरे को भेद देने वाले
  5. 105.
    ॐ दशबाहवे नमःदस भुजाओं वाले (पंचमुखी स्वरूप)
  6. 106.
    ॐ लोकपूज्याय नमःसमस्त लोकों में पूजनीय
  7. 107.
    ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमःजाम्बवान् की प्रीति बढ़ाने वाले
  8. 108.
    ॐ सीतासमेतश्रीरामपादसेवाधुरन्धराय नमःसीता सहित श्रीराम की चरण-सेवा का भार वहन करने वाले

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • परंपरा में 108 नामों की अर्चना बल, साहस व निर्भयता की प्राप्ति के लिए की जाती है — नाम 28 स्वयं "बलसिद्धिकर" है।
    • नाम 15 "सर्वग्रहविनाशी" तथा नाम 11–14 के कारण यह नामावली ग्रह-बाधा व अभिचार-शांति के संकल्प से भी पढ़ी जाती है।
    • सूची रामायण के क्रम में चलती है, इसलिए पाठ के साथ सुंदरकाण्ड व लंकाकाण्ड के प्रसंग स्वतः स्मरण हो जाते हैं।
    • चालीसा या सहस्रनाम की तुलना में यह मध्यम लंबाई की है (8–10 मिनट), अतः मंगलवार के नित्य पूजन में सुविधाजनक रहती है।

    कब करें पाठ

    मंगलवार व शनिवार को हनुमान पूजन के समयहनुमान जयंती परसिंदूर व चोला अर्पण के समय अर्चना-रूप मेंकिसी संकट, भय अथवा ग्रह-बाधा की स्थिति में

    पाठ विधि

    आरंभ में "ॐ हं हनुमते नमः" तीन बार कहें। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है — प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक पुष्प, सिंदूर-कण अथवा तुलसी-दल अर्पित करते जाना। यदि यह संभव न हो तो माला लेकर जप भी किया जा सकता है; 108 नाम पूरे होने पर एक माला पूरी होती है। पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। अंत में हनुमान चालीसा अथवा संकटमोचन हनुमानाष्टक पढ़कर आरती करने की परंपरा है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथकालिकारहस्य — श्री आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनामावली
    स्रोत परंपराdrikpanchang.com — भगवान हनुमान की अष्टोत्तर शतनामावली (आधार सूची; 108 नाम) · sanskritdocuments.org/doc_hanumaana/hanuman108.html — आञ्जनेय अष्टोत्तर शतनामावली; 108/108 नामों की क्रम सहित स्वतंत्र पुष्टि तथा स्रोत-ग्रंथ "कालिकारहस्य" का उल्लेख · मुद्रण-दोष सुधारे गए: नाम 34 "सञ्चलद्बाल…" → चञ्चलद्वाल… (आधार की अपनी roman पंक्ति से पुष्ट); नाम 23 "सर्वयन्त्रात्मिकाय" → सर्वयन्त्रात्मकाय; नाम 74 "वर्धि" → वार्धि। · वास्तविक पाठ-भेद दर्ज (चुने नहीं गए, दोनों बताए गए): नाम 78 महारावणमर्दन / महिरावणमर्दन; नाम 95 शतकण्ठमदापहर्तृ / दशकण्ठमदापह। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित।
    रचयितापारंपरिक
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: यह सूची कालिकारहस्य वर्णित अष्टोत्तर शतनामावली है, जो सर्वाधिक प्रचलित रूप भी है। दो स्थानों पर स्रोतों में वास्तविक पाठ-भेद है और उसे यहाँ छिपाया नहीं गया: नाम 78 कहीं "महारावणमर्दन" तो कहीं "महिरावणमर्दन" छपता है, तथा नाम 95 कहीं "शतकण्ठमदापहर्तृ" तो कहीं "दशकण्ठमदापह"। दोनों भेद अर्थ बदलते हैं, इसलिए FAQ में अलग से समझाए गए हैं। शेष वर्तनी-भेद उच्चारण भर के हैं।

    देव परिचय

    श्री हनुमान

    Lord Hanuman

    पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

    देवता वर्गशक्ति · भक्ति · रक्षा · साहस · संकटमोचन
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    मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
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