श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली

śrī kṛṣṇa aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Krishna Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
बुधवार; जन्माष्टमी; एकादशी
उद्देश्य:भक्ति (Devotion)अर्चना (Worship)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली नारद पञ्चरात्र से ली गई श्रीकृष्ण के 108 नामों की सूची है। प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" रूप में पढ़ा जाता है, अतः यह अर्चना तथा माला-जप — दोनों के लिए उपयुक्त है। इन नामों में कृष्ण का पूरा जीवन क्रम से खुलता है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: नारद पञ्चरात्र — श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र की नामावली

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī kṛṣṇa aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतनारद पञ्चरात्र — श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र की नामावली
शुभ दिनबुधवार; जन्माष्टमी; एकादशी
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों की सूची है, जो नारद पञ्चरात्र से ली गई है। नामावली-रूप में प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना तथा माला-जप — दोनों के लिए उपयुक्त है।

ये नाम केवल पर्यायवाची नहीं हैं; इनमें श्रीकृष्ण का पूरा जीवन क्रम से आ जाता है। आरंभ में अवतरण व स्वरूप के नाम हैं — वसुदेवात्मज, देवकीनन्दन, लीलामानुषविग्रह। फिर व्रज की बाल-लीला — नवनीतनट, धेनुकासुरभञ्जन, यमलार्जुनभञ्जन। फिर गोवर्धन व द्वारका — गोवर्धनाचलोद्धर्ता, द्वारकानायक। फिर मथुरा व महाभारत — कंसारि, शिशुपालशिरश्छेत्ता, पार्थसारथि। और अंत में परब्रह्म-स्वरूप — गीतामृतमहोदधि, वेदवेद्य, परब्रह्म।

एक बात ध्यान देने योग्य है: इंटरनेट पर "कृष्ण के 108 नाम" शीर्षक से एक अंग्रेज़ी वर्णक्रम वाली सूची भी बहुत प्रचलित है (अचल, अच्युत, अद्भुत, आदिदेव…)। वह लोकप्रिय संकलन है, यह शास्त्रीय नामावली — दोनों अलग हैं।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

अवतरण व स्वरूप (नाम 1–20)

  1. 1.
    ॐ श्रीकृष्णाय नमःजो श्याम वर्ण हैं तथा सबको अपनी ओर आकर्षित करते हैं
  2. 2.
    ॐ कमलानाथाय नमःकमला अर्थात लक्ष्मी के नाथ
  3. 3.
    ॐ वासुदेवाय नमःवसुदेव के पुत्र; जो सर्वत्र वास करते हैं
  4. 4.
    ॐ सनातनाय नमःजो नित्य व शाश्वत हैं
  5. 5.
    ॐ वसुदेवात्मजाय नमःवसुदेव जी के आत्मज
  6. 6.
    ॐ पुण्याय नमःजो स्वयं पुण्य-स्वरूप हैं
  7. 7.
    ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमःजिन्होंने लीला हेतु मनुष्य-रूप धारण किया
  8. 8.
    ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमःजो श्रीवत्स चिह्न तथा कौस्तुभ मणि धारण करते हैं
  9. 9.
    ॐ यशोदावत्सलाय नमःजो माता यशोदा के वात्सल्य के पात्र हैं
  10. 10.
    ॐ हरये नमःजो पाप व दुःख हर लेते हैं
  11. 11.
    ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशङ्खाम्बुजायुधाय नमःजो चार भुजाओं में चक्र, खड्ग, गदा, शंख व कमल धारण करते हैं
  12. 12.
    ॐ देवकीनन्दनाय नमःमाता देवकी के नंदन
  13. 13.
    ॐ श्रीशाय नमःश्री (लक्ष्मी) के ईश
  14. 14.
    ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमःनंद गोप के प्रिय पुत्र
  15. 15.
    ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमःजिन्होंने यमुना का प्रबल वेग शांत किया
  16. 16.
    ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमःबलभद्र के प्रिय अनुज
  17. 17.
    ॐ पूतनाजीवितहराय नमःजिन्होंने पूतना के प्राण हर लिए
  18. 18.
    ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमःशकटासुर का भंजन करने वाले
  19. 19.
    ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमःनंद के व्रज के जनों को आनंद देने वाले
  20. 20.
    ॐ सच्चिदानन्दविग्रहाय नमःजिनका विग्रह सत्-चित्-आनंद स्वरूप है

व्रज की बाल-लीला (नाम 21–40)

  1. 21.
    ॐ नवनीतविलिप्ताङ्गाय नमःजिनके अंग माखन से लिपटे रहते हैं
  2. 22.
    ॐ नवनीतनटाय नमःमाखन के लिए नृत्य करने वाले बालक
  3. 23.
    ॐ अनघाय नमःजो निष्पाप हैं
  4. 24.
    ॐ नवनीतनवाहाराय नमःताजा माखन ही जिनका आहार है
  5. 25.
    ॐ मुचुकुन्दप्रसादकाय नमःजिन्होंने राजा मुचुकुंद पर कृपा की
  6. 26.
    ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमःसोलह हज़ार रानियों के ईश
  7. 27.
    ॐ त्रिभङ्गिने नमःजो त्रिभंग मुद्रा में खड़े होते हैं
  8. 28.
    ॐ मधुराकृतये नमःजिनकी आकृति मधुर है
  9. 29.
    ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमःशुकदेव की वाणी रूपी अमृत-सागर के चंद्रमा
  10. 30.
    ॐ गोविन्दाय नमःगौओं तथा इंद्रियों के स्वामी
  11. 31.
    ॐ योगिनां पतये नमःयोगियों के पति अर्थात स्वामी
  12. 32.
    ॐ वत्सवाटचराय नमःबछड़ों के बाड़े में विचरण करने वाले
  13. 33.
    ॐ अनन्ताय नमःजिनका कोई अंत नहीं
  14. 34.
    ॐ धेनुकासुरभञ्जनाय नमःधेनुकासुर का भंजन करने वाले
  15. 35.
    ॐ तृणीकृततृणावर्ताय नमःजिन्होंने तृणावर्त को तिनके के समान तुच्छ कर दिया
  16. 36.
    ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमःजिन्होंने जुड़वाँ अर्जुन वृक्षों को गिराया
  17. 37.
    ॐ उत्तालतालभेत्रे नमःऊँचे ताल वृक्षों को गिराने वाले
  18. 38.
    ॐ तमालश्यामलाकृतये नमःजिनकी आकृति तमाल वृक्ष के समान श्यामल है
  19. 39.
    ॐ गोपगोपीश्वराय नमःग्वालों तथा गोपियों के ईश्वर
  20. 40.
    ॐ योगिने नमःजो स्वयं परम योगी हैं

गोवर्धन से द्वारका (नाम 41–60)

  1. 41.
    ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमःजिनकी प्रभा करोड़ों सूर्यों के समान है
  2. 42.
    ॐ इलापतये नमःपृथ्वी के पति
  3. 43.
    ॐ परस्मै ज्योतिषे नमःजो परम ज्योति हैं
  4. 44.
    ॐ यादवेन्द्राय नमःयादवों के इंद्र अर्थात स्वामी
  5. 45.
    ॐ यदूद्वहाय नमःयदुवंश का उद्धार करने वाले
  6. 46.
    ॐ वनमालिने नमःजो वनमाला धारण करते हैं
  7. 47.
    ॐ पीतवाससे नमःपीत वस्त्र धारण करने वाले
  8. 48.
    ॐ पारिजातापहारकाय नमःजो स्वर्ग से पारिजात वृक्ष ले आए
  9. 49.
    ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमःगोवर्धन पर्वत को उठाने वाले
  10. 50.
    ॐ गोपालाय नमःगौओं का पालन करने वाले
  11. 51.
    ॐ सर्वपालकाय नमःसबका पालन करने वाले
  12. 52.
    ॐ अजाय नमःजो अजन्मा हैं
  13. 53.
    ॐ निरञ्जनाय नमःजो निर्मल व निर्लेप हैं
  14. 54.
    ॐ कामजनकाय नमःकामदेव (प्रद्युम्न) के जनक
  15. 55.
    ॐ कञ्जलोचनाय नमःकमल के समान नेत्रों वाले
  16. 56.
    ॐ मधुघ्ने नमःमधु नामक असुर का वध करने वाले
  17. 57.
    ॐ मथुरानाथाय नमःमथुरा के नाथ
  18. 58.
    ॐ द्वारकानायकाय नमःद्वारका के नायक
  19. 59.
    ॐ बलिने नमःजो महान बलशाली हैं
  20. 60.
    ॐ वृन्दावनान्तसञ्चारिणे नमःवृंदावन के भीतर विचरण करने वाले

असुर-संहार व महाभारत (नाम 61–85)

  1. 61.
    ॐ तुलसीदामभूषणाय नमःतुलसी की माला जिनका आभूषण है
  2. 62.
    ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमःस्यमंतक मणि का प्रकरण सुलझाने वाले
  3. 63.
    ॐ नरनारायणात्मकाय नमःजो नर तथा नारायण दोनों स्वरूप हैं
  4. 64.
    ॐ कुब्जाकृष्णाम्बरधराय नमःकुब्जा द्वारा दिए वस्त्र धारण करने वाले
  5. 65.
    ॐ मायिने नमःजो माया के स्वामी हैं
  6. 66.
    ॐ परमपूरुषाय नमःजो परम पुरुष हैं
  7. 67.
    ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नमःमुष्टिक व चाणूर से मल्लयुद्ध में निपुण
  8. 68.
    ॐ संसारवैरिणे नमःसंसार-बंधन के शत्रु
  9. 69.
    ॐ कंसारये नमःकंस के शत्रु
  10. 70.
    ॐ मुरारये नमःमुर दैत्य के शत्रु
  11. 71.
    ॐ नरकान्तकाय नमःनरकासुर का अंत करने वाले
  12. 72.
    ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमःजो अनादि काल से ब्रह्म में स्थित हैं
  13. 73.
    ॐ कृष्णाव्यसनकर्षकाय नमःद्रौपदी का संकट दूर करने वाले
  14. 74.
    ॐ शिशुपालशिरश्छेत्रे नमःशिशुपाल का शिर काटने वाले
  15. 75.
    ॐ दुर्योधनकुलान्तकाय नमःदुर्योधन के कुल का अंत करने वाले
  16. 76.
    ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमःविदुर तथा अक्रूर को वर देने वाले
  17. 77.
    ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमःजिन्होंने अर्जुन को विश्वरूप दिखाया
  18. 78.
    ॐ सत्यवाचे नमःजिनकी वाणी सत्य है
  19. 79.
    ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमःजिनका संकल्प सदा सत्य होता है
  20. 80.
    ॐ सत्यभामारताय नमःसत्यभामा के प्रिय
  21. 81.
    ॐ जयिने नमःजो सदा विजयी हैं
  22. 82.
    ॐ सुभद्रापूर्वजाय नमःसुभद्रा के अग्रज
  23. 83.
    ॐ विष्णवे नमःजो सर्वत्र व्याप्त हैं
  24. 84.
    ॐ भीष्ममुक्तिप्रदायकाय नमःभीष्म को मुक्ति देने वाले
  25. 85.
    ॐ जगद्गुरवे नमःसमस्त जगत् के गुरु

गीता, जगन्नाथ व परब्रह्म (नाम 86–108)

  1. 86.
    ॐ जगन्नाथाय नमःसमस्त जगत् के नाथ
  2. 87.
    ॐ वेणुनादविशारदाय नमःवेणु-वादन में निपुण
  3. 88.
    ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नमःवृषभासुर (अरिष्टासुर) का विध्वंस करने वाले
  4. 89.
    ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमःबाणासुर की भुजाओं का अंत करने वाले
  5. 90.
    ॐ युधिष्ठिरप्रतिष्ठात्रे नमःयुधिष्ठिर को राज्य में प्रतिष्ठित करने वाले
  6. 91.
    ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमःमोरपंख जिनका शिरोभूषण है
  7. 92.
    ॐ पार्थसारथये नमःअर्जुन के सारथि
  8. 93.
    ॐ अव्यक्ताय नमःजो इंद्रियों से परे, अव्यक्त हैं
  9. 94.
    ॐ गीतामृतमहोदधये नमःगीता रूपी अमृत के महासागर
  10. 95.
    ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमःजिनके श्रीचरण-कमल कालिय के फणों की मणियों से रंजित हुए
  11. 96.
    ॐ दामोदराय नमःजिनके उदर पर रस्सी बाँधी गई
  12. 97.
    ॐ यज्ञभोक्त्रे नमःसमस्त यज्ञों के भोक्ता
  13. 98.
    ॐ दानवेन्द्रविनाशकाय नमःदानवों के स्वामियों का विनाश करने वाले
  14. 99.
    ॐ नारायणाय नमःजो समस्त जीवों के आश्रय हैं
  15. 100.
    ॐ परब्रह्मणे नमःजो साक्षात परब्रह्म हैं
  16. 101.
    ॐ पन्नगाशनवाहनाय नमःगरुड़ जिनका वाहन है
  17. 102.
    ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारकाय नमःजल-क्रीड़ा में लगी गोपियों के वस्त्र हरने वाले
  18. 103.
    ॐ पुण्यश्लोकाय नमःजिनकी कीर्ति का गान पुण्यदायी है
  19. 104.
    ॐ तीर्थकराय नमःजो तीर्थों को तीर्थत्व प्रदान करते हैं
  20. 105.
    ॐ वेदवेद्याय नमःजो वेदों द्वारा जानने योग्य हैं
  21. 106.
    ॐ दयानिधये नमःजो दया के निधान हैं
  22. 107.
    ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमःजो समस्त तीर्थों के आत्म-स्वरूप हैं
  23. 108.
    ॐ सर्वग्रहरूपिणे नमःजो समस्त ग्रहों के रूप में स्थित हैं

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • नामावली-रूप होने के कारण यह अर्चना तथा माला-जप — दोनों के लिए उपयुक्त है; 108 नाम एक माला पूरी करते हैं।
    • इन नामों में श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन क्रम से आ जाता है — अवतरण से लेकर गीतोपदेश तक।
    • नाम छोटे व सरल हैं, इसलिए बालकों को कंठस्थ कराने में सुगम।
    • जन्माष्टमी की पूजा में प्रत्येक नाम के साथ पुष्प अथवा तुलसीदल अर्पित करने की परंपरा है।

    कब करें पाठ

    जन्माष्टमी की पूजा मेंबुधवार व एकादशी कोनित्य माला-जप मेंकृष्ण-अर्चना के समय पुष्पांजलि सहित

    पाठ विधि

    अर्चना-विधि में प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ बोलते हुए एक पुष्प, तुलसीदल अथवा अक्षत श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है — इसी को पुष्पार्चन कहते हैं। जप-विधि में तुलसी की माला पर एक-एक नाम का उच्चारण करते चलें; 108 नाम ठीक एक माला पूरी करते हैं। आरंभ करने से पूर्व संकल्प लें तथा अंत में आरती करें।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथनारद पञ्चरात्र
    स्रोत परंपराdrikpanchang.com — भगवान कृष्ण के 108 नाम / श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (आधार पाठ; नाम 11 का पूर्ण समास सुरक्षित) · drikpanchang.com — कृष्ण अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् (मूल ग्रंथ की पुष्टि: "॥ इति श्रीनारदपञ्चरात्रे श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं समाप्तम् ॥") · brahmabhakti.com — अष्टोत्तर शतनामावली (स्वतंत्र पुष्टि कि नामों की संख्या 108 है) · गिनती-भेद: brahmabhakti नाम 11 का समास छोटा करता है, जिससे उसकी क्रम-संख्या एक आगे खिसक जाती है (107 = सर्वग्रहरूपिणे, 108 = परात्पराय)। यहाँ drikpanchang का क्रम लिया गया है क्योंकि वह समास को पूरा रखता है। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से किए गए हैं।
    रचयितानारद पञ्चरात्र परंपरा
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    देव परिचय

    श्री कृष्ण

    Lord Krishna

    श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

    देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
    मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
    सभी पाठ देखें

    श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली — सामान्य प्रश्न

    श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

    आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ