श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली

śrī gaṇeśa aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Ganesha Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
बुधवार; चतुर्थी; गणेश चतुर्थी
उद्देश्य:विघ्न-नाश (Removal of Obstacles)सिद्धि (Accomplishment)मंगल (Auspiciousness)
✓ संपूर्ण

श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली श्रीगणेश के 108 नामों की सूची है, जो गजानन से आरंभ होकर विघ्नेश्वर पर समाप्त होती है। प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" रूप में पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना तथा माला-जप दोनों के लिए उपयुक्त है। पाठ में लगभग 8–10 मिनट लगते हैं।

परिचय

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

स्रोत: पारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — गजानन से विघ्नेश्वर तक 108 नाम

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī gaṇeśa aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री गणेश
मूल स्रोतपारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — गजानन से विघ्नेश्वर तक 108 नाम
शुभ दिनबुधवार; चतुर्थी; गणेश चतुर्थी
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री गणेश अष्टोत्तर शतनामावली श्रीगणेश के 108 नामों की सूची है। नामावली-रूप में हर नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना — अर्थात प्रत्येक नाम पर दूर्वा या पुष्प अर्पित करना — तथा माला-जप, दोनों के लिए उपयुक्त है।

ये नाम केवल पर्यायवाची नहीं हैं; इनमें गणपति का पूरा स्वरूप क्रम से खुलता है। आरंभ में रूप व अधिकार के नाम हैं — गजानन, गणाध्यक्ष, विघ्नराज, विनायक। फिर शरीर-वर्णन — लम्बजठर, ह्रस्वग्रीव, महोदर। फिर अग्रता के नाम — अग्रगण्य, अग्रपूज्य, अग्रगामी, जो बताते हैं कि गणपति सबसे पहले क्यों पूजे जाते हैं। फिर ब्रह्म-स्वरूप — ब्रह्मचारी, ब्रह्मरूपी, अव्यक्त। और अंत में वही नाम जिससे यह परंपरा पहचानी जाती है — विघ्नेश्वर।

एक जोड़ी विशेष ध्यान देने योग्य है। नाम 29 है विघ्नकर्ता और नाम 30 है विघ्नहर्ता — विघ्न करने वाले, और विघ्न हरने वाले; दोनों साथ-साथ। यह विरोधाभास नहीं, गणेश-तत्व का मर्म है: विघ्न भी उन्हीं के अधीन है, और उसे हटाना भी उन्हीं के हाथ में। नामावली इसे छिपाती नहीं, अगल-बगल रख देती है।

एक और बात जो कम लोग जानते हैं — नाम 64 मोदकप्रिय तो प्रसिद्ध है ही, किंतु नाम 68 कपित्थपनसप्रिय भी है, अर्थात जिन्हें कैथ तथा कटहल प्रिय हैं। भोग की परंपरा मोदक तक सीमित नहीं।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

स्वरूप व गणाधिपत्य (नाम 1–20)

  1. 1.
    ॐ गजाननाय नमःजिनका मुख गज का है
  2. 2.
    ॐ गणाध्यक्षाय नमःगणों के अध्यक्ष
  3. 3.
    ॐ विघ्नराजाय नमःविघ्नों के राजा
  4. 4.
    ॐ विनायकाय नमःजिनके ऊपर कोई नायक नहीं; सर्वोपरि नेता
  5. 5.
    ॐ द्वैमातुराय नमःदो माताओं वाले
  6. 6.
    ॐ द्विमुखाय नमःदो मुख वाले
  7. 7.
    ॐ प्रमुखाय नमःसबमें प्रमुख
  8. 8.
    ॐ सुमुखाय नमःसुंदर मुख वाले
  9. 9.
    ॐ कृतिने नमःजो कृतकार्य हैं; जिनके कार्य सदा सिद्ध होते हैं
  10. 10.
    ॐ सुप्रदीपाय नमःउत्तम दीपक के समान प्रकाशमान
  11. 11.
    ॐ सुखनिधये नमःसुख के निधि अर्थात कोष
  12. 12.
    ॐ सुराध्यक्षाय नमःदेवताओं के अध्यक्ष
  13. 13.
    ॐ सुरारिघ्नाय नमःदेव-शत्रुओं का नाश करने वाले
  14. 14.
    ॐ महागणपतये नमःगणों के महान स्वामी
  15. 15.
    ॐ मान्याय नमःसर्वत्र माननीय
  16. 16.
    ॐ महाकालाय नमःमहान काल-स्वरूप
  17. 17.
    ॐ महाबलाय नमःमहान बल वाले
  18. 18.
    ॐ हेरम्बाय नमःदीनों की रक्षा करने वाले
  19. 19.
    ॐ लम्बजठराय नमःलंबे उदर वाले
  20. 20.
    ॐ ह्रस्वग्रीवाय नमःछोटी ग्रीवा वाले

महिमा व विघ्न-नियंत्रण (नाम 21–43)

  1. 21.
    ॐ महोदराय नमःविशाल उदर वाले
  2. 22.
    ॐ मदोत्कटाय नमःमद से उत्कट; उन्मत्त गज के समान
  3. 23.
    ॐ महावीराय नमःमहान वीर
  4. 24.
    ॐ मन्त्रिणे नमःश्रेष्ठ मंत्रणा देने वाले
  5. 25.
    ॐ मङ्गलस्वराय नमःजिनका स्वर मंगलकारी है
  6. 26.
    ॐ प्रमधाय नमःप्रमथगणों के स्वामी
  7. 27.
    ॐ प्रथमाय नमःजो सबसे प्रथम हैं
  8. 28.
    ॐ प्राज्ञाय नमःपरम बुद्धिमान
  9. 29.
    ॐ विघ्नकर्त्रे नमःविघ्न उत्पन्न करने वाले — विघ्न भी जिनके अधीन है
  10. 30.
    ॐ विघ्नहर्त्रे नमःविघ्नों को हर लेने वाले
  11. 31.
    ॐ विश्वनेत्रे नमःविश्व के नेत्र; सबको देखने वाले
  12. 32.
    ॐ विराट्पतये नमःविराट् स्वरूप के स्वामी
  13. 33.
    ॐ श्रीपतये नमःश्री अर्थात ऐश्वर्य के स्वामी
  14. 34.
    ॐ वाक्पतये नमःवाणी के स्वामी
  15. 35.
    ॐ शृङ्गारिणे नमःशृंगार से सुशोभित
  16. 36.
    ॐ अश्रितवत्सलाय नमःशरण में आए हुओं पर वत्सल
  17. 37.
    ॐ शिवप्रियाय नमःशिव को प्रिय
  18. 38.
    ॐ शीघ्रकारिणे नमःशीघ्र कार्य कर देने वाले
  19. 39.
    ॐ शाश्वताय नमःनित्य व सनातन
  20. 40.
    ॐ बलाय नमःबल-स्वरूप
  21. 41.
    ॐ बलोत्थिताय नमःबल से समुत्थित
  22. 42.
    ॐ भवात्मजाय नमःभव अर्थात शिव के पुत्र
  23. 43.
    ॐ पुराणपुरुषाय नमःपुरातन पुरुष

अग्रपूज्यता व प्रियताएँ (नाम 44–68)

  1. 44.
    ॐ पूष्णे नमःपोषण करने वाले
  2. 45.
    ॐ पुष्करोत्षिप्तवारिणे नमःजो सूँड़ से जल उछालते हैं
  3. 46.
    ॐ अग्रगण्याय नमःजो सर्वप्रथम गिने जाने योग्य हैं
  4. 47.
    ॐ अग्रपूज्याय नमःजो सबसे पहले पूजे जाते हैं
  5. 48.
    ॐ अग्रगामिने नमःजो सबसे आगे चलते हैं
  6. 49.
    ॐ मन्त्रकृते नमःमंत्रों के रचयिता
  7. 50.
    ॐ चामीकरप्रभाय नमःस्वर्ण के समान आभा वाले
  8. 51.
    ॐ सर्वाय नमःजो सर्व-स्वरूप हैं
  9. 52.
    ॐ सर्वोपास्याय नमःजो सबके द्वारा उपासनीय हैं
  10. 53.
    ॐ सर्वकर्त्रे नमःसबके कर्ता
  11. 54.
    ॐ सर्वनेत्रे नमःसबके नेता
  12. 55.
    ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमःसब सिद्धियाँ देने वाले
  13. 56.
    ॐ सिद्धये नमःजो स्वयं सिद्धि-स्वरूप हैं
  14. 57.
    ॐ पञ्चहस्ताय नमःपाँच हाथों वाले — चार भुजाएँ तथा सूँड़
  15. 58.
    ॐ पार्वतीनन्दनाय नमःमाता पार्वती के नंदन
  16. 59.
    ॐ प्रभवे नमःसर्वसमर्थ स्वामी
  17. 60.
    ॐ कुमारगुरवे नमःकुमार कार्तिकेय के गुरु
  18. 61.
    ॐ अक्षोभ्याय नमःजो कभी क्षुब्ध नहीं होते
  19. 62.
    ॐ कुञ्जरासुरभञ्जनाय नमःगजासुर का संहार करने वाले
  20. 63.
    ॐ प्रमोदाय नमःआनंद-स्वरूप
  21. 64.
    ॐ मोदकप्रियाय नमःजिन्हें मोदक प्रिय है
  22. 65.
    ॐ कान्तिमते नमःकांति से युक्त
  23. 66.
    ॐ धृतिमते नमःधैर्य से युक्त
  24. 67.
    ॐ कामिने नमःजो कामनाएँ पूर्ण करते हैं
  25. 68.
    ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमःजिन्हें कैथ तथा कटहल प्रिय हैं

ब्रह्मस्वरूप व भक्त-वात्सल्य (नाम 69–90)

  1. 69.
    ॐ ब्रह्मचारिणे नमःब्रह्मचर्य में स्थित
  2. 70.
    ॐ ब्रह्मरूपिणे नमःब्रह्म-स्वरूप
  3. 71.
    ॐ ब्रह्मविद्यादिदानभुवे नमःब्रह्मविद्या आदि के दाता
  4. 72.
    ॐ जिष्णवे नमःजयशील
  5. 73.
    ॐ विष्णुप्रियाय नमःविष्णु को प्रिय
  6. 74.
    ॐ भक्तजीविताय नमःजो भक्तों के जीवन हैं
  7. 75.
    ॐ जितमन्मथाय नमःजिन्होंने काम को जीत लिया
  8. 76.
    ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमःऐश्वर्य के कारण
  9. 77.
    ॐ ज्यायसे नमःजो सबसे ज्येष्ठ व श्रेष्ठ हैं
  10. 78.
    ॐ यक्षकिन्नरसेविताय नमःयक्षों तथा किन्नरों से सेवित
  11. 79.
    ॐ गङ्गासुताय नमःगंगा के पुत्र
  12. 80.
    ॐ गणाधीशाय नमःगणों के अधीश
  13. 81.
    ॐ गम्भीरनिनदाय नमःगंभीर गर्जना वाले
  14. 82.
    ॐ वटवे नमःबटु-रूप; ब्रह्मचारी बालक
  15. 83.
    ॐ अभीष्टवरदाय नमःअभीष्ट वर देने वाले
  16. 84.
    ॐ ज्योतिषे नमःज्योति-स्वरूप
  17. 85.
    ॐ भक्तनिधये नमःभक्तों के कोष
  18. 86.
    ॐ भावगम्याय नमःजो भाव से ही प्राप्त होते हैं
  19. 87.
    ॐ मङ्गलप्रदाय नमःमंगल प्रदान करने वाले
  20. 88.
    ॐ अव्यक्ताय नमःजो अव्यक्त व इंद्रियातीत हैं
  21. 89.
    ॐ अप्राकृतपराक्रमाय नमःजिनका पराक्रम अलौकिक है
  22. 90.
    ॐ सत्यधर्मिणे नमःसत्य-धर्म में स्थित

व्यापकता व विघ्नेश्वर (नाम 91–108)

  1. 91.
    ॐ सखये नमःजो सबके सखा हैं
  2. 92.
    ॐ सरसाम्बुनिधये नमःरस-रूपी जल के सागर; करुणा-निधि
  3. 93.
    ॐ महेशाय नमःमहान ईश्वर
  4. 94.
    ॐ दिव्याङ्गाय नमःदिव्य अंगों वाले
  5. 95.
    ॐ मणिकिङ्किणीमेखलाय नमःमणि-जड़ित घुँघरूदार करधनी धारण करने वाले
  6. 96.
    ॐ समस्तदेवतामूर्तये नमःजो समस्त देवताओं की मूर्ति-स्वरूप हैं
  7. 97.
    ॐ सहिष्णवे नमःपरम सहनशील
  8. 98.
    ॐ सततोत्थिताय नमःजो सदा उद्यत रहते हैं
  9. 99.
    ॐ विघातकारिणे नमःविघ्नों का विघात करने वाले
  10. 100.
    ॐ विश्वग्दृशे नमःजो सब ओर देखते हैं
  11. 101.
    ॐ विश्वरक्षाकृते नमःविश्व की रक्षा करने वाले
  12. 102.
    ॐ कल्याणगुरवे नमःकल्याण के गुरु
  13. 103.
    ॐ उन्मत्तवेषाय नमःउन्मत्त-सा वेष धारण करने वाले
  14. 104.
    ॐ अपराजिते नमःजो कभी पराजित नहीं होते
  15. 105.
    ॐ समस्तजगदाधाराय नमःसमस्त जगत के आधार
  16. 106.
    ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमःसब ऐश्वर्य देने वाले
  17. 107.
    ॐ आक्रान्तचिदचित्प्रभवे नमःचित् तथा अचित् — दोनों पर व्याप्त प्रभु
  18. 108.
    ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमःविघ्नों के ईश्वर

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • नामावली-रूप होने से यह अर्चना के लिए उपयुक्त है — प्रत्येक नाम पर एक दूर्वा-दल अथवा पुष्प अर्पित किया जा सकता है।
    • नाम 46–48 (अग्रगण्य, अग्रपूज्य, अग्रगामी) एक साथ बताते हैं कि गणपति सबसे पहले क्यों पूजे जाते हैं।
    • नाम 29 व 30 — विघ्नकर्ता तथा विघ्नहर्ता — गणेश-तत्व का मर्म एक ही जोड़ी में रख देते हैं।
    • पाठ में लगभग 8–10 मिनट लगते हैं, अतः यह नित्य-नियम के लिए व्यावहारिक है।

    कब करें पाठ

    चतुर्थी तथा संकष्टी चतुर्थी कोबुधवार कोगणेश चतुर्थी के दस दिनों में प्रतिदिनकिसी नए कार्य के आरंभ से पूर्व

    पाठ विधि

    शुद्ध होकर श्रीगणेश के समक्ष दीप जलाएँ और प्रत्येक नाम को "ॐ … नमः" के साथ पढ़ें। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है — हर नाम पर एक दूर्वा-दल अथवा पुष्प अर्पित करते जाना। यदि यह संभव न हो तो माला लेकर जप भी किया जा सकता है। पाठ आरंभ करने से पूर्व "ॐ गं गणपतये नमः" का तीन बार उच्चारण करने की परंपरा है। पूरा पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। अंत में मोदक अथवा लड्डू का भोग अर्पित करें, और दूर्वा विशेष रूप से — क्योंकि परंपरा में वह गणेश जी को सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथपारंपरिक गणेश अष्टोत्तर शतनामावली
    स्रोत परंपराdrikpanchang.com — भगवान गणेश की अष्टोत्तर शतनामावली (आधार सूची; 108 नाम) · brahmabhakti.com — गणेश अष्टोत्तर शतनामावली; 108/108 नामों की क्रम सहित स्वतंत्र पुष्टि · drikpanchang.com — गणेश पुराण वर्णित अष्टोत्तर शतनामावली (भिन्न सूची; गणेश्वर से याजकप्रिय तक) — भेद दर्ज करने हेतु देखी गई · मुद्रण-दोष सुधारे गए (आधार drikpanchang, तुलना brahmabhakti): 19 "लम्बजठरायै" → लम्बजठराय; 40 "बल" → बलाय; 75 "जितमन्मधाय" → जितमन्मथाय; 78 "किन्नेर" → किन्नर; 95 "मेखालाय" → मेखलाय। · नाम 26 दोनों स्रोतों में "प्रमधाय" है; प्रचलित रूप "प्रमथाय" भी मिलता है — अर्थ अपरिवर्तित, अतः स्रोत-पाठ रखा गया। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित।
    रचयितापारंपरिक
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: "गणेश के 108 नाम" शीर्षक से दो अलग सूचियाँ प्रचलित हैं, और उनके नाम आपस में मिलते नहीं। यहाँ दी गई सूची वह है जो सर्वाधिक प्रचलित है — गजानन से आरंभ होकर विघ्नेश्वर पर समाप्त। इसके अतिरिक्त गणेश पुराण में वर्णित एक भिन्न अष्टोत्तर शतनामावली भी है, जो गणेश्वर से आरंभ होकर याजकप्रिय पर समाप्त होती है; उसके नाम पूरी तरह अलग हैं, केवल क्रम भिन्न नहीं। दोनों शास्त्र-सम्मत हैं — यह चुनने का प्रश्न है, सही-गलत का नहीं।

    देव परिचय

    श्री गणेश

    Lord Ganesha

    विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

    देवता वर्गविघ्न नाश · बुद्धि · शुभारंभ · समृद्धि
    वाहनमूषक (चूहा)
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    मुख्य मंत्रॐ गं गणपतये नमः
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