समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
मंगलवार, रामनवमी व चैत्र नवरात्रि
उद्देश्य:संकट मोचन (Relief from Crisis)समृद्धि (Prosperity)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र
"ॐ आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्" श्रीराम का प्रसिद्ध साधना-श्लोक है, जिसमें उन्हें विपत्तियाँ हरने वाला और सब संपदाएँ देने वाला कहकर बार-बार प्रणाम किया जाता है — "भूयो भूयो नमाम्यहम्"। संकट, विपत्ति और यात्रा के आरंभ में इसका पाठ प्रचलित है। द्रिक पंचांग की राम मंत्र-सूची में यह है।
FAQ
ॐ आपदामपहर्तारं — राम साधना मंत्र — सामान्य प्रश्न
"जो आपदाओं का हरण करने वाले हैं और समस्त सम्पदाओं के दाता हैं; जो समस्त लोकों को प्रिय हैं — उन श्रीराम को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।" इसमें साधक कुछ माँगता नहीं, केवल बार-बार नमन करता है।
"आपदाओं का हरण" और "सम्पदाओं का दान" — परंपरा में इन्हें पूरक माना जाता है: जो कष्ट हरता है वही सुख भी देता है; ये दो अलग शक्तियाँ नहीं हैं।
"राम" शब्द का एक अर्थ ही है — जो रमण कराते हैं, जो प्रिय लगते हैं। "लोकाभिराम" अर्थात् समस्त लोकों को प्रिय — यह विशेषण उसी व्युत्पत्ति से जुड़ा है।
परंपरा में रामनवमी, चैत्र नवरात्रि और मंगलवार विशेष माने जाते हैं। साथ ही संकट, विपत्ति, भय या किसी कठिन कार्य व यात्रा के आरंभ पर इसका पाठ प्रचलित है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व संध्या है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
यह साधना मंत्र है, सामान्य नाम-जप नहीं। परंपरा में इस श्रेणी के मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इनमें उच्चारण, संख्या तथा नियम का विशेष विधान बताया जाता है। जिन्हें दीक्षा प्राप्त न हो, उनके लिए परंपरा इष्ट के नाम-जप, स्तुति व आरती का मार्ग सुझाती है — वह सर्वथा खुला कहा गया है।
"आपदामपहर्तारं" = "आपदाम् + अपहर्तारम्" की संधि है; इसे "आ-प-दा-म-प-हर्-ता-रं" में तोड़कर अभ्यास करें। परंपरा में कहा जाता है कि मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
