श्री हरिहर आरती

śrī harihara āratī

Harihar Aarti (Vishnu-Shiva Combined)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक हरिहर (विष्णु-शिव) आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान हरिहर हरि (विष्णु) व हर (शिव) के अद्वैत संयुक्त स्वरूप हैं, जिनका आधा अंग विष्णु व आधा शिव होता है। यह रूप विष्णु व शिव की एकता तथा "शिव-केशव अभेद" का प्रतीक है। यह आरती एकादशी, प्रदोष व हरिहर-क्षेत्रों में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

PDF डाउनलोड

जय हरिहर देवा, हरि-हर एक स्वरूपा। आधे विष्णु आधे शिव, अद्भुत तव रूपा॥

हे हरिहर देव, हे हरि व हर के एक स्वरूप, आपकी जय हो! आधे अंग विष्णु व आधे शिव — आपका रूप अद्भुत है।

एक हाथ शंख-चक्र, एक त्रिशूल-डमरू। एक अंग पीताम्बर, एक भस्म-वसन गुरु॥

एक हाथ में शंख-चक्र, दूसरे में त्रिशूल-डमरू; एक अंग पर पीताम्बर तो दूसरे पर भस्म व वल्कल — ऐसे गुरुस्वरूप।

विष्णु-शिव में भेद नहिं, यह ज्ञान सिखाते। द्वैत-भाव को तजकर, अद्वैत दरसाते॥

विष्णु व शिव में कोई भेद नहीं — यह ज्ञान आप सिखाते हैं; द्वैत-भाव त्यागकर आप अद्वैत (एकता) का दर्शन कराते हैं।

पाप-ताप सब हरते, भय-संकट टारे। भक्तन को सुख देते, हरिहर प्यारे॥

आप समस्त पाप-ताप हरते हैं और भय-संकट दूर करते हैं; हे प्यारे हरिहर, आप भक्तों को सुख देते हैं।

हरिहर जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-मुक्ति वह पावे, सुख-शान्ति पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से हरिहर जी की यह आरती गाता है, वह भक्ति-मुक्ति तथा सुख-शांति प्राप्त करता है।

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे हरिहर देव, हे हरि व हर के एक स्वरूप, आपकी जय हो! आधे अंग विष्णु व आधे शिव — आपका रूप अद्भुत है।
  2. एक हाथ में शंख-चक्र, दूसरे में त्रिशूल-डमरू; एक अंग पर पीताम्बर तो दूसरे पर भस्म व वल्कल — ऐसे गुरुस्वरूप।
  3. विष्णु व शिव में कोई भेद नहीं — यह ज्ञान आप सिखाते हैं; द्वैत-भाव त्यागकर आप अद्वैत (एकता) का दर्शन कराते हैं।
  4. आप समस्त पाप-ताप हरते हैं और भय-संकट दूर करते हैं; हे प्यारे हरिहर, आप भक्तों को सुख देते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से हरिहर जी की यह आरती गाता है, वह भक्ति-मुक्ति तथा सुख-शांति प्राप्त करता है।

लाभ

  • विष्णु व शिव दोनों की एक साथ कृपा प्राप्त होती है।
  • भय, पाप व संकट का नाश होकर मन को शांति मिलती है।
  • द्वैत-भाव मिटकर भक्ति व आध्यात्मिक एकता का बोध होता है।

कब करें पाठ

एकादशी व प्रदोष काल मेंहरिहर-क्षेत्र दर्शन के समयनित्य प्रातः व संध्या में

पाठ विधि

भगवान हरिहर के समक्ष तुलसी व बेलपत्र दोनों अर्पित करें (विष्णु को तुलसी, शिव को बेलपत्र), दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। एकादशी व प्रदोष पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री हरिहर आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत