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3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
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FAQ
श्री हरिहर आरती — सामान्य प्रश्न
भगवान हरिहर हरि (विष्णु) व हर (शिव) के संयुक्त अद्वैत स्वरूप हैं, जिनका आधा अंग विष्णु व आधा शिव होता है; यह दोनों की एकता का प्रतीक है।
हरिहर रूप "शिव-केशव अभेद" अर्थात् विष्णु व शिव में कोई भेद नहीं — इस अद्वैत-भाव व समन्वय का प्रतीक है।
हरिहर को विष्णु-पक्ष हेतु तुलसी व शिव-पक्ष हेतु बेलपत्र — दोनों अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इससे विष्णु व शिव दोनों की कृपा मिलती है, पाप-संकट का नाश होता है और भक्ति व आध्यात्मिक एकता का बोध होता है।
पर्व
