श्री कुबेर आरती

śrī kubera āratī

Kuber Aarti (Om Jai Yaksha Kuber Hare)

समय
4 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
धनतेरस; दीपावली; शुक्रवार
उद्देश्य:धन-प्राप्ति (Wealth)समृद्धि (Prosperity)संकट-निवारण (Relief from troubles)
✓ संपूर्ण

"ॐ जै यक्ष कुबेर हरे" धन के देवता कुबेर की प्रचलित आरती है, जो धनतेरस और दीपावली पर गाई जाती है। इसके आठ पद हैं, और पहला ही पद इसका सार है — "शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे"। आरती कुबेर को शिव का बड़ा भक्त भी कहती है, और फलश्रुति में छाप है — "कहत प्रेमपाल स्वामी"।

परिचय

स्रोत: "ॐ जै यक्ष कुबेर हरे" — परंपरागत आरती; फलश्रुति में छाप "प्रेमपाल स्वामी"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री कुबेर आरती
IASTśrī kubera āratī
मूल स्रोत"ॐ जै यक्ष कुबेर हरे" — परंपरागत आरती; फलश्रुति में छाप "प्रेमपाल स्वामी"
शुभ दिनधनतेरस; दीपावली; शुक्रवार
पाठ समय4 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

कुबेर यक्षों के राजा और देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, और यह आरती उन्हें दोनों रूपों में गाती है — भंडार भरने वाले और शिव के भक्त।

भंडारी (पद 1). "शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे" — जो शरण में आए, कुबेर उसके भंडार भर देते हैं।

शिव-भक्त और योद्धा (पद 2, 4). "शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े" — कुबेर शिव के बड़े भक्त हैं, और उन्होंने दैत्य, दानव और मानव से अनेक युद्ध लड़े; हाथ में गदा, त्रिशूल और अनेक शस्त्र हैं, और उनकी धनुष-टंकार दुख, भय और संकट दूर करती है।

दरबार और भोग (पद 3, 5, 7). सोने के सिंहासन पर बैठे, सिर पर छत्र, योगिनियाँ मंगल गाती हैं; भाँति-भाँति के व्यंजन, मोहन-भोग और साथ में उड़द-चने; मुकुट में मणि, गले में मोतियों का हार, और अगर-कपूर की बाती व घी की ज्योत।

फलश्रुति (पद 8). जो यह आरती गाता है, वह मनचाहा फल पाता है — "कहत प्रेमपाल स्वामी"।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे॥

हे यक्षराज कुबेर, आपकी जय हो! जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, कुबेर उनके भंडार भर देते हैं।

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े। दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े॥

शिव के भक्तों में कुबेर बड़े भक्त हैं; उन्होंने दैत्यों, दानवों और मनुष्यों से अनेक युद्ध लड़े।

स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे। योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं॥

आप सोने के सिंहासन पर बैठे हैं, सिर पर छत्र घूम रहा है; योगिनियाँ मंगल-गीत गाती हैं और सब जय-जयकार करते हैं।

गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे। दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें॥

हाथ में गदा और त्रिशूल हैं, आपने अनेक शस्त्र धारण किए हैं; दुख, भय और संकट से छुड़ाने वाले आप धनुष की टंकार करते हैं।

भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने। मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥

भाँति-भाँति के बहुत-से व्यंजन बने हैं; मोहन-भोग लगाया जाता है, और साथ में उड़द-चने।

बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े। अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे॥

हे बल, बुद्धि और विद्या देने वाले, हम आपकी शरण में पड़े हैं; आप अपने भक्तजनों के सारे काम सँवारते हैं।

मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले। अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले॥

मुकुट में मणि की शोभा है, गले में मोतियों का हार; अगर और कपूर की बाती है, और घी की ज्योत जल रही है।

यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

(फलश्रुति) जो कोई मनुष्य यक्ष कुबेर जी की यह आरती गाता है — स्वामी प्रेमपाल कहते हैं — वह मनचाहा फल पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे यक्षराज कुबेर, आपकी जय हो! जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, कुबेर उनके भंडार भर देते हैं।
  2. शिव के भक्तों में कुबेर बड़े भक्त हैं; उन्होंने दैत्यों, दानवों और मनुष्यों से अनेक युद्ध लड़े।
  3. आप सोने के सिंहासन पर बैठे हैं, सिर पर छत्र घूम रहा है; योगिनियाँ मंगल-गीत गाती हैं और सब जय-जयकार करते हैं।
  4. हाथ में गदा और त्रिशूल हैं, आपने अनेक शस्त्र धारण किए हैं; दुख, भय और संकट से छुड़ाने वाले आप धनुष की टंकार करते हैं।
  5. भाँति-भाँति के बहुत-से व्यंजन बने हैं; मोहन-भोग लगाया जाता है, और साथ में उड़द-चने।
  6. हे बल, बुद्धि और विद्या देने वाले, हम आपकी शरण में पड़े हैं; आप अपने भक्तजनों के सारे काम सँवारते हैं।
  7. मुकुट में मणि की शोभा है, गले में मोतियों का हार; अगर और कपूर की बाती है, और घी की ज्योत जल रही है।
  8. (फलश्रुति) जो कोई मनुष्य यक्ष कुबेर जी की यह आरती गाता है — स्वामी प्रेमपाल कहते हैं — वह मनचाहा फल पाता है।

लाभ

  • धन और भंडार की कामना — "शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे"।
  • धनतेरस और दीपावली के पूजन का पाठ।
  • संकट-निवारण का भाव — "दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें"।
  • फलश्रुति: मनचाहा फल।

कब करें पाठ

धनतेरस परदीपावली के लक्ष्मी-पूजन मेंशुक्रवार को

पाठ विधि

कुबेर जी के चित्र या यंत्र के समक्ष घी का दीपक जलाएँ और अगर-कपूर रखें — सातवाँ पद यही आरती का दृश्य है; भोग में उड़द-चने रख सकते हैं (पद 5)। हर पद की पहली पंक्ति के बाद उसका उत्तरार्ध "स्वामी …" कहकर दोहराएँ (जैसे "शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े — स्वामी भक्त कुबेर बड़े"), और हर पद के बाद टेक "ॐ जै यक्ष कुबेर हरे" गाएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — आरती श्री कुबेर जी की (आधार-पाठ) · aartichalisa.com — कुबेर जी की आरती
रचयिताप्रेमपाल स्वामी (फलश्रुति की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री कुबेर आरती — सामान्य प्रश्न

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