श्री झूलेलाल चालीसा
śrī jhūlelāla cālīsā
Jhulelal Chalisa (Sindhi Ishtadev)
परिचय
स्रोत: सिंधी समाज के इष्टदेव; उद्गम स्थल नसरपुर/सिंध
संपूर्ण चालीसा
गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय धरि ध्यान। झूलेलाल चालीसा कहूँ, देहु अभय वरदान॥
गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं झूलेलाल चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, अभय वरदान दीजिए।
जय जय झूलेलाल अमर पीर। भक्तन के हरते सब पीर॥
हे अमर पीर झूलेलाल, आपकी जय-जय हो; आप भक्तों की सब पीड़ा हरते हैं।
वरुण-अवतार जल के स्वामी। सिंधी-इष्ट तुम अन्तर्यामी॥
आप वरुण-अवतार व जल के स्वामी हैं; सिंधी समाज के इष्टदेव व अन्तर्यामी हैं।
सिंधु-तट पर लीला रचाई। भक्त-रक्षा को राह बनाई॥
आपने सिंधु नदी के तट पर लीला रचाई और भक्तों की रक्षा का मार्ग बनाया।
पल्ले-मछली-घोड़े सवारी। श्वेत-वस्त्र छवि अति प्यारी॥
पल्ले (मछली) व घोड़े पर सवारी; श्वेत-वस्त्र में आपकी छवि अति प्यारी है।
अत्याचारी का मद तोड़ा। भक्तन से तुम नाता जोड़ा॥
आपने अत्याचारी का मद (घमंड) तोड़ा और भक्तों से नाता जोड़ा।
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥
आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
अमरलाल जल-ज्योति तुम्हारी। भक्त-गण नित दरस को धारी॥
हे अमरलाल, आपकी जल-ज्योति पावन है; भक्तगण नित्य दर्शन की लालसा रखते हैं।
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
चेटीचंड का पर्व सुहाना। भक्त मनावें झूले-गाना॥
चेटीचंड का पर्व सुहावना है; भक्त झूलेलाल के भजन गाकर इसे मनाते हैं।
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥
आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
अखंड-ज्योति भक्त जगावैं। श्रद्धा से प्रभु को रिझावैं॥
भक्त अखंड-ज्योति जगाते हैं और श्रद्धा से प्रभु को रिझाते हैं।
रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥
आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। झूलेलाल-कृपा वह पावै॥
जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह झूलेलाल-कृपा प्राप्त करता है।
मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥
आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
जल-प्रवाह पर शासन तेरा। नौका-पार करत जो फेरा॥
जल-प्रवाह पर आपका शासन है; आप नौका को (भव-सागर से) पार कराते हैं।
जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
जो यह झूलेलाल चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥
जो यह झूलेलाल चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा झूलेलाल की होई॥
जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर झूलेलाल की कृपा होती है।
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
झूलेलाल-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
जिन पर झूलेलाल की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
बेड़ी-हिंडोरा झुलावें भक्ता। जल-दीप तारें श्रद्धा-रत्ता॥
भक्त बेड़ी-हिंडोरा झुलाते हैं और श्रद्धा में लीन होकर जल में दीप प्रवाहित करते हैं।
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत झूलेलाल देवा॥
जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर झूलेलाल देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥
आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
धर्म-रक्षा का बल बताया। प्रेम-एकता पाठ पढ़ाया॥
आपने धर्म-रक्षा का बल बताया और प्रेम व एकता का पाठ पढ़ाया।
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
झूलेलाल-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
जो जन झूलेलाल-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
अमर-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥
आपके अमर-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
सत्य-धर्म का मार्ग दिखाते। शरणागत को पार लगाते॥
आप सत्य व धर्म का मार्ग दिखाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
दीन-रक्षक तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥
आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
जो जन झूलेलाल गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
जो जन झूलेलाल के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
झूलेलाल-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
जो जन झूलेलाल-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-एकता-संतोष बढ़ावै॥
घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, एकता व संतोष बढ़ता है।
भय-संकट सब दूर हटावै। झूलेलाल जो जन नित ध्यावै॥
जो जन झूलेलाल का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
सन्मार्ग वह सहज वह पावै। झूलेलाल-नाम जो जन गावै॥
जो जन झूलेलाल-नाम गाता है, वह सहज ही सन्मार्ग पा लेता है।
प्रेम-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥
घर में प्रेम, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
जय जय जय झूलेलाल अमर। रक्षा करो प्रभु शरण-घर॥
हे अमर झूलेलाल, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
झूलेलाल चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, प्रभु-कृपा बरसाय॥
जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल झूलेलाल चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और प्रभु की कृपा बरसती है।
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अर्थ (हिन्दी)
- गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं झूलेलाल चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, अभय वरदान दीजिए।
- हे अमर पीर झूलेलाल, आपकी जय-जय हो; आप भक्तों की सब पीड़ा हरते हैं।
- आप वरुण-अवतार व जल के स्वामी हैं; सिंधी समाज के इष्टदेव व अन्तर्यामी हैं।
- आपने सिंधु नदी के तट पर लीला रचाई और भक्तों की रक्षा का मार्ग बनाया।
- पल्ले (मछली) व घोड़े पर सवारी; श्वेत-वस्त्र में आपकी छवि अति प्यारी है।
- आपने अत्याचारी का मद (घमंड) तोड़ा और भक्तों से नाता जोड़ा।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
- हे अमरलाल, आपकी जल-ज्योति पावन है; भक्तगण नित्य दर्शन की लालसा रखते हैं।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- चेटीचंड का पर्व सुहावना है; भक्त झूलेलाल के भजन गाकर इसे मनाते हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- भक्त अखंड-ज्योति जगाते हैं और श्रद्धा से प्रभु को रिझाते हैं।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह झूलेलाल-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
- जल-प्रवाह पर आपका शासन है; आप नौका को (भव-सागर से) पार कराते हैं।
- जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह झूलेलाल चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर झूलेलाल की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर झूलेलाल की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- भक्त बेड़ी-हिंडोरा झुलाते हैं और श्रद्धा में लीन होकर जल में दीप प्रवाहित करते हैं।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर झूलेलाल देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
- आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
- आपने धर्म-रक्षा का बल बताया और प्रेम व एकता का पाठ पढ़ाया।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन झूलेलाल-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- आपके अमर-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
- आप सत्य व धर्म का मार्ग दिखाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
- आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
- जो जन झूलेलाल के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन झूलेलाल-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, एकता व संतोष बढ़ता है।
- जो जन झूलेलाल का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन झूलेलाल-नाम गाता है, वह सहज ही सन्मार्ग पा लेता है।
- घर में प्रेम, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
- हे अमर झूलेलाल, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल झूलेलाल चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और प्रभु की कृपा बरसती है।
लाभ
- भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
- मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं व बाधाएँ दूर होती हैं।
- भक्ति, एकता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- घर में सुख-समृद्धि व प्रभु की कृपा बनी रहती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान झूलेलाल (अमरलाल) के समक्ष जल-कलश, अखंड-ज्योति व पुष्प अर्पित करें, "आयो लाल झूलेलाल" का स्मरण करते हुए चालीसा का पाठ करें। चेटीचंड पर इसका विशेष महत्व है।
