FAQ
मकर संक्रांति — सामान्य प्रश्न
मकर संक्रांति पौष को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
मकर संक्रांति उन थोड़े हिन्दू पर्वों में है जो तिथि से नहीं, सूर्य की गति से तय होते हैं। पौष मास में जिस दिन सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है — इसीलिए वर्तमान शताब्दी में यह लगभग सदा 14 या 15 जनवरी को ही पड़ता है, जबकि शेष पर्वों की तारीख़ हर वर्ष बदलती रहती है।
मकर संक्रांति मुख्यतः श्री सूर्य देव की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन सूर्योदय से पूर्व गंगा अथवा पवित्र नदी में स्नान, सूर्य को अर्घ्य तथा सूर्य-मंत्र का जप, तिल व गुड़ का दान तथा सेवन, खिचड़ी का भोग व दान का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
अनुशंसित पाठ
मकर संक्रांति के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
