श्री गुरु नानक चालीसा

śrī guru nānaka cālīsā

Guru Nanak Dev Chalisa

समय
8–10 मिनट
श्लोक/चौपाई
42
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
गुरु नानक जयंती (कार्तिक पूर्णिमा); प्रातः
✓ संपूर्ण (40/40 श्लोक)

परिचय

स्रोत: सिख धर्म के आदि गुरु; जन्म-स्थल ननकाना साहिब

संपूर्ण चालीसा

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एक ओंकार सतनाम सुमिर, करूँ गुरु गुणगान। गुरु नानक चालीसा कहूँ, देहु ज्ञान-वरदान॥

"एक ओंकार सतनाम" का स्मरण कर मैं गुरु का गुणगान करता हूँ; हे गुरु नानक, चालीसा कहता हूँ — ज्ञान का वरदान दीजिए।

जय जय गुरु नानक भगवाना। जग-गुरु तुम ज्योति-निधाना॥

हे गुरु नानक भगवान, आपकी जय-जय हो; आप जगत-गुरु व ज्योति के निधान हैं।

सिख-धर्म के आदि-गुरु तुम। सत्य-प्रेम के मार्ग-गुरु तुम॥

आप सिख-धर्म के आदि-गुरु हैं; सत्य व प्रेम के मार्ग-दर्शक गुरु हैं।

तलवंडी में जन्म तुम्हारा। ननकाना-धाम जग-प्यारा॥

तलवंडी (अब ननकाना साहिब) में आपका जन्म हुआ; वह ननकाना-धाम जगत को प्यारा है।

एक ओंकार का ज्ञान सुनाया। नाम-जप का मर्म बताया॥

आपने "एक ओंकार" का ज्ञान सुनाया और नाम-जप का मर्म बताया।

"नाम जपो किरत करो" सिखाया। "वंड छको" का पाठ पढ़ाया॥

आपने "नाम जपो, ईमानदारी से किरत (कर्म) करो" सिखाया और "वंड छको" (बाँटकर खाओ) का पाठ पढ़ाया।

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।

दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥

आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।

चारों दिशा उदासी कीनी। जग को सत्य की राह दीनी॥

आपने चारों दिशाओं में उदासी (यात्राएँ) कीं और जगत को सत्य की राह दी।

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।

गुरु-पर्व भक्त मनावें। प्रकाश-पर्व पर शीश नवावें॥

भक्त गुरु-पर्व (गुरुपुरब) मनाते हैं और प्रकाश-पर्व पर शीश नवाते हैं।

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।

लंगर-सेवा का व्रत चलाया। ऊँच-नीच का भेद मिटाया॥

आपने लंगर-सेवा की परंपरा चलाई और ऊँच-नीच का भेद मिटाया।

रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-शान्ति घर में लाते॥

आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-शांति लाते हैं।

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। गुरु-नानक-कृपा वह पावै॥

जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह गुरु-नानक की कृपा प्राप्त करता है।

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥

आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।

मरदाना-संग कीर्तन गाया। नाम-रस जग में बरसाया॥

आपने (भाई) मरदाना के संग कीर्तन गाया और जगत में नाम-रस बरसाया।

जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।

जो यह नानक चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥

जो यह गुरु नानक चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा नानक की होई॥

जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर गुरु नानक की कृपा होती है।

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-शान्ति घर में लावैं॥

सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-शांति लाते हैं।

नानक-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

जिन पर गुरु नानक की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।

सरबत-भले की अरदास सिखाई। प्रेम-समता जग में फैलाई॥

आपने "सरबत दा भला" की अरदास सिखाई और जगत में प्रेम व समता फैलाई।

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत गुरु नानक देवा॥

जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर गुरु नानक देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।

महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥

आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।

गुरबाणी का अमृत बाँटा। जग का अज्ञान-तम काटा॥

आपने गुरबाणी का अमृत बाँटा और जगत का अज्ञान-अंधकार काटा।

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।

दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।

नानक-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥

जो जन गुरु नानक-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।

ननकाना-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥

ननकाना-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।

सत्य-नाम का मार्ग दिखाते। शरणागत को पार लगाते॥

आप सत्य-नाम का मार्ग दिखाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।

जग-गुरु तुम परम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥

आप जग-गुरु व परम कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।

जो जन नानक गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

जो जन गुरु नानक के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।

नानक-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

जो जन गुरु नानक-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।

सुख-शान्ति-ज्ञान घर में आवै। भक्ति-समता-संतोष बढ़ावै॥

घर में सुख, शांति व ज्ञान आता है और भक्ति, समता व संतोष बढ़ता है।

भय-संकट सब दूर हटावै। नानक जो जन नित ध्यावै॥

जो जन गुरु नानक का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।

सत्य-मार्ग वह सहज वह पावै। नानक-नाम जो जन गावै॥

जो जन गुरु नानक-नाम गाता है, वह सहज ही सत्य-मार्ग पा लेता है।

ज्ञान-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥

घर में ज्ञान, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।

जय जय जय गुरु नानक स्वामी। रक्षा करो प्रभु अन्तर्यामी॥

हे गुरु नानक स्वामी, आपकी जय हो; हे अन्तर्यामी प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।

नानक चालीसा सरल यह, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, गुरु-कृपा घर आय॥

जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल गुरु नानक चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और घर में गुरु-कृपा आती है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. "एक ओंकार सतनाम" का स्मरण कर मैं गुरु का गुणगान करता हूँ; हे गुरु नानक, चालीसा कहता हूँ — ज्ञान का वरदान दीजिए।
  2. हे गुरु नानक भगवान, आपकी जय-जय हो; आप जगत-गुरु व ज्योति के निधान हैं।
  3. आप सिख-धर्म के आदि-गुरु हैं; सत्य व प्रेम के मार्ग-दर्शक गुरु हैं।
  4. तलवंडी (अब ननकाना साहिब) में आपका जन्म हुआ; वह ननकाना-धाम जगत को प्यारा है।
  5. आपने "एक ओंकार" का ज्ञान सुनाया और नाम-जप का मर्म बताया।
  6. आपने "नाम जपो, ईमानदारी से किरत (कर्म) करो" सिखाया और "वंड छको" (बाँटकर खाओ) का पाठ पढ़ाया।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  8. आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
  9. आपने चारों दिशाओं में उदासी (यात्राएँ) कीं और जगत को सत्य की राह दी।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  11. भक्त गुरु-पर्व (गुरुपुरब) मनाते हैं और प्रकाश-पर्व पर शीश नवाते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  14. आपने लंगर-सेवा की परंपरा चलाई और ऊँच-नीच का भेद मिटाया।
  15. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-शांति लाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह गुरु-नानक की कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
  18. आपने (भाई) मरदाना के संग कीर्तन गाया और जगत में नाम-रस बरसाया।
  19. जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  20. जो यह गुरु नानक चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर गुरु नानक की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-शांति लाते हैं।
  23. जिन पर गुरु नानक की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  24. आपने "सरबत दा भला" की अरदास सिखाई और जगत में प्रेम व समता फैलाई।
  25. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर गुरु नानक देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  26. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  27. आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
  28. आपने गुरबाणी का अमृत बाँटा और जगत का अज्ञान-अंधकार काटा।
  29. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  30. जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  31. जो जन गुरु नानक-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
  32. ननकाना-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
  33. आप सत्य-नाम का मार्ग दिखाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
  34. आप जग-गुरु व परम कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
  35. जो जन गुरु नानक के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन गुरु नानक-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में सुख, शांति व ज्ञान आता है और भक्ति, समता व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन गुरु नानक का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन गुरु नानक-नाम गाता है, वह सहज ही सत्य-मार्ग पा लेता है।
  40. घर में ज्ञान, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
  41. हे गुरु नानक स्वामी, आपकी जय हो; हे अन्तर्यामी प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल गुरु नानक चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और घर में गुरु-कृपा आती है।

लाभ

  • मन को शांति, सत्य व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • भय, संकट व अहंकार-मोह से मुक्ति मिलती है।
  • भक्ति, सेवा व समता का भाव बढ़ता है।
  • घर में सुख-शांति व गुरु-कृपा बनी रहती है।

कब करें पाठ

गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) परप्रातः नाम-सिमरन के समयनित्य पूजा-पाठ में

पाठ विधि

गुरु नानक देव जी के चित्र के समक्ष श्रद्धापूर्वक "एक ओंकार सतनाम" का सिमरन करते हुए चालीसा का पाठ करें। गुरुपुरब (प्रकाश पर्व) पर पाठ व सेवा-लंगर का विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (40/40 श्लोक)
स्रोत परंपरापारंपरिक गुरु नानक चालीसा · सिख भक्ति-परंपरा
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री गुरु नानक चालीसा — सामान्य प्रश्न

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