छठ पूजा

Chhath Puja (Surya Shashthi)

अक्टूबर–नवंबर (दीपावली के छठे दिन)

महत्व

छठ सूर्य की उपासना का लोकपर्व है, और उन विरल पर्वों में है जिनमें डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है — उगते को ही नहीं। यह मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

यह चार दिन का पर्व है — कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी को समाप्त; मुख्य दिन षष्ठी है, इसीलिए नाम छठ पड़ा। पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य। व्रती इस बीच लगातार छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं — जल तक ग्रहण नहीं करते।

पवित्रता के नियम असामान्य रूप से कड़े हैं: लहसुन-प्याज वर्जित, भोजन मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से तथा कांसे या मिट्टी के बर्तन में बनता है। नहाय-खाय के दिन व्रती केवल एक बार भोजन करते हैं — कद्दू की सब्जी, मूंग-चना दाल व चावल; तली हुई वस्तुएँ वर्जित हैं।

पूजन विधि व परंपरा

  • नहाय-खाय (चतुर्थी) — स्नान तथा एक समय सात्त्विक भोजन
  • खरना (पंचमी) — दिनभर उपवास, संध्या को गुड़ की खीर का प्रसाद
  • संध्या अर्घ्य (षष्ठी) — डूबते सूर्य को अर्घ्य
  • उषा अर्घ्य (सप्तमी) — उगते सूर्य को अर्घ्य तथा पारण
  • छत्तीस घंटे का निर्जला व्रत
  • ठेकुआ, गन्ना व मौसमी फल का सूप में अर्पण
  • घाट पर छठ गीतों का गायन

तिथि / पंचांग

तिथिषष्ठी
पक्षशुक्ल
माहकार्तिक
समय (लगभग)अक्टूबर–नवंबर (दीपावली के छठे दिन)
आराध्यश्री सूर्य देव
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/छठ_पूजा — कार्तिक शुक्ल षष्ठी; चार दिवसीय पर्व (चतुर्थी से सप्तमी); 36 घंटे का निर्जला व्रत; नहाय-खाय व खरना; लहसुन-प्याज वर्जित; मिट्टी के चूल्हे व आम की लकड़ी का विधान
आज का पंचांग

छठ पूजा — सामान्य प्रश्न

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