FAQ
शनि जयंती — सामान्य प्रश्न
शनि जयंती अमावस्या तिथि, कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है और इसे शनिदेव का जन्मोत्सव माना जाता है। परंपरा के अनुसार वे सूर्यदेव तथा उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं।
शनि जयंती मुख्यतः श्री शनि देव की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन काले वस्त्र पर शनिदेव की प्रतिमा अथवा चित्र की स्थापना, सरसों के तेल का दीप जलाना, काले तिल तथा नील पुष्प अर्पित करना, पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाना तथा परिक्रमा का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
अनुशंसित पाठ
शनि जयंती के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
