शनि वैदिक मंत्र — शं नो देवीरभिष्टये

śani vaidika mantra — śaṃ no devīr abhiṣṭaye

Shani Vedic Mantra (Navagraha tradition)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शनिवार, शनि अमावस्या व शनि जयंती
उद्देश्य:शनि शांति (Saturn Remedy)रक्षा (Protection)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र

शनि का वैदिक मंत्र “ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिस्रवन्तु नः॥” नवग्रह ग्रह-शांति की परंपरा में प्रयुक्त होता है। इसमें जल-देवियों से प्रार्थना है कि वे हमारे लिए कल्याणकारी हों। ऋचा का सीधा सम्बोधन “आपः” यानी जल है; शनि से इसका जुड़ाव ग्रह-शांति परंपरा का है।

परिचय

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

स्रोत: नवग्रह उपासना में शनि का वैदिक मंत्र (आपः-सम्बोधन वाली ऋचा)

एक नज़र में

मंत्र / पाठशनि वैदिक मंत्र — शं नो देवीरभिष्टये
IASTśani vaidika mantra — śaṃ no devīr abhiṣṭaye
प्रकारवैदिक मंत्र
देवताश्री शनि देव
मूल स्रोतनवग्रह उपासना में शनि का वैदिक मंत्र (आपः-सम्बोधन वाली ऋचा)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनशनिवार, शनि अमावस्या व शनि जयंती
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

नवग्रह उपासना में हर ग्रह के तीन स्तर के मंत्र माने जाते हैं — वैदिक, बीज और नाम। शनि का वैदिक मंत्र यही ऋचा है, जो शनि हवन, ग्रह-शांति और शनि जयंती की पूजा में पढ़ी जाती है।

ऋचा का भाव यह है: "वे जल-देवियाँ हमारे लिए कल्याणकारी हों, पीने के लिए हों; वे सुख और आरोग्य लेकर हम तक बहें।" यहाँ "शम्" शब्द दो बार आता है — शान्ति व कल्याण के अर्थ में — और यही शब्द "शनि" नाम से ध्वनि-साम्य रखता है, जिसे परंपरा अर्थपूर्ण मानती है।

एक बात स्पष्ट रहनी चाहिए: ऋचा का सीधा सम्बोधन "आपः" यानी जल है, शनि नहीं। शनि से इसका जुड़ाव ग्रह-शांति की परवर्ती परंपरा से आया है, जहाँ हर ग्रह के लिए एक वैदिक ऋचा नियत की गई। इसे "शनि की ऋचा" कहकर सीधे प्रस्तुत करना अधूरा होगा — इसीलिए यहाँ यह अंतर लिखा गया है।

मंत्र

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ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिस्रवन्तु नः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभिस्रवन्तु नः॥

oṃ śaṃ no devīr abhiṣṭaya āpo bhavantu pītaye | śaṃ yor abhisravantu naḥ ||

Om Sham No Devir-abhishtaya Aapo Bhavantu Pitaye, Sham Yor-abhisravantu Nah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "शं" में अनुस्वार है और "श" तालव्य — "सं" नहीं। "देवीरभिष्टय" वास्तव में "देवीः + अभिष्टये" की संधि है; "ष्ट" में "ष" मूर्धन्य है। "योरभिस्रवन्तु" = "योः + अभिस्रवन्तु"; इसमें "स्र" संयुक्ताक्षर स्पष्ट होना चाहिए। स्वर शांत व स्थिर रखें — यह शांति-मंत्र के भाव का है, उग्र नहीं।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

शम्कल्याण, शांति
नःहमारे लिए
देवीःदेवियाँ (यहाँ जल-देवियाँ)
अभिष्टयेअभीष्ट कामना के लिए
आपःजल
भवन्तुहों
पीतयेपीने के लिए
योःआरोग्य, रोग-निवृत्ति
अभिस्रवन्तुबहें, प्रवाहित हों

अर्थ (हिन्दी)

  1. वे जल-देवियाँ हमारे लिए कल्याणकारी हों और हमारी अभीष्ट कामना पूर्ण करें; वे पीने योग्य हों। वे सुख और आरोग्य लेकर हमारी ओर बहें।

लाभ

  • नवग्रह उपासना में शनि का प्रतिष्ठित वैदिक मंत्र माना जाता है।
  • परंपरा में इसे शनि-दोष व साढ़े साती की शांति से जोड़ा जाता है।
  • शनि हवन व ग्रह-शांति की पद्धति में पाठ विहित बताया जाता है।
  • "शम्" (शांति) का भाव — उग्र नहीं, शीतल उपासना का मंत्र है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: शनिवार संध्या

जप का उत्तम समय

शनिवार कोशनि अमावस्या व शनि जयंती परसाढ़े साती या ढैया के काल मेंनवग्रह शांति व शनि हवन में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शनिवार को स्नान के बाद शनि-विग्रह या पीपल वृक्ष के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, काले तिल व नीले पुष्प अर्पित करें और ऋचा का 108 बार पाठ करें। परंपरा में जल-पात्र पास रखकर जप के अंत में उसे अर्पित करने की बात कही जाती है — क्योंकि ऋचा का सम्बोधन जल है। स्वर शांत रखने पर विशेष बल दिया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
मूल ग्रंथनवग्रह ग्रह-शांति की वैदिक मंत्र परंपरा
स्रोत परंपरानवग्रह ग्रह-शांति की वैदिक मंत्र परंपरा — शनि का वैदिक मंत्र · नोट: जाँचे गए स्रोत पाठ देते हैं, पर वेद का अध्याय/ऋचा-क्रमांक नहीं — इसलिए क्रमांक यहाँ नहीं दिया गया · नोट: ऋचा का सीधा सम्बोधन "आपः" (जल) है; शनि से जुड़ाव ग्रह-शांति परंपरा का है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शनि देव

Lord Shani (Saturn)

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

देवता वर्गन्याय · कर्मफल · अनुशासन · धैर्य
वाहनकौआ / गिद्ध
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