श्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली

śrī śani aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Shani Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
शनिवार; साढ़े-साती व ढैया काल; शनि जयंती
उद्देश्य:शनि-शांति (Shani Relief)कष्ट-निवारण (Relief from Suffering)वैराग्य (Detachment)
✓ संपूर्ण

श्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली शनिदेव के 108 नामों की सूची है, जो शनैश्चर से आरंभ होकर भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलद पर समाप्त होती है। यह सूची शनि को सजाती नहीं — इसमें कुरूप, कुत्सित, क्रूर तथा निन्द्य जैसे नाम भी हैं, और उनके ठीक आगे वन्दनीय व भक्त-पोषक भी।

परिचय

शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

स्रोत: पारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — शनैश्चर से आरंभ, भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलद पर समाप्त

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī śani aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री शनि देव
मूल स्रोतपारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — शनैश्चर से आरंभ, भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलद पर समाप्त
शुभ दिनशनिवार; साढ़े-साती व ढैया काल; शनि जयंती
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री शनि अष्टोत्तर शतनामावली शनिदेव के 108 नामों की सूची है। नामावली-रूप में हर नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना — प्रत्येक नाम पर एक नील पुष्प अथवा काला तिल अर्पित करना — तथा माला-जप, दोनों के लिए उपयुक्त है।

यह सूची पढ़ते समय एक बात तुरंत खटकती है, और वही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है: यह शनि को सजाती नहीं। देवताओं की 108-सूचियाँ प्रायः केवल स्तुति करती हैं; यह वैसा नहीं करती। इसमें नाम 45 कुरूपी (कुरूप), नाम 46 कुत्सित (निंदित रूप वाले), नाम 88 काठिन्यमानस (कठोर मन वाले), नाम 95 निन्द्य (निंदा किए जाने वाले), नाम 102 क्रूर, नाम 103 क्रूरचेष्ट और नाम 105 कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारण (पत्नी व पुत्र से शत्रुता के कारण) तक हैं।

पर सूची यहीं नहीं रुकती — और यही इसका ढाँचा है। वह विरोधी नामों को अगल-बगल रख देती है। नाम 95 निन्द्य के ठीक आगे नाम 96 वन्दनीय है। नाम 92 निर्गुण के आगे नाम 93 गुणात्मा। नाम 50 एक ही शब्द में विद्याऽविद्यास्वरूपी — विद्या और अविद्या, दोनों। नाम 25 चरस्थिरस्वभाव — चर भी, स्थिर भी। और अंत सबसे स्पष्ट है: नाम 102–105 में क्रूरता व कलह के नाम आते हैं, और उनके तुरंत बाद नाम 106 परिपोषितभक्त (भक्तों का पोषण करने वाले), 107 परभीतिहर (भय हरने वाले) तथा 108 भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलद (भक्तों के मन का अभीष्ट देने वाले)।

यह भाव शनि-उपासना का मूल है, और सूची उसे छिपाती नहीं: वे कर्मफल-दाता हैं, इसलिए वही जो एक के लिए क्रूर हैं, दूसरे के लिए पोषक हैं।

रूप-वर्णन में भी सूची विशिष्ट है। नाम 12–15 सब घन से बनते हैं — घन (मेघ), घनरूप, घनाभरणधारी और घनसारविलेप (कर्पूर का विलेपन करने वाले)। नाम 16 अप्रत्याशित है — खद्योत, अर्थात जुगनू के समान द्युति वाले; सबसे धीमे और सबसे मंद-प्रकाश ग्रह के लिए यह उपमा असामान्य रूप से सटीक है, और इसी क्रम में नाम 79 तनुप्रकाशदेह (क्षीण प्रकाश वाली देह) भी आता है। नाम 42 गृध्नवाह उनका गिद्ध-वाहन बताता है, और नाम 44 कूर्माङ्ग कूर्म सदृश अंग।

दो नाम पारिवारिक हैं और विरल भी — नाम 22 छायापुत्र तथा नाम 73 भानुपुत्र (छाया और सूर्य के पुत्र), और नाम 64 ज्येष्ठापत्नीसमेत, अर्थात अपनी पत्नी ज्येष्ठा सहित। तीसरा नाम 53 विष्णुभक्त है — शनि को यहाँ स्वयं एक भक्त कहा गया है।

और एक परत शैव है: नाम 21 महेश, नाम 23 शर्व, नाम 58 विरूपाक्ष तथा नाम 84 पशूनां पति — ये सब शिव के नाम हैं, जो इसी सूची में शनि के लिए आते हैं।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

शांत व सौम्य रूप — शनैश्चर से शरतूणीरधारी (नाम 1–24)

  1. 1.
    ॐ शनैश्चराय नमःमंद गति से चलने वाले
  2. 2.
    ॐ शान्ताय नमःशांत
  3. 3.
    ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमःसमस्त अभीष्ट देने वाले
  4. 4.
    ॐ शरण्याय नमःशरण देने योग्य
  5. 5.
    ॐ वरेण्याय नमःवरण करने योग्य; श्रेष्ठ
  6. 6.
    ॐ सर्वेशाय नमःसबके ईश
  7. 7.
    ॐ सौम्याय नमःसौम्य
  8. 8.
    ॐ सुरवन्द्याय नमःदेवों द्वारा वंदित
  9. 9.
    ॐ सुरलोकविहारिणे नमःदेवलोक में विहार करने वाले
  10. 10.
    ॐ सुखासनोपविष्टाय नमःसुखासन पर विराजमान
  11. 11.
    ॐ सुन्दराय नमःसुंदर
  12. 12.
    ॐ घनाय नमःघन; मेघ-स्वरूप
  13. 13.
    ॐ घनरूपाय नमःमेघ के रूप वाले
  14. 14.
    ॐ घनाभरणधारिणे नमःसघन आभूषण धारण करने वाले
  15. 15.
    ॐ घनसारविलेपाय नमःघनसार अर्थात कर्पूर का विलेपन करने वाले
  16. 16.
    ॐ खद्योताय नमःखद्योत अर्थात जुगनू के समान द्युति वाले
  17. 17.
    ॐ मन्दाय नमःमंद; धीमी गति वाले
  18. 18.
    ॐ मन्दचेष्टाय नमःमंद चेष्टा वाले
  19. 19.
    ॐ महनीयगुणात्मने नमःपूजनीय गुणों की आत्मा वाले
  20. 20.
    ॐ मर्त्यपावनपादाय नमःजिनके चरण मर्त्यों को पवित्र करते हैं
  21. 21.
    ॐ महेशाय नमःमहेश-स्वरूप
  22. 22.
    ॐ छायापुत्राय नमःछाया के पुत्र
  23. 23.
    ॐ शर्वाय नमःशर्व अर्थात शिव-स्वरूप
  24. 24.
    ॐ शरतूणीरधारिणे नमःबाण तथा तूणीर धारण करने वाले

नील वर्ण, कठोर रूप व आपद्-उद्धार (नाम 25–52)

  1. 25.
    ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमःचर तथा स्थिर — दोनों स्वभाव वाले
  2. 26.
    ॐ चञ्चलाय नमःचंचल
  3. 27.
    ॐ नीलवर्णाय नमःनील वर्ण वाले
  4. 28.
    ॐ नित्याय नमःनित्य
  5. 29.
    ॐ नीलाञ्जननिभाय नमःनील अंजन के सदृश
  6. 30.
    ॐ नीलाम्बरविभूषाय नमःनील वस्त्र से विभूषित
  7. 31.
    ॐ निश्चलाय नमःनिश्चल
  8. 32.
    ॐ वेद्याय नमःजानने योग्य
  9. 33.
    ॐ विधिरूपाय नमःविधि अर्थात ब्रह्मा के रूप वाले
  10. 34.
    ॐ विरोधाधारभूमये नमःविरोध की आधार-भूमि
  11. 35.
    ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमःभेद उत्पन्न करने वाले स्वभाव वाले
  12. 36.
    ॐ वज्रदेहाय नमःवज्र सदृश देह वाले
  13. 37.
    ॐ वैराग्यदाय नमःवैराग्य देने वाले
  14. 38.
    ॐ वीराय नमःवीर
  15. 39.
    ॐ वीतरोगभयाय नमःरोग तथा भय से रहित
  16. 40.
    ॐ विपत्परम्परेशाय नमःविपत्तियों की परंपरा के ईश
  17. 41.
    ॐ विश्ववन्द्याय नमःविश्व द्वारा वंदित
  18. 42.
    ॐ गृध्नवाहाय नमःगृध्र अर्थात गिद्ध वाहन वाले
  19. 43.
    ॐ गूढाय नमःगूढ़
  20. 44.
    ॐ कूर्माङ्गाय नमःकूर्म सदृश अंगों वाले
  21. 45.
    ॐ कुरूपिणे नमःकुरूप
  22. 46.
    ॐ कुत्सिताय नमःकुत्सित; निंदित रूप वाले
  23. 47.
    ॐ गुणाढ्याय नमःगुणों से समृद्ध
  24. 48.
    ॐ गोचराय नमःगोचर-स्वरूप
  25. 49.
    ॐ अविद्यामूलनाशाय नमःअविद्या की जड़ का नाश करने वाले
  26. 50.
    ॐ विद्याऽविद्यास्वरूपिणे नमःविद्या तथा अविद्या — दोनों के स्वरूप
  27. 51.
    ॐ आयुष्यकारणाय नमःआयु के कारण
  28. 52.
    ॐ आपदुद्धर्त्रे नमःआपत्ति से उद्धार करने वाले

विष्णुभक्त, भानुपुत्र व फलदाता (नाम 53–80)

  1. 53.
    ॐ विष्णुभक्ताय नमःविष्णु के भक्त
  2. 54.
    ॐ वशिने नमःजितेंद्रिय; वश में रखने वाले
  3. 55.
    ॐ विविधागमवेदिने नमःविविध आगमों को जानने वाले
  4. 56.
    ॐ विधिस्तुत्याय नमःब्रह्मा द्वारा स्तुत्य
  5. 57.
    ॐ वन्द्याय नमःवंदनीय
  6. 58.
    ॐ विरूपाक्षाय नमःविरूप नेत्रों वाले
  7. 59.
    ॐ वरिष्ठाय नमःवरिष्ठ
  8. 60.
    ॐ गरिष्ठाय नमःगरिष्ठ; अत्यंत गुरु
  9. 61.
    ॐ वज्राङ्कुशधराय नमःवज्र तथा अंकुश धारण करने वाले
  10. 62.
    ॐ वरदाऽभयहस्ताय नमःवरद तथा अभय मुद्रा वाले हाथों से युक्त
  11. 63.
    ॐ वामनाय नमःवामन; लघु रूप वाले
  12. 64.
    ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमःज्येष्ठा नामक पत्नी सहित
  13. 65.
    ॐ श्रेष्ठाय नमःश्रेष्ठ
  14. 66.
    ॐ मितभाषिणे नमःमित भाषण करने वाले
  15. 67.
    ॐ कष्टौघनाशकर्याय नमःकष्टों के समूह का नाश करने वाले
  16. 68.
    ॐ पुष्टिदाय नमःपुष्टि देने वाले
  17. 69.
    ॐ स्तुत्याय नमःस्तुति योग्य
  18. 70.
    ॐ स्तोत्रगम्याय नमःस्तोत्र से प्राप्य
  19. 71.
    ॐ भक्तिवश्याय नमःभक्ति से वश में होने वाले
  20. 72.
    ॐ भानवे नमःभानु-स्वरूप
  21. 73.
    ॐ भानुपुत्राय नमःभानु अर्थात सूर्य के पुत्र
  22. 74.
    ॐ भव्याय नमःभव्य
  23. 75.
    ॐ पावनाय नमःपवित्र करने वाले
  24. 76.
    ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमःधनु मंडल में स्थित
  25. 77.
    ॐ धनदाय नमःधन देने वाले
  26. 78.
    ॐ धनुष्मते नमःधनुर्धारी
  27. 79.
    ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमःक्षीण प्रकाश वाली देह वाले
  28. 80.
    ॐ तामसाय नमःतामस

विरोधी युग्म — निन्द्य से वन्दनीय, क्रूर से भक्त-पोषक (नाम 81–108)

  1. 81.
    ॐ अशेषजनवन्द्याय नमःसमस्त जनों द्वारा वंदित
  2. 82.
    ॐ विशेषफलदायिने नमःविशेष फल देने वाले
  3. 83.
    ॐ वशीकृतजनेशाय नमःजन-अधिपतियों को वश में करने वाले
  4. 84.
    ॐ पशूनां पतये नमःपशुओं के पति
  5. 85.
    ॐ खेचराय नमःआकाश में विचरण करने वाले
  6. 86.
    ॐ खगेशाय नमःखगों के ईश
  7. 87.
    ॐ घननीलाम्बराय नमःसघन नील वस्त्र वाले
  8. 88.
    ॐ काठिन्यमानसाय नमःकठोर मन वाले
  9. 89.
    ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमःआर्यजनों के समूह द्वारा स्तुत्य
  10. 90.
    ॐ नीलच्छत्राय नमःनील छत्र वाले
  11. 91.
    ॐ नित्याय नमःनित्य
  12. 92.
    ॐ निर्गुणाय नमःनिर्गुण
  13. 93.
    ॐ गुणात्मने नमःगुणों की आत्मा वाले
  14. 94.
    ॐ निरामयाय नमःरोग-रहित
  15. 95.
    ॐ निन्द्याय नमःनिंदा किए जाने वाले
  16. 96.
    ॐ वन्दनीयाय नमःवंदनीय
  17. 97.
    ॐ धीराय नमःधीर
  18. 98.
    ॐ दिव्यदेहाय नमःदिव्य देह वाले
  19. 99.
    ॐ दीनार्तिहरणाय नमःदीनों की पीड़ा हरने वाले
  20. 100.
    ॐ दैन्यनाशकराय नमःदीनता का नाश करने वाले
  21. 101.
    ॐ आर्यजनगण्याय नमःआर्यजनों में गण्य
  22. 102.
    ॐ क्रूराय नमःक्रूर
  23. 103.
    ॐ क्रूरचेष्टाय नमःक्रूर चेष्टा वाले
  24. 104.
    ॐ कामक्रोधकराय नमःकाम तथा क्रोध उत्पन्न करने वाले
  25. 105.
    ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमःपत्नी व पुत्र से शत्रुता के कारण
  26. 106.
    ॐ परिपोषितभक्ताय नमःभक्तों का भली प्रकार पोषण करने वाले
  27. 107.
    ॐ परभीतिहराय नमःदूसरों से उत्पन्न भय हरने वाले
  28. 108.
    ॐ भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलदाय नमःभक्त-समूह के मन के अभीष्ट फल देने वाले

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • नाम 108 भक्तसङ्घमनोऽभीष्टफलद — भक्तों के मन का अभीष्ट फल देने वाले; सूची इसी पर समाप्त होती है।
    • नाम 67 कष्टौघनाशकर्य (कष्टों के समूह का नाश करने वाले) तथा नाम 52 आपदुद्धर्ता (आपत्ति से उद्धार करने वाले) साढ़े-साती व ढैया के संकल्प से पढ़े जाते हैं।
    • नाम 99 दीनार्तिहरण तथा 100 दैन्यनाशकर — दीनों की पीड़ा व दीनता का नाश करने वाले।
    • नाम 37 वैराग्यद शनि-उपासना का वह फल बताता है जो और कहीं नहीं मिलता — वैराग्य।
    • सहस्रनाम की तुलना में यह बहुत छोटी है (8–10 मिनट), अतः शनिवार को प्रतिदिन पढ़ने के लिए सुविधाजनक।

    कब करें पाठ

    शनिवार को — विशेषतः प्रातःकाल अथवा सायं दीप-दान के समयसाढ़े-साती तथा ढैया के काल में प्रतिदिनशनि की महादशा अथवा अंतर्दशा मेंशनि जयंती तथा शनि अमावस्या पर

    पाठ विधि

    आरंभ में "ॐ शं शनैश्चराय नमः" तीन बार कहें। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है — प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक नील पुष्प, काला तिल अथवा शमी-पत्र अर्पित करते जाना। शनि की पूजा में शमी-पत्र तथा सरसों के तेल का दीप विशेष माने गए हैं। यदि अर्चना संभव न हो तो काली माला लेकर जप करें; 108 नाम पूरे होने पर ठीक एक माला पूर्ण होती है। पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। परंपरा में इसके साथ शनैश्चराष्टकम् अथवा शनि चालीसा पढ़ा जाता है, और पाठ के बाद तिल, उड़द, गुड़, लोहा अथवा नील वस्त्र का दान किया जाता है — यह विधान शनैश्चराष्टकम् के पाँचवें श्लोक में स्वयं दिया गया है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथपारंपरिक शनि अष्टोत्तर शतनामावली — मूल ग्रंथ-संदर्भ अनिश्चित
    स्रोत परंपराstotranidhi.com — श्री शनि अष्टोत्तरशतनामावली 1 (आधार सूची; 108 नाम)। · sanskritdocuments.org (doc_z_misc_navagraha/shani108) — क्रम सहित स्वतंत्र पुष्टि; समानता 91.7% (108/108 नाम, नौ स्थानों पर अंतर)। यह स्रोत सूची से पहले एक बीज-मंत्र पंक्ति ("प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय") भी जोड़ता है, जो नाम नहीं है। · ⚠️ नौ भेदों में से छह लिप्यंतरण-दोष हैं, पाठभेद नहीं — "नीलाम्बरविभूशणाय" व "विशेशफलदायिने" (ष के स्थान पर श), "संघ" बनाम "सङ्घ", तथा अवग्रह की उपस्थिति/अनुपस्थिति। · ⚠️ तीन असली पाठभेद दर्ज: नाम 24 — शरतूणीरधारिणे बनाम शततूणीरधारिणे; नाम 26 — चञ्चलाय बनाम अचञ्चलाय; नाम 67 — कष्टौघनाशकर्याय बनाम कष्टौघनाशकर्त्रे। किसी को चुपचाप नहीं चुना गया। · ⚠️ नाम 26 पर आधार-स्रोत का "चञ्चल" कारण सहित रखा गया — सूची की विरोधी-युग्म शैली (निन्द्य/वन्दनीय, निर्गुण/गुणात्मा) तथा आसपास के नाम 25 "चरस्थिरस्वभाव" व 31 "निश्चल" उसी पाठ के अनुरूप हैं। · ⚠️ मूल ग्रंथ व अध्याय-क्रमांक किसी उपलब्ध स्रोत में नहीं मिला, अतः कोई ग्रंथ-नाम नहीं दिया गया। · ⚠️ शनि की एक दूसरी 108-वाचना भी प्रचलित है जो "सौरि" से आरंभ होती है और जिसके नाम इससे मेल नहीं खाते; यहाँ वही सूची आधार बनी जिसकी दो स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि हुई। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित (108/108)।
    रचयितापारंपरिक
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: मूल ग्रंथ किसी उपलब्ध स्रोत ने नहीं दिया, अतः यहाँ कोई ग्रंथ-नाम गढ़ा नहीं गया। दो स्वतंत्र स्रोतों में समानता 91.7% रही; नौ भेदों में से छह लिप्यंतरण-दोष हैं (ष के स्थान पर श, संघ/सङ्घ, अवग्रह की उपस्थिति) और तीन असली — नाम 24 (शरतूणीर/शततूणीर), नाम 26 (चञ्चल/अचञ्चल) तथा नाम 67 (नाशकर्य/नाशकर्तृ)। नाम 26 पर आधार-स्रोत का "चञ्चल" कारण सहित रखा गया है: पहली दृष्टि में "अचञ्चल" संगत लगता है, किंतु यह सूची बार-बार विरोधी नामों को अगल-बगल रखती है (निन्द्य/वन्दनीय, निर्गुण/गुणात्मा, विद्या/अविद्या), और नाम 25 "चरस्थिरस्वभाव" व नाम 31 "निश्चल" के बीच चञ्चल का आना उसी शैली के अनुरूप है। ध्यान दें कि शनि की एक दूसरी 108-वाचना भी है जो "सौरि" से आरंभ होती है और जिसके नाम इससे मेल नहीं खाते; यहाँ वही सूची आधार बनी जिसकी दो स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि हुई।

    देव परिचय

    श्री शनि देव

    Lord Shani (Saturn)

    शनि देव कर्म और न्याय के अधिष्ठाता हैं — सूर्यपुत्र, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

    देवता वर्गन्याय · कर्मफल · अनुशासन · धैर्य
    वाहनकौआ / गिद्ध
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    मुख्य मंत्रॐ शं शनैश्चराय नमः
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