श्री कामाख्या देवी आरती

śrī kāmākhyā devī āratī

Kamakhya Devi Aarti (Guwahati)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: कामाख्या शक्तिपीठ, नीलाचल पर्वत, गुवाहाटी (असम)

उद्भव / पृष्ठभूमि

माँ कामाख्या आदिशक्ति का तांत्रिक प्रधान स्वरूप हैं, जो गुवाहाटी (असम) के नीलाचल पर्वत पर विराजमान हैं। यह 51 शक्तिपीठों में सर्वप्रमुख माना जाता है, जहाँ देवी सती की योनि गिरी थी। यहाँ का "अम्बुबाची मेला" (आषाढ़) विश्व-प्रसिद्ध है।

आरती (लिरिक्स)

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जय कामाख्या माता, मैया जय कामाख्या। नीलाचल पर विराजे, शक्तिपीठ विख्याता॥

हे कामाख्या माता, आपकी जय हो! नीलाचल पर्वत पर विराजमान आप विख्यात शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री हैं।

सती-अंग जहँ गिरा, शक्तिपीठ कहलाया। तंत्र-मंत्र की देवी, जग में यश पाया॥

जहाँ सती का अंग गिरा वह शक्तिपीठ कहलाया; आप तंत्र-मंत्र की देवी हैं और जगत में आपका यश है।

अम्बुबाची मेला सजे, भक्त दूर से आते। मनोकामना लेकर, माँ के दर पर शीश नवाते॥

अम्बुबाची मेला सजता है, भक्त दूर-दूर से आते हैं; मनोकामना लेकर माँ के द्वार पर शीश झुकाते हैं।

इच्छा-पूर्ति करती, भय-संकट हरती। शरण पड़े की रक्षा, हे जग की महतारी॥

आप इच्छाएँ पूर्ण करती हैं और भय-संकट हरती हैं; हे जगत की माता, शरण में आए जनों की रक्षा करती हैं।

कामाख्या आरती, जो जन श्रद्धा गावे। मनवांछित फल पावे, शक्ति-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से कामाख्या माता की यह आरती गाता है, वह मनोवांछित फल तथा शक्ति-कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे कामाख्या माता, आपकी जय हो! नीलाचल पर्वत पर विराजमान आप विख्यात शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री हैं।
  2. जहाँ सती का अंग गिरा वह शक्तिपीठ कहलाया; आप तंत्र-मंत्र की देवी हैं और जगत में आपका यश है।
  3. अम्बुबाची मेला सजता है, भक्त दूर-दूर से आते हैं; मनोकामना लेकर माँ के द्वार पर शीश झुकाते हैं।
  4. आप इच्छाएँ पूर्ण करती हैं और भय-संकट हरती हैं; हे जगत की माता, शरण में आए जनों की रक्षा करती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से कामाख्या माता की यह आरती गाता है, वह मनोवांछित फल तथा शक्ति-कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • इच्छा-पूर्ति व मनोकामना-सिद्धि होती है।
  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • शक्ति-साधना व आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि व अष्टमी कोअम्बुबाची मेला (आषाढ़) परमंगलवार व शुक्रवार को

पाठ विधि

माँ कामाख्या के समक्ष लाल पुष्प, लाल चुनरी व दीप अर्पित करें, "जय माँ कामाख्या" का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। नवरात्रि व अम्बुबाची पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री कामाख्या देवी आरती — सामान्य प्रश्न

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