श्री महाकाली आरती

śrī mahākālī āratī

Mahakali Aarti (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)

समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: पारंपरिक महाकाली आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

माँ महाकाली आदिशक्ति का महाशक्तिशाली स्वरूप हैं, जो काल का भी नाश करने वाली व समस्त शक्तियों की अधिष्ठात्री हैं। यह प्रसिद्ध आरती "अम्बे तू है जगदम्बे काली" नवरात्रि, अष्टमी व देवी-पूजन में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परवाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

हे अम्बे, आप ही जगदम्बा काली हैं; हे खप्पर धारण करने वाली दुर्गा, आपकी जय हो! भारती (संसार) आपके ही गुण गाती है — हे माता, हम सब आपकी आरती उतारते हैं।

तेरे भक्त जनों पर माता, भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥

हे माता, आपके भक्तों पर भारी विपत्ति आ पड़ी है; हे माँ, सिंह की सवारी कर दानवों के दल पर टूट पड़िए (उनका नाश कीजिए)।

सौ-सौ सिंहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली। दुष्टों को तू ने संहारा, भक्तन की रखवाली॥

सैकड़ों सिंहों से भी अधिक बलशाली, आठ भुजाओं वाली; आपने दुष्टों का संहार किया और भक्तों की रक्षा की।

चण्ड-मुण्ड रक्तबीज को, क्षण में तूने मारा। भय-संकट से भक्तन का माँ, तूने किया उद्धारा॥

चण्ड, मुण्ड व रक्तबीज को आपने क्षणभर में मार डाला; हे माँ, आपने भक्तों का भय-संकट से उद्धार किया।

महाकाली की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, अभय-पद वह पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से महाकाली की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह अभय-पद प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे अम्बे, आप ही जगदम्बा काली हैं; हे खप्पर धारण करने वाली दुर्गा, आपकी जय हो! भारती (संसार) आपके ही गुण गाती है — हे माता, हम सब आपकी आरती उतारते हैं।
  2. हे माता, आपके भक्तों पर भारी विपत्ति आ पड़ी है; हे माँ, सिंह की सवारी कर दानवों के दल पर टूट पड़िए (उनका नाश कीजिए)।
  3. सैकड़ों सिंहों से भी अधिक बलशाली, आठ भुजाओं वाली; आपने दुष्टों का संहार किया और भक्तों की रक्षा की।
  4. चण्ड, मुण्ड व रक्तबीज को आपने क्षणभर में मार डाला; हे माँ, आपने भक्तों का भय-संकट से उद्धार किया।
  5. जो भक्त श्रद्धा से महाकाली की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह अभय-पद प्राप्त करता है।

लाभ

  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • संकट व विपत्ति का शीघ्र नाश होता है।
  • साहस, शक्ति व निर्भयता में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि व अष्टमी कोमंगलवार व अमावस्या कोरात्रि व संध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ महाकाली के समक्ष लाल/गुड़हल के पुष्प व दीप अर्पित करें, "जय माता दी" व "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। नवरात्रि की अष्टमी पर पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री महाकाली आरती — सामान्य प्रश्न

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