श्री महाकाली आरती

śrī mahākālī āratī

Mahakali Aarti (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)

समय
4–5 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नवरात्रि; अष्टमी; माता की चौकी और जागरण
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संकट-निवारण (Relief from troubles)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण

"अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली" माँ दुर्गा और काली की एक साथ स्तुति करने वाली आरती है। इसमें टेक और चार पद हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध भाव माँ-बेटे का रिश्ता है — "पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता": बेटा कपूत हो सकता है, माँ कुमाता नहीं होती।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "अम्बे तू है जगदम्बे काली" — प्रचलित दुर्गा-काली आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री महाकाली आरती
IASTśrī mahākālī āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"अम्बे तू है जगदम्बे काली" — प्रचलित दुर्गा-काली आरती
शुभ दिननवरात्रि; अष्टमी; माता की चौकी और जागरण
पाठ समय4–5 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती देवी को दो रूपों में एक साथ पुकारती है — जगदम्बा (जगत की माँ) और खप्पर वाली काली — और दोनों के बीच का पुल है माँ-बेटे का नाता।

रक्षा की पुकार (पद 1). "तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी; दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी" — भक्तों पर भारी संकट है, माँ सिंह पर सवार होकर दानवों पर टूट पड़ें। सौ-सौ सिंहों से बलशाली, अष्टभुजा वाली माँ दुष्टों को पल में संहारती हैं।

माँ का स्वभाव (पद 2). "माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता; पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता" — यह आरती की केंद्रीय पंक्ति है। संतान बिगड़ सकती है, माँ नहीं; इसलिए माँ सब पर करुणा दिखाती हैं और दुखियों के दुख दूर करती हैं।

निष्काम माँग (पद 3). "नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना" — भक्त कुछ नहीं माँगता, केवल माँ के मन में एक छोटा-सा कोना।

आरती का क्षण (पद 4). भक्त पूजा की थाली लेकर चरणों की शरण में खड़ा है और सिर पर वरद हाथ और भक्ति-रस की प्याली माँगता है।

आरती (लिरिक्स)

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अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

(टेक) हे अम्बे, तू ही जगदम्बा है, तू ही काली; हे खप्पर धारण करने वाली दुर्गे, तेरी जय हो। सारा भारत तेरे ही गुण गाता है — हे मैया, हम सब तेरी आरती उतारते हैं।

तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिंहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली, दुष्टों को पल में संहारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

हे माता, तेरे भक्तों पर भारी संकट आ पड़ा है; हे माँ, सिंह पर सवार होकर दानवों के दल पर टूट पड़ो। तू सौ-सौ सिंहों से अधिक बलशाली है, आठ भुजाओं वाली है, और दुष्टों का पल भर में संहार करती है।

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता। पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता॥ सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

इस जगत में माँ और बेटे का नाता बड़ा ही निर्मल है; पुत्र कपूत होते सुने हैं, पर माता कभी कुमाता नहीं सुनी। तू सब पर करुणा दिखाने वाली, अमृत बरसाने वाली है, और दुखियों के दुख दूर करती है।

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना। हम तो मांगें माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना॥ सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली, सतियों के सत को संवारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

हम धन-दौलत नहीं माँगते, न चाँदी, न सोना; हे माँ, हम तो तेरे मन में बस एक छोटा-सा कोना माँगते हैं। तू सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली है, और सतियों के सत को सँवारती है।

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली। वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥ माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली, भक्तों के कारज तू ही सारती। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

हम पूजा की थाली लेकर तेरे चरणों की शरण में खड़े हैं; हे संकट हरने वाली माँ, हमारे सिर पर वरदान देने वाला हाथ रख दो। हे अष्टभुजा वाली माँ, भक्ति-रस की प्याली भर दो — भक्तों के काम तू ही पूरे करती है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. (टेक) हे अम्बे, तू ही जगदम्बा है, तू ही काली; हे खप्पर धारण करने वाली दुर्गे, तेरी जय हो। सारा भारत तेरे ही गुण गाता है — हे मैया, हम सब तेरी आरती उतारते हैं।
  2. हे माता, तेरे भक्तों पर भारी संकट आ पड़ा है; हे माँ, सिंह पर सवार होकर दानवों के दल पर टूट पड़ो। तू सौ-सौ सिंहों से अधिक बलशाली है, आठ भुजाओं वाली है, और दुष्टों का पल भर में संहार करती है।
  3. इस जगत में माँ और बेटे का नाता बड़ा ही निर्मल है; पुत्र कपूत होते सुने हैं, पर माता कभी कुमाता नहीं सुनी। तू सब पर करुणा दिखाने वाली, अमृत बरसाने वाली है, और दुखियों के दुख दूर करती है।
  4. हम धन-दौलत नहीं माँगते, न चाँदी, न सोना; हे माँ, हम तो तेरे मन में बस एक छोटा-सा कोना माँगते हैं। तू सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली है, और सतियों के सत को सँवारती है।
  5. हम पूजा की थाली लेकर तेरे चरणों की शरण में खड़े हैं; हे संकट हरने वाली माँ, हमारे सिर पर वरदान देने वाला हाथ रख दो। हे अष्टभुजा वाली माँ, भक्ति-रस की प्याली भर दो — भक्तों के काम तू ही पूरे करती है।

लाभ

  • संकट के समय रक्षा की पुकार — "दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी"।
  • माँ की करुणा पर भरोसा — "पूत-कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता"।
  • निष्काम भक्ति का भाव — धन-दौलत नहीं, माँ के मन में एक छोटा-सा कोना।

कब करें पाठ

नवरात्रि के नौ दिनअष्टमी परमाता की चौकी और जागरण में

पाठ विधि

माँ के समक्ष घी का दीपक जलाकर पूजा की थाली सजाएँ — अंतिम पद स्वयं "ले पूजा की थाली" कहता है। टेक "अम्बे तू है जगदम्बे काली" आरंभ में गाएँ, और हर पद के अंत में "ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती" दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — अम्बे तू है जगदम्बे काली (आधार-पाठ, वर्तनी) · bhaktibharat.com — आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली · bhajansangam.in — अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती · bhajanganga.com — अम्बे तू है जगदम्बे काली · amarujala.com — अंबे तू है जगदंबे काली (नवरात्रि 2023)
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री महाकाली आरती — सामान्य प्रश्न

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