समय
5 मिनट
श्लोक/चौपाई
11
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शीतला सप्तमी व अष्टमी (बसोड़ा)
उद्देश्य:आरोग्य (Health)रक्षा (Protection)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण
"जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता" शीतला माता की प्रचलित आरती है, जो शीतला अष्टमी (बसोड़ा) पर गाई जाती है। इसके ग्यारह पद माता के दरबार का दृश्य रचते हैं और रोग-मुक्ति की बात करते हैं — "कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता"। अंत में छाप है — "दास नारायण"।
FAQ
श्री शीतला माता आरती — सामान्य प्रश्न
ग्यारह — "जय शीतला माता" से "दास नारायण कर जोरी माता" तक। द्रिक पंचांग, धर्मयात्रा और एमपंचांग — तीनों में ये सब हैं।
अंतिम पद में छाप है — "दास नारायण कर जोरी माता"। इसके अलावा रचयिता के बारे में किसी प्रकाशित प्रति में जानकारी नहीं।
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी (बसोड़ा) पर विशेष रूप से, और घर में किसी के रोगी होने पर।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार), धर्मयात्रा और एमपंचांग। ग्यारहों पद तीनों में हैं।
पर्व
