श्री शीतला माता आरती

śrī śītalā mātā āratī

Sheetla Mata Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: पारंपरिक शीतला माता आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

माँ शीतला आरोग्य व शीतलता प्रदान करने वाली देवी हैं, जो ज्वर, चेचक व रोगों से रक्षा करती हैं। यह आरती शीतला अष्टमी (बसोड़ा) व चैत्र मास में गाई जाती है, जिससे परिवार में आरोग्य, शीतलता व सुख-शांति आती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। आरोग्य की दाता तू, सब सुख की दाता॥

हे शीतला माता, आपकी जय हो! आप आरोग्य की दात्री तथा सब सुख देने वाली हैं।

गर्दभ पर असवारी, कर कलश सुहाता। सूप-झाड़ू-नीम धारे, शीतल तन-दाता॥

गर्दभ (गधे) पर सवारी करती हुई, हाथ में सुन्दर कलश धारण किए; सूप, झाड़ू व नीम धारण कर शरीर को शीतलता देने वाली हैं।

ज्वर-रोग सब हरती, चेचक से बचाती। शरण पड़े की रक्षा, माँ तू कर जाती॥

आप ज्वर व रोग हर लेती हैं और चेचक से बचाती हैं; हे माँ, शरण में आए हुए जनों की रक्षा करती हैं।

बासी भोग लगावें, बसोड़ा तुझे प्यारा। भक्तन के घर रहती, सुख-शीतल धारा॥

भक्त आपको बासी भोग लगाते हैं, बसोड़ा (शीतला अष्टमी) आपको प्रिय है; आप भक्तों के घर सुख-शीतलता की धारा बनकर रहती हैं।

शीतला माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। रोग-शोक सब मिटते, आरोग्य वह पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से शीतला माँ की यह आरती गाता है, उसके रोग-शोक मिट जाते हैं और वह आरोग्य प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे शीतला माता, आपकी जय हो! आप आरोग्य की दात्री तथा सब सुख देने वाली हैं।
  2. गर्दभ (गधे) पर सवारी करती हुई, हाथ में सुन्दर कलश धारण किए; सूप, झाड़ू व नीम धारण कर शरीर को शीतलता देने वाली हैं।
  3. आप ज्वर व रोग हर लेती हैं और चेचक से बचाती हैं; हे माँ, शरण में आए हुए जनों की रक्षा करती हैं।
  4. भक्त आपको बासी भोग लगाते हैं, बसोड़ा (शीतला अष्टमी) आपको प्रिय है; आप भक्तों के घर सुख-शीतलता की धारा बनकर रहती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से शीतला माँ की यह आरती गाता है, उसके रोग-शोक मिट जाते हैं और वह आरोग्य प्राप्त करता है।

लाभ

  • आरोग्य की प्राप्ति होकर रोग-व्याधि से रक्षा होती है।
  • परिवार में शीतलता, सुख व शांति बनी रहती है।
  • चेचक, ज्वर आदि रोगों के भय से मुक्ति मिलती है।

कब करें पाठ

शीतला अष्टमी (बसोड़ा) परचैत्र मास मेंप्रातः पूजा में

पाठ विधि

माँ शीतला के समक्ष (परंपरानुसार एक दिन पूर्व बना) बासी भोग, जल व दीप अर्पित करें और आरती गाएँ। शीतला अष्टमी पर इस दिन घर में ताज़ा भोजन न पकाने (बसोड़ा) की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री शीतला माता आरती — सामान्य प्रश्न

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