श्री शीतला माता आरती

śrī śītalā mātā āratī

Sheetla Mata Aarti (Jai Sheetla Mata)

समय
5 मिनट
श्लोक/चौपाई
11
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शीतला सप्तमी व अष्टमी (बसोड़ा)
उद्देश्य:आरोग्य (Health)रक्षा (Protection)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण

"जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता" शीतला माता की प्रचलित आरती है, जो शीतला अष्टमी (बसोड़ा) पर गाई जाती है। इसके ग्यारह पद माता के दरबार का दृश्य रचते हैं और रोग-मुक्ति की बात करते हैं — "कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता"। अंत में छाप है — "दास नारायण"।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता" — परंपरागत आरती; अंतिम पद में छाप "दास नारायण"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री शीतला माता आरती
IASTśrī śītalā mātā āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता" — परंपरागत आरती; अंतिम पद में छाप "दास नारायण"
शुभ दिनशीतला सप्तमी व अष्टमी (बसोड़ा)
पाठ समय5 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

शीतला माता रोग, विशेषकर चेचक, से रक्षा करने वाली देवी हैं; यह आरती उन्हें एक साथ राजरानी और रोगहारिणी — दोनों रूपों में गाती है।

दरबार (पद 2–5). रत्न-सिंहासन, श्वेत छत्र, ऋद्धि-सिद्धि चँवर डुलाती हैं; "विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता" — विष्णु खड़े होकर सेवा करते हैं, शिव और ब्रह्मा भी; इंद्र मृदंग बजाते हैं, चंद्र के हाथ में वीणा है, सूर्य ताल देते हैं और नारद गाते हैं।

सर्व-रूपा (पद 6). "ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता; भक्तन को सुख देती मातु पिता भ्राता" — वे ब्रह्म-रूप हैं, तीनों कालों को जानती हैं, और भक्तों के लिए माता, पिता और भाई — सब हैं।

रोग-मुक्ति (पद 8–9). "रोगों से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता; कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता" — रोगी शरण में आता है तो कोढ़ी को निर्मल देह और अंधे को आँखें मिलती हैं; बाँझ को पुत्र, दरिद्र की दरिद्रता कटती है।

छाप (पद 11). "दास नारायण कर जोरी माता, भक्ति आपनी दीजै और न कुछ माता" — दास नारायण हाथ जोड़कर केवल भक्ति माँगते हैं, और कुछ नहीं।

आरती (लिरिक्स)

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जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता॥

हे शीतला माता, हे मैया, आपकी जय हो! आप आदि-ज्योति महारानी हैं, सब फल देने वाली।

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता। ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें, जगमग छवि छाता॥

आप रत्नों के सिंहासन पर शोभित हैं, श्वेत छत्र सुंदर लगता है; ऋद्धि-सिद्धि चँवर डुलाती हैं, और जगमगाती छवि छाई है।

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता। वेद पुराण वरणत पार नहीं पाता॥

विष्णु खड़े होकर आपकी सेवा करते हैं, शिव और धाता (ब्रह्मा) भी सेवा करते हैं; वेद और पुराण वर्णन करते हैं, पर पार नहीं पाते।

इन्द्र मृदङ्ग बजावत चन्द्र वीणा हाथा। सूरज ताल बजावै नारद मुनि गाता॥

इंद्र मृदंग बजाते हैं, चंद्रमा के हाथ में वीणा है; सूर्य ताल बजाते हैं और नारद मुनि गाते हैं।

घण्टा शङ्ख शहनाई बाजै मन भाता। करै भक्त जन आरती लखि लखि हर्षाता॥

घंटा, शंख और शहनाई मनभावन बजते हैं; भक्तजन आरती करते हैं और (आपको) देख-देखकर हर्षित होते हैं।

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता। भक्तन को सुख देती मातु पिता भ्राता॥

आप ब्रह्म-रूप हैं, वरदान देने वाली हैं, तीनों कालों को जानने वाली हैं; भक्तों को सुख देने वाली आप ही उनकी माता, पिता और भाई हैं।

जो जन ध्यान लगावे प्रेम शक्ति पाता। सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता॥

जो जन आपका ध्यान लगाता है, वह प्रेम और शक्ति पाता है; सब मनोरथ पाता है और संसार-सागर तर जाता है।

रोगों से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता। कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता॥

रोगों से पीड़ित जो कोई आपकी शरण में आता है — कोढ़ी निर्मल काया पाता है और अंधा आँखें पाता है।

बांझ पुत्र को पावे दारिद्र कट जाता। ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछताता॥

बाँझ पुत्र पाती है, दरिद्रता कट जाती है; जो ऐसी माँ को नहीं भजता, वह सिर धुनकर पछताता है।

शीतल करती जन की तू ही है जग त्राता। उत्पत्ति बाला बिनाशन तू सब की माता॥

आप ही जन को शीतल करती हैं, आप ही जगत की रक्षक हैं; उत्पत्ति और विनाश करने वाली आप ही सबकी माता हैं।

दास नारायण कर जोरी माता। भक्ति आपनी दीजै और न कुछ माता॥

हे माता, दास नारायण हाथ जोड़कर (कहता है) — अपनी भक्ति दीजिए, और कुछ नहीं, माता।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे शीतला माता, हे मैया, आपकी जय हो! आप आदि-ज्योति महारानी हैं, सब फल देने वाली।
  2. आप रत्नों के सिंहासन पर शोभित हैं, श्वेत छत्र सुंदर लगता है; ऋद्धि-सिद्धि चँवर डुलाती हैं, और जगमगाती छवि छाई है।
  3. विष्णु खड़े होकर आपकी सेवा करते हैं, शिव और धाता (ब्रह्मा) भी सेवा करते हैं; वेद और पुराण वर्णन करते हैं, पर पार नहीं पाते।
  4. इंद्र मृदंग बजाते हैं, चंद्रमा के हाथ में वीणा है; सूर्य ताल बजाते हैं और नारद मुनि गाते हैं।
  5. घंटा, शंख और शहनाई मनभावन बजते हैं; भक्तजन आरती करते हैं और (आपको) देख-देखकर हर्षित होते हैं।
  6. आप ब्रह्म-रूप हैं, वरदान देने वाली हैं, तीनों कालों को जानने वाली हैं; भक्तों को सुख देने वाली आप ही उनकी माता, पिता और भाई हैं।
  7. जो जन आपका ध्यान लगाता है, वह प्रेम और शक्ति पाता है; सब मनोरथ पाता है और संसार-सागर तर जाता है।
  8. रोगों से पीड़ित जो कोई आपकी शरण में आता है — कोढ़ी निर्मल काया पाता है और अंधा आँखें पाता है।
  9. बाँझ पुत्र पाती है, दरिद्रता कट जाती है; जो ऐसी माँ को नहीं भजता, वह सिर धुनकर पछताता है।
  10. आप ही जन को शीतल करती हैं, आप ही जगत की रक्षक हैं; उत्पत्ति और विनाश करने वाली आप ही सबकी माता हैं।
  11. हे माता, दास नारायण हाथ जोड़कर (कहता है) — अपनी भक्ति दीजिए, और कुछ नहीं, माता।

लाभ

  • रोग-मुक्ति की कामना — "रोगों से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता"।
  • शीतला अष्टमी (बसोड़ा) की पूजा का समापन।
  • निष्काम भक्ति का भाव — "भक्ति आपनी दीजै और न कुछ माता"।

कब करें पाठ

शीतला सप्तमी और अष्टमी (बसोड़ा) परघर में किसी के रोगी होने परचैत्र मास में

पाठ विधि

शीतला माता के समक्ष दीपक जलाएँ और एक दिन पहले बना ठंडा भोजन भोग रखें (बसोड़ा की परंपरा)। टेक "ॐ जय शीतला माता" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — श्री शीतला माता की आरती (आधार-पाठ) · dharmyaatra.in — शीतला माता की आरती · hindi.mpanchang.com — श्री शीतला माता जी की आरती
रचयितादास नारायण (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
सभी पाठ देखें

श्री शीतला माता आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

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