श्री विंध्यवासिनी माता आरती

śrī viṃdhyavāsinī mātā āratī

Vindhyavasini Mata Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: पारंपरिक विंध्यवासिनी माता आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

माँ विंध्यवासिनी आदिशक्ति का स्वरूप हैं, जो विंध्याचल पर्वत (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) में विराजमान हैं; इन्हें देवी का पूर्ण व जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। यह आरती नवरात्रि व देवी-पूजन में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय विंध्यवासिनी माता, मैया जय विंध्यवासिनी माता। विंध्याचल पर विराजे, तू जग की दाता॥

हे विंध्यवासिनी माता, आपकी जय हो! विंध्याचल पर्वत पर विराजमान आप समस्त जगत को देने वाली हैं।

सिंह-वाहिनी शोभे, अष्टभुजा धारी। शस्त्र अनेक सजे माँ, रूप अति प्यारी॥

सिंह पर सवार होकर सुशोभित, आठ भुजाओं वाली; अनेक शस्त्रों से सजी हुई — हे माँ, आपका रूप अति प्यारा है।

शुम्भ-निशुम्भ संहारे, दुष्ट दलन कीन्हा। भक्तन को सुख देती, वर अभय का दीन्हा॥

आपने शुम्भ-निशुम्भ का संहार कर दुष्टों का दमन किया; भक्तों को सुख देती हैं और अभय का वरदान देती हैं।

जो जन शरण में आता, मनवांछित पाता। रोग-शोक भय हरती, हे जगत की माता॥

जो भक्त आपकी शरण में आता है, वह मनोवांछित फल पाता है; हे जगत की माता, आप रोग-शोक व भय हर लेती हैं।

विंध्यवासिनी आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, सुख-सम्पति पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से विंध्यवासिनी की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह सुख-सम्पत्ति प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे विंध्यवासिनी माता, आपकी जय हो! विंध्याचल पर्वत पर विराजमान आप समस्त जगत को देने वाली हैं।
  2. सिंह पर सवार होकर सुशोभित, आठ भुजाओं वाली; अनेक शस्त्रों से सजी हुई — हे माँ, आपका रूप अति प्यारा है।
  3. आपने शुम्भ-निशुम्भ का संहार कर दुष्टों का दमन किया; भक्तों को सुख देती हैं और अभय का वरदान देती हैं।
  4. जो भक्त आपकी शरण में आता है, वह मनोवांछित फल पाता है; हे जगत की माता, आप रोग-शोक व भय हर लेती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से विंध्यवासिनी की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह सुख-सम्पत्ति प्राप्त करता है।

लाभ

  • भय, शत्रु व संकट से रक्षा होती है।
  • श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • भक्ति, शक्ति व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि मेंमंगलवार व शुक्रवार कोप्रातः व संध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ विंध्यवासिनी के समक्ष लाल चुनरी, पुष्प व दीप अर्पित करें, "जय माता दी" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। नवरात्रि में जप-आरती विशेष फलदायी मानी जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री विंध्यवासिनी माता आरती — सामान्य प्रश्न

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