ॐ असतो मा सद्गमय

oṃ asato mā sadgamaya

Asato Ma Sadgamaya (Pavamana Mantra)

समय
40 सेकंड
जप संख्या
3
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
नित्य
उद्देश्य:ज्ञान (Knowledge)मोक्ष (Liberation)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र

ॐ असतो मा सद्गमय एक वैदिक मंत्र है — बृहदारण्यक उपनिषद् (1.3.28) — पवमान मंत्र। हे प्रभु! मुझे असत् (असत्य) से सत् (सत्य) की ओर ले चलो; अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो; मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो। परंपरा में इसे मुख्यतः ज्ञान, मोक्ष, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 3 बार।

परिचय

स्रोत: बृहदारण्यक उपनिषद् (1.3.28) — पवमान मंत्र

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ असतो मा सद्गमय
IASToṃ asato mā sadgamaya
प्रकारवैदिक मंत्र
मूल स्रोतबृहदारण्यक उपनिषद् (1.3.28) — पवमान मंत्र
जप संख्या3
मालाआवश्यक नहीं (प्रार्थना पाठ)
शुभ दिननित्य
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

ॐ असतो मा सद्गमय बृहदारण्यक उपनिषद् (1.3.28) — पवमान मंत्र के रूप में जाना जाता है। हे प्रभु! मुझे असत् (असत्य) से सत् (सत्य) की ओर ले चलो; अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो; मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो। ॐ शांति, शांति, शांति।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: असतो मा सद्गमय — असत्य से सत्य की ओर ले चलो; तमसो मा ज्योतिर्गमय — अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो; मृत्योर्मा अमृतं गमय — मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो; शान्तिः शान्तिः शान्तिः — त्रिविध शांति। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह वैदिक मंत्र है। वैदिक मंत्रों में स्वर का भी विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें गुरु के मुख से सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है।

परंपरा में इसका जप प्रायः 3 बार कहा जाता है, और इसके लिए माला आवश्यक नहीं (प्रार्थना पाठ)। इसके लिए नित्य विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

PDF डाउनलोड

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

oṃ asato mā sadgamaya | tamaso mā jyotirgamaya | mṛtyormā amṛtaṃ gamaya | oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ||

Om Asato Ma Sadgamaya, Tamaso Ma Jyotir-gamaya, Mrityor-ma Amritam Gamaya, Om Shantih Shantih Shantih.

उच्चारण मार्गदर्शन: "असतो मा सद्गमय", "तमसो मा ज्योतिर्गमय", "मृत्योर्मा अमृतं गमय" को सम लय में स्पष्ट बोलें। अंत में "शान्तिः" तीन बार शांत स्वर में।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

असतो मा सद्गमयअसत्य से सत्य की ओर ले चलो
तमसो मा ज्योतिर्गमयअंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो
मृत्योर्मा अमृतं गमयमृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो
शान्तिः शान्तिः शान्तिःत्रिविध शांति

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे प्रभु! मुझे असत् (असत्य) से सत् (सत्य) की ओर ले चलो; अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो; मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो। ॐ शांति, शांति, शांति।

लाभ

  • सत्य, ज्ञान व प्रकाश की ओर मन प्रेरित होता है।
  • अज्ञान व भय दूर होकर आत्म-बोध बढ़ता है।
  • मन को गहन शांति व आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 3 बार (एक माला)।

माला: आवश्यक नहीं (प्रार्थना पाठ)

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व ध्यान-काल

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्या प्रार्थना मेंध्यान से पूर्वसत्संग व पूजा में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शांत चित्त से आत्म-उन्नति की भावना रखते हुए इस मंत्र का पाठ करें। प्रायः प्रार्थना, ध्यान व सत्संग में इसका पाठ किया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराबृहदारण्यक उपनिषद् 1.3.28
अंतिम अद्यतनजून 2026

ॐ असतो मा सद्गमय — सामान्य प्रश्न