ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः

oṃ sarve bhavantu sukhinaḥ

Shanti Mantra (Sarve Bhavantu Sukhinah)

समय
40 सेकंड
जप संख्या
3
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
नित्य
उद्देश्य:शांति (Peace)कल्याण (Wellbeing)सद्भाव (Harmony)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सबके कल्याण की संस्कृत प्रार्थना है, जिसे लोकक्षेम मंत्र भी कहते हैं — "सब सुखी हों, सब निरोगी हों, सब शुभ देखें, कोई दुःख का भागी न हो"। इसे प्रायः पूजा, सत्संग या ध्यान के अंत में "ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः" के साथ बोला जाता है। इसका मूल ग्रंथ निश्चित नहीं है।

परिचय

स्रोत: लोकक्षेम प्रार्थना — मूल ग्रंथ निश्चित नहीं

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
IASToṃ sarve bhavantu sukhinaḥ
प्रकारसाधना मंत्र
मूल स्रोतलोकक्षेम प्रार्थना — मूल ग्रंथ निश्चित नहीं
जप संख्या3
मालाआवश्यक नहीं (शांति पाठ)
शुभ दिननित्य
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः में अपने लिए कुछ नहीं माँगा जाता — इसमें केवल "सब" हैं।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: सर्वे भवन्तु सुखिनः — सब सुखी हों; सर्वे सन्तु निरामयाः — सब निरोगी हों; सर्वे भद्राणि पश्यन्तु — सब कल्याण/शुभ देखें; मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत् — कोई दुःख का भागी न हो; शान्तिः शान्तिः शान्तिः — त्रिविध (आधिभौतिक, आधिदैविक, आध्यात्मिक) शांति।

मूल ग्रंथ. यह प्रार्थना प्रायः शांति-पाठ के साथ बोली जाती है, पर इसका मूल ग्रंथ निश्चित नहीं — कई जगह इसे उपनिषद् का बताया जाता है, जबकि प्रचलित उपनिषद्-शांति-पाठों में यह पंक्ति नहीं आती, और कुछ प्रकाशक इसे पुराणों से जोड़ते हैं। इसलिए यहाँ कोई एक ग्रंथ-नाम नहीं लिखा गया।

इसे नित्य, या पूजा और ध्यान के अंत में, शांत मन से तीन बार बोला जाता है।

मंत्र

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

oṃ sarve bhavantu sukhinaḥ sarve santu nirāmayāḥ | sarve bhadrāṇi paśyantu mā kaścid duḥkhabhāg bhavet || oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ||

Om Sarve Bhavantu Sukhinah Sarve Santu Niramayah, Sarve Bhadrani Pashyantu Ma Kashchid Duhkha-bhag Bhavet, Om Shantih Shantih Shantih.

उच्चारण मार्गदर्शन: "सर्वे भवन्तु सुखिनः", "निरामयाः", "भद्राणि पश्यन्तु" को स्पष्ट बोलें। अंत में "शान्तिः" तीन बार — क्रमशः धीमे व शांत स्वर में बोलें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

सर्वे भवन्तु सुखिनःसब सुखी हों
सर्वे सन्तु निरामयाःसब निरोगी हों
सर्वे भद्राणि पश्यन्तुसब कल्याण/शुभ देखें
मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्कोई दुःख का भागी न हो
शान्तिः शान्तिः शान्तिःत्रिविध (आधिभौतिक, आधिदैविक, आध्यात्मिक) शांति

अर्थ (हिन्दी)

  1. सब सुखी हों, सब निरोगी हों, सब कल्याण देखें, कोई भी दुःख का भागी न हो। ॐ शांति, शांति, शांति।

लाभ

  • मन में शांति, करुणा व सद्भाव का संचार होता है।
  • सबके कल्याण की भावना से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • तनाव कम होकर मन प्रसन्न रहता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 3 बार (एक माला)।

माला: आवश्यक नहीं (शांति पाठ)

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व पूजा-समापन

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्या प्रार्थना मेंपूजा/यज्ञ के समापन मेंध्यान से पूर्व या पश्चात

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शांत चित्त से सबके कल्याण की भावना रखते हुए इस मंत्र का पाठ करें। प्रायः पूजा, सत्संग या ध्यान के समापन में इसका पाठ किया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराhinduismfaq.com — ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः (लोकक्षेम मंत्र) · vandanabhakti.com — सर्वे भवन्तु सुखिनः
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः — सामान्य प्रश्न