समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शुक्रवार
उद्देश्य:प्रेम (Love)सुख-वैभव (Luxury)कला (Arts)
✓ संपूर्ण बीज मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः एक बीज मंत्र है — पारंपरिक शुक्र बीज मंत्र (नवग्रह)। शुक्र देव को नमस्कार। परंपरा में इसे मुख्यतः प्रेम, सुख-वैभव, कला के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः — सामान्य प्रश्न
यह प्रेम, सौंदर्य, कला व दाम्पत्य-सुख बढ़ाता है तथा कुंडली में शुक्र को बल प्रदान करता है।
शुक्रवार को प्रातः श्वेत पुष्प अर्पित करते हुए इसका जप विशेष लाभकारी है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए हीरा या स्फटिक माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व शुक्रवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — द्रां द्रीं द्रौं सः — शुक्र के बीजाक्षर; शुक्राय — शुक्र देव को; नमः — नमस्कार। पूरे मंत्र का भाव यह है: शुक्र देव को नमस्कार। "द्रां द्रीं द्रौं सः" शुक्र के बीजाक्षर हैं जो प्रेम, सुख-वैभव, कला व दाम्पत्य-सुख प्रदान करते हैं।
यह बीज मंत्र है, सामान्य नाम-जप नहीं। परंपरा में इस श्रेणी के मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इनमें उच्चारण, संख्या तथा नियम का विशेष विधान बताया जाता है। जिन्हें दीक्षा प्राप्त न हो, उनके लिए परंपरा इष्ट के नाम-जप, स्तुति व आरती का मार्ग सुझाती है — वह सर्वथा खुला कहा गया है।
"द्रां", "द्रीं", "द्रौं" को अनुस्वार सहित नासिक्य ध्वनि में स्पष्ट बोलें, "सः" का विसर्ग स्पष्ट रखें, फिर "शुक्राय नमः"। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
