समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शुक्रवार व अन्नपूर्णा जयंती
उद्देश्य:अन्न-समृद्धि (Nourishment)समृद्धि (Prosperity)घर की सुख-शांति (Household Wellbeing)
✓ संपूर्ण बीज मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे स्वाहा एक बीज मंत्र है — पारंपरिक अन्नपूर्णा (पार्वती) मंत्र। हे माहेश्वरी, अन्न से परिपूर्ण करने वाली देवी अन्नपूर्णा! आपको नमस्कार। परंपरा में इसे मुख्यतः अन्न-समृद्धि, समृद्धि, घर की सुख-शांति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं नमो भगवती माहेश्वरी अन्नपूर्णे स्वाहा — सामान्य प्रश्न
यह घर में अन्न, धन व समृद्धि बनाए रखता है, रसोई में बरकत लाता है और परिवार में सुख-शांति देता है।
अन्नपूर्णा देवी पार्वती का अन्न-दात्री स्वरूप हैं, जिन्हें भोजन व पोषण की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए स्फटिक माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व शुक्रवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — ह्रीं श्रीं क्लीं — शक्ति, समृद्धि व आकर्षण बीजाक्षर; भगवती माहेश्वरी — महेश्वर-पत्नी देवी (पार्वती); अन्नपूर्णे — अन्न से परिपूर्ण करने वाली देवी; देहि स्वाहा — प्रदान कीजिए — आहुति समर्पित। पूरे मंत्र का भाव यह है: हे माहेश्वरी, अन्न से परिपूर्ण करने वाली देवी अन्नपूर्णा! आपको नमस्कार। मुझे अन्न, समृद्धि व मेरी अभिलाषा प्रदान कीजिए।
यह बीज मंत्र है, सामान्य नाम-जप नहीं। परंपरा में इस श्रेणी के मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इनमें उच्चारण, संख्या तथा नियम का विशेष विधान बताया जाता है। जिन्हें दीक्षा प्राप्त न हो, उनके लिए परंपरा इष्ट के नाम-जप, स्तुति व आरती का मार्ग सुझाती है — वह सर्वथा खुला कहा गया है।
"ह्रीं", "श्रीं", "क्लीं" बीजाक्षरों को नासिक्य ध्वनि में बोलें; "अन्नपूर्णे", "स्वाहा" का उच्चारण स्पष्ट व दीर्घ रखें। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
