पितृ पक्ष के नियम

क्या करें, क्या न करें

पितृ पक्ष में तर्पण, श्राद्ध और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना मुख्य कर्म हैं। घर का माहौल शांत रखा जाता है और भोजन सादा व सात्त्विक। परंपरा में मांस, मदिरा तथा प्याज-लहसुन नहीं लिए जाते, और कई परिवार नई ख़रीद व मांगलिक कार्य टाल देते हैं।

संक्षेप में

पितृ पक्ष में तर्पण, श्राद्ध और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना मुख्य कर्म हैं। घर का माहौल शांत रखा जाता है और भोजन सादा व सात्त्विक। परंपरा में मांस, मदिरा तथा प्याज-लहसुन नहीं लिए जाते, और कई परिवार नई ख़रीद व मांगलिक कार्य टाल देते हैं।

क्या करें

इन दिनों जो करने को कहा गया है, उसका मतलब सीधा है — याद करना, और बाँटना।

  • तर्पण दीजिए। जल में काले तिल डालकर पितरों को अर्पित कीजिए।
  • ज़रूरतमंदों को भोजन कराइए। यह इस पूरे पक्ष का सबसे बड़ा काम माना गया है।
  • गाय, कौए और कुत्ते के लिए भी भोजन रखिए। परंपरा में इनका हिस्सा अलग से निकाला जाता है।
  • घर का माहौल शांत रखिए। ये स्मरण के दिन हैं।
  • सादा सात्त्विक भोजन बनाइए। घर में बना, बिना तामझाम का।
  • बड़ों की बात याद कीजिए। जो चले गए, उनके बारे में घर में बात होना भी स्मरण ही है।

क्या न करें

परंपरा में इन दिनों कुछ चीज़ों से दूरी रखी जाती है। नीचे वही लिखा है जो सचमुच चलन में है।

  • मांस और मदिरा से बचिए।
  • प्याज और लहसुन इन दिनों नहीं लिए जाते।
  • झूठ, अपमान और झगड़े से दूर रहिए। यह बात वैसे भी अच्छी है, पर इन दिनों इस पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है।
  • कई परिवार नई ख़रीद टाल देते हैं — नए कपड़े, वाहन, सोना।
  • मांगलिक कार्य जैसे विवाह और गृह प्रवेश भी प्रायः आगे रख दिए जाते हैं।

ये पिछली दो बातें नियम नहीं, चलन हैं। कहीं इनका सख़्ती से पालन होता है, कहीं नहीं।

भोजन के बारे में

इन दिनों भोजन को लेकर दो बातें कही जाती हैं — सादगी, और बाँटना।

सादगी का मतलब है घर में बना, सात्त्विक भोजन। बड़े आयोजन और तामझाम इन दिनों नहीं किए जाते।

और बाँटने का मतलब है कि जो बना, उसमें से ज़रूरतमंदों का हिस्सा पहले निकले। परंपरा में गाय, कौए और कुत्ते के लिए भी भोजन अलग रखा जाता है।

दान के बारे में

दान इन दिनों का मुख्य कर्म है, और इसमें सबसे ऊपर अन्न-दान रखा गया है — यानी किसी को भोजन कराना।

दान में यह नहीं देखा जाता कि कितना बड़ा है। जो आपकी सामर्थ्य में है, वही ठीक है। थोड़ा भी चलेगा।

ब्राह्मण, ज़रूरतमंद, कोई भी भूखा — परंपरा में सबको भोजन कराना इस पक्ष का काम कहा गया है।

इन नियमों के बारे में एक साफ़ बात

आपने पढ़ा होगा कि इनमें से कोई बात न मानी तो नुकसान होगा, या पितर नाराज़ हो जाएँगे। हम ऐसा नहीं कहेंगे।

ऊपर जो लिखा है, वह चलन है — यानी परंपरा में ऐसा किया जाता है। हमने वही लिखा है जो सचमुच चलन में है, और उसके साथ डर नहीं जोड़ा।

कुछ बातें ऐसी भी पढ़ने को मिलती हैं जिनके साथ सीधे नुकसान की बात जोड़ दी जाती है। हमने उन्हें इस पृष्ठ पर नहीं रखा, क्योंकि उनके पीछे हमें कोई भरोसे लायक आधार नहीं मिला।

यह कर्म कृतज्ञता का है। जो कर सकें, मन से कीजिए। जो न हो पाए, उसका बोझ मत रखिए।

इस वर्ष की तिथियाँ

पितृ पक्ष 2027 15 सितंबर 2027 से 29 सितंबर 2027 तक है। हर दिन की तिथि, श्राद्ध और मुहूर्त की पूरी तालिका मुख्य पृष्ठ पर है।

सभी श्राद्ध तिथियाँ देखें

स्रोत

  • srimandir.com — पितृ पक्ष में क्या करें व क्या न करें की प्रचलित सूची
  • indiatv.in · prabhatkhabar.com · statemirror.com — वही चलन, स्वतंत्र रूप से दर्ज
  • drikpanchang.com/shraddha/info/shraddha.html — तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण-भोज इस पक्ष के मुख्य कर्म
  • en.wikipedia.org/wiki/Pitru_Paksha — ब्राह्मण व गाय को भोजन; पक्ष में मांगलिक कार्य न करने का चलन

पितृ पक्ष के नियम — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न