पितृ पक्ष

Pitru Paksha · श्राद्ध पक्ष

पूर्वजों के स्मरण और कृतज्ञता के सोलह तिथियों का काल — श्राद्ध तिथियाँ, मुहूर्त और विधि।

परिचय

पितृ पक्ष वह सोलह तिथियों का काल है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं। यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर सर्वपितृ अमावस्या पर पूरा होता है। इन दिनों तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किए जाते हैं। भाव एक ही है — कृतज्ञता, और अपनों की याद।

पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण का पक्ष है। परंपरा में इन दिनों आप पिछली तीन पीढ़ियों को याद करते हैं — माता-पिता, दादा-दादी और उनसे पहले की पीढ़ी।

यह डर का काम नहीं है। जिन्होंने हमें बनाया, उन्हें साल में एक बार ठीक से याद कर लेना — बात बस इतनी सी है। जैसे घर में किसी बड़े की पुण्यतिथि पर सब इकट्ठा हो जाते हैं, वैसे ही।

इन दिनों तीन काम मुख्य हैं — तर्पण, पिंडदान और भोजन कराना। तीनों का भाव एक ही है: जो हमें देकर गए, उन्हें कुछ लौटाने की कोशिश।

पितृ पक्ष 2027 — सभी श्राद्ध तिथियाँ

15 सितंबर 2027 से 29 सितंबर 2027 तक · 15 दिन · समय नई दिल्ली के अनुसार

दिनांकवारतिथिश्राद्धकुतुपरोहिणअपराह्न काल
15 सितंबरबुधवारपूर्णिमापूर्णिमा श्राद्ध11:52–12:4112:41–13:3013:30–15:59
16 सितंबरबृहस्पतिवारप्रतिपदाप्रतिपदा श्राद्ध11:51–12:4112:41–13:3013:30–15:58
17 सितंबरशुक्रवारद्वितीयाद्वितीया श्राद्ध11:51–12:4012:40–13:2913:29–15:57
18 सितंबरशनिवारतृतीयातृतीया श्राद्ध11:51–12:4012:40–13:2913:29–15:56
19 सितंबररविवारचतुर्थीचतुर्थी श्राद्ध11:50–12:3912:39–13:2813:28–15:55
20 सितंबरसोमवारपंचमीपंचमी श्राद्ध · महा भरणी11:50–12:3912:39–13:2813:28–15:54
21 सितंबरमंगलवारषष्ठीषष्ठी श्राद्ध11:50–12:3912:39–13:2713:27–15:53
22 सितंबरबुधवारसप्तमीसप्तमी श्राद्ध11:50–12:3812:38–13:2713:27–15:53
23 सितंबरबृहस्पतिवारअष्टमीअष्टमी श्राद्ध11:49–12:3812:38–13:2613:26–15:52
24 सितंबरशुक्रवारनवमीनवमी श्राद्ध11:49–12:3712:37–13:2613:26–15:51
25 सितंबरशनिवारदशमीदशमी श्राद्ध11:49–12:3712:37–13:2513:25–15:50
26 सितंबररविवारएकादशीएकादशी श्राद्ध11:48–12:3612:36–13:2513:25–15:49
27 सितंबरसोमवारद्वादशीद्वादशी श्राद्ध · मघा श्राद्ध11:48–12:3612:36–13:2413:24–15:48
28 सितंबरमंगलवारचतुर्दशीत्रयोदशी श्राद्ध · चतुर्दशी श्राद्ध11:48–12:3612:36–13:2413:24–15:47
29 सितंबरबुधवारअमावस्यासर्वपितृ अमावस्या11:48–12:3512:35–13:2313:23–15:47

ये तिथियाँ और समय पंचांग से गणना किए गए हैं, किसी तालिका से नहीं लिए गए। दूर के शहरों में सूर्योदय बदलने से एक दिन का अंतर हो सकता है।

भाद्रपद या आश्विन — नाम दो, दिन एक

यहाँ एक बात अक्सर उलझाती है। कोई कहता है पितृ पक्ष भाद्रपद में आता है, कोई कहता है आश्विन में। सच यह है कि दोनों सही हैं।

फ़र्क़ महीने की गिनती का है, दिनों का नहीं। अमान्त गणना में — जो दक्षिण भारत में चलती है — यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष कहलाता है। पूर्णिमान्त गणना में, जो उत्तर भारत में चलती है, यही आश्विन कृष्ण पक्ष है।

दिन दोनों में वही के वही रहते हैं। तो अगर आपके पंचांग में दूसरा नाम लिखा हो, घबराइए मत — तारीख़ एक ही है।

सोलह तिथियाँ, पर दिन प्रायः पंद्रह

परंपरा में इसे "सोलह दिन" कहा जाता है। ठीक-ठीक कहें तो सोलह तिथियाँ होती हैं — पूर्णिमा, और उसके बाद कृष्ण पक्ष की पंद्रह तिथियाँ।

पर कैलेंडर पर दिन अक्सर पंद्रह ही निकलते हैं। कारण सीधा है। कभी कोई तिथि इतनी छोटी पड़ जाती है कि उसका अपना दिन नहीं बनता। तब उसका श्राद्ध पिछले दिन के साथ ही आ जाता है, और उस दिन दो श्राद्ध होते हैं।

इसीलिए नीचे की तालिका में आपको कुछ दिनों पर दो नाम दिखेंगे। यह चूक नहीं है — यही सही गणना है।

किस तिथि को किसका श्राद्ध

नियम एक ही है, और आसान है। श्राद्ध उस तिथि को होता है जिस तिथि पर मृत्यु हुई थी — अंग्रेज़ी तारीख़ पर नहीं।

मान लीजिए किसी का देहांत कृष्ण पक्ष की सप्तमी को हुआ था। तो उनका श्राद्ध हर साल पितृ पक्ष की सप्तमी को होगा, अंग्रेज़ी तारीख़ चाहे कोई भी पड़े।

और अगर तिथि याद ही न हो? तो सर्वपितृ अमावस्या है। यह आख़िरी दिन सबके लिए है — जिनकी तिथि मालूम नहीं, और जिनका कोई दिन छूट गया। इस बात की चिंता मत कीजिए, रास्ता खुला रखा गया है।

श्राद्ध का समय — कुतुप, रोहिण और अपराह्न

श्राद्ध दोपहर में किया जाता है, सुबह नहीं। इसके लिए दिन के तीन हिस्से बताए गए हैं, और वे एक के बाद एक आते हैं — कुतुप मुहूर्त, रोहिण मुहूर्त और अपराह्न काल।

इनमें अपराह्न काल सबसे लंबा है। श्राद्ध का मुख्य समय यही माना जाता है, और तर्पण प्रायः अंत में किया जाता है।

नीचे आपको हर दिन के तीनों समय मिलेंगे। ये सूर्योदय और सूर्यास्त से बनते हैं, इसलिए शहर बदलने पर थोड़े आगे-पीछे हो जाते हैं।

पितृ पक्ष में क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • पितरों को जल और तिल से तर्पण दीजिए।
  • ज़रूरतमंदों को भोजन कराइए।
  • गाय, कौए और कुत्ते के लिए भी भोजन रखिए।
  • घर का माहौल शांत रखिए।
  • सादा सात्त्विक भोजन बनाइए।

क्या न करें

  • मांस और मदिरा से बचिए।
  • झूठ, अपमान और झगड़े से दूर रहिए।
  • प्याज और लहसुन इन दिनों नहीं लिए जाते।
  • कई परिवार नई ख़रीद और मांगलिक कार्य टाल देते हैं।

विस्तार से जानें

पितृ मंत्र व स्तोत्र

श्राद्ध और तर्पण में पढ़े जाने वाले शास्त्रीय मंत्र — हर एक मूल ग्रंथ से मिलाया हुआ, अर्थ सहित।

ज्योतिष संबंध

कुंडली में पितृ दोष का संबंध भी पूर्वजों से जोड़ा जाता है। यह डर की बात नहीं — इसे अपनी जड़ों और बड़ों के प्रति कृतज्ञता की याद माना गया है।

ये केवल परंपरागत व ज्योतिषीय शैक्षिक संबंध हैं — व्यक्तिगत सलाह या भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत

  • en.wikipedia.org/wiki/Pitru_Paksha — सोलह तिथियों का पक्ष; तीन पीढ़ियों का स्मरण; अमान्त भाद्रपद व पूर्णिमान्त आश्विन; श्राद्ध मृत्यु-तिथि पर; सर्वपितृ अमावस्या सब पितरों के लिए
  • drikpanchang.com/shraddha/info/shraddha.html — तर्पण, पिंडदान व विश्वेदेव स्थापना; तिथि मालूम न होने पर सर्वपितृ अमावस्या; कुतुप, रोहिण व अपराह्न काल
  • drikpanchang.com — प्रति-वर्ष श्राद्ध तिथि तालिकाएँ (नई दिल्ली), जिनके विरुद्ध इस साइट का गणना-इंजन 2026–2029 के लिए जाँचा गया है
  • madhwafestivals.com — महा भरणी, मध्याष्टमी, अविधवा नवमी, यति (संन्यासी) द्वादशी व घात चतुर्दशी किसके लिए हैं

संक्षिप्त विवरण

आरंभ15 सितंबर 2027
समाप्ति29 सितंबर 2027
कुल दिन15
कुल तिथियाँ16
पक्षकृष्ण पक्ष
मासभाद्रपद (अमान्त) · आश्विन (पूर्णिमान्त)
अंतिम दिनसर्वपितृ अमावस्या
मुख्य समयअपराह्न काल

पितृ पक्ष — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न