श्राद्ध की विधि

Shraddha Vidhi · सामग्री, चरण व भोजन

श्राद्ध में पितरों का आवाहन करके उन्हें जल, तिल, जौ और अन्न अर्पित किया जाता है। फिर कुश पर पिंड रखे जाते हैं और भोजन कराया जाता है। सामग्री में कुश, काले तिल, जौ, जल, चावल और घी मुख्य हैं। यह कर्म दोपहर में, अपराह्न काल में किया जाता है।

संक्षेप में

श्राद्ध में पितरों का आवाहन करके उन्हें जल, तिल, जौ और अन्न अर्पित किया जाता है। फिर कुश पर पिंड रखे जाते हैं और भोजन कराया जाता है। सामग्री में कुश, काले तिल, जौ, जल, चावल और घी मुख्य हैं। यह कर्म दोपहर में, अपराह्न काल में किया जाता है।

विधि का ढाँचा

श्राद्ध की विधि सुनने में लंबी लगती है, पर उसका ढाँचा सीधा है। उसे तीन हिस्सों में समझिए।

पहले बुलाना — पितरों का आवाहन, और भोजन करने वालों को आमंत्रण। फिर अर्पण — जल, तिल, जौ, अन्न और पिंड। और अंत में विदा — भोजन, दान और आभार।

बीच के सारे विवरण इसी ढाँचे के भीतर आते हैं। इसलिए घबराइए मत, यह याद रखने लायक है।

सामग्री

शास्त्रों में जो सामग्री बार-बार आती है, वह यह है।

सामग्रीकिस काम आती है
कुश (दर्भ) घासआसन के लिए, और पिंड इसी पर रखे जाते हैं
काले तिलतर्पण के जल में; पितरों के अर्घ्य में मुख्य
जौअर्पण में बिखेरने के लिए
जलहाथ धोने, अर्घ्य और तर्पण के लिए
चावलपिंड बनाने और भोजन के लिए
घीचावल में मिलाने के लिए — हविष्य
पुष्प व धूपपूजन में

अर्घ्य में पितरों के लिए जौ के स्थान पर तिल लेने का विधान बताया गया है। छोटा अंतर है, पर ध्यान देने लायक।

चरण-दर-चरण

दोनों प्रमुख पाठ जिस क्रम पर सहमत हैं, वह यह है।

  • एक दिन पहले आमंत्रण — जिन्हें भोजन कराना है, उन्हें पहले ही निमंत्रित किया जाए।
  • आसन और जल — कुश का आसन दिया जाए, और हाथ धोने को जल।
  • बैठने की दिशा — देवताओं के निमित्त पूर्व की ओर, पितरों के निमित्त उत्तर की ओर।
  • आवाहन — मंत्रों से पितरों को बुलाया जाए।
  • जौ और तिल — अर्पण-पात्रों पर बिखेरे जाएँ।
  • हविष्य — घी में सना चावल अर्पित किया जाए।
  • पिंड — कुश पर तीन पिंड रखे जाएँ, तीन पीढ़ियों के लिए।
  • तर्पण — जल, तिल सहित।
  • दान और विदा — दक्षिणा दी जाए, आचमन हो, और आभार के साथ विदा।

परिक्रमा में भी अंतर बताया गया है — देवताओं के लिए सीधी ओर, और पितरों के लिए उल्टी ओर।

घर पर सरल रूप

ऊपर जो लिखा है, वह पूरी शास्त्रीय विधि है। उसमें मंत्र हैं, और वह प्रायः पुरोहित कराते हैं।

पर हर कोई वह पूरी विधि नहीं कर पाता, और परंपरा इसे जानती है। श्राद्ध शब्द ही श्रद्धा से बना है — यानी मुख्य चीज़ भाव है।

इसीलिए यह भी कहा गया कि सामर्थ्य न हो तो केवल जल से भी श्राद्ध हो सकता है।

घर पर करना हो तो इतना भी पर्याप्त माना जाता है। स्नान कीजिए, दक्षिण की ओर मुख करके जल में काले तिल डालकर तर्पण कीजिए। फिर किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराइए, और मन से उन्हें याद कीजिए।

विधिवत कराना चाहें तो पुरोहित से कराइए — वे क्रम और मंत्र जानते हैं।

भोजन और दान

भोजन इस कर्म का केंद्र है। शास्त्रों में जो अर्पित होता है वह हविष्य कहलाता है — घी में सना हुआ चावल, प्रायः किसी सादे व्यंजन के साथ।

आज की प्रथा में भोजन सादा और सात्त्विक बनाया जाता है, और घर में ही बनता है। बड़े आयोजन इन दिनों नहीं किए जाते।

दान में सबसे ऊपर अन्न-दान रखा गया है, यानी किसी को भोजन कराना। भोजन कराने के बाद दक्षिणा देने का विधान भी बताया गया है।

दान में मात्रा नहीं देखी जाती। जो आपकी सामर्थ्य में है, वही ठीक है।

श्राद्ध का समय

श्राद्ध दोपहर में किया जाता है, सुबह नहीं। इसके लिए तीन समय एक के बाद एक आते हैं — कुतुप मुहूर्त, रोहिण मुहूर्त और अपराह्न काल।

इनमें अपराह्न काल मुख्य माना जाता है। तर्पण प्रायः श्राद्ध के अंत में किया जाता है।

ये तीनों समय सूर्योदय और सूर्यास्त से बनते हैं, इसलिए हर दिन और हर शहर में थोड़े बदल जाते हैं। इस वर्ष हर दिन के समय मुख्य पृष्ठ की तालिका में हैं।

इसमें पढ़े जाने वाले मंत्र

इस वर्ष की तिथियाँ

पितृ पक्ष 2027 15 सितंबर 2027 से 29 सितंबर 2027 तक है। हर दिन की तिथि, श्राद्ध और मुहूर्त की पूरी तालिका मुख्य पृष्ठ पर है।

सभी श्राद्ध तिथियाँ देखें

स्रोत

  • wisdomlib.org — अग्नि पुराण, अध्याय 117 (श्राद्ध-कल्प): ब्राह्मण-निमंत्रण, विश्वेदेव व तीन पितरों का आवाहन, जौ व तिल का बिखेरना, कुश पर तीन पिंड, परिक्रमा की दिशा
  • wisdomlib.org — गरुड़ पुराण (दत्त अनुवाद), अध्याय XCIX: एक दिन पहले निमंत्रण, बैठने की दिशा (देव पूर्व, पितर उत्तर), कुश का आसन, अर्घ्य में जौ के स्थान पर तिल, हविष्य, दक्षिणा व विदा
  • drikpanchang.com/shraddha/info/shraddha.html — तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण-भोज; कुतुप, रोहिण व अपराह्न काल; तर्पण अंत में
  • en.wikipedia.org/wiki/Śrāddha — शब्द "श्रद्धा" से; आवश्यकता पर केवल जल से भी श्राद्ध
  • en.wikipedia.org/wiki/Pinda_(riceball) — पिंड पके चावल में घी व काले तिल मिलाकर

श्राद्ध की विधि — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न