समय
3–5 मिनट (पूरा तर्पण)
जप संख्या
3
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
पितृ पक्ष, अमावस्या व श्राद्ध के दिन
उद्देश्य:पितृ तर्पण (Tarpan)पितृ स्मरण (Remembering Ancestors)श्राद्ध कर्म (Shraddha Rites)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र
पितृ-तर्पण में चार शास्त्रीय मंत्र क्रम से पढ़े जाते हैं — "आगच्छन्तु मे पितरः" से पितरों को बुलाना (गरुड पुराण), "पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः" से तीन पीढ़ियों को स्वधा (शुक्ल यजुर्वेद 19.36), नाम लेकर तिल-जल देना (गोभिल गृह्यसूत्र), और अंत में "आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं जगत् तृप्यतु" से पूरे जगत की तृप्ति।
FAQ
तर्पण मंत्र — पितृ तर्पण के मंत्र — सामान्य प्रश्न
वैदिक मंत्र शुक्ल यजुर्वेद 19.36 है — "पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः॥" इसके साथ गरुड पुराण का आवाहन "आगच्छन्तु मे पितर इमं गृह्णन्त्वपोऽञ्जलिम्" और अंत में "आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं जगत् तृप्यतु" पढ़ा जाता है।
गरुड पुराण (आचार 213.130) तीन-तीन अंजलि देने को कहता है, और "आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं जगत् तृप्यतु" कहकर भी तीन अंजलि (213.135)।
गोभिल गृह्यसूत्र (4.2.34) का वाक्य है — "असावेतत्ते तिलोदकं ये चात्र त्वानु याँश्च त्वमनु तस्मै ते स्वधा", जिसमें "असौ" की जगह पिता का नाम लिया जाता है; फिर पितामह और प्रपितामह के लिए भी वैसे ही। गोत्र सहित विस्तृत वाक्य अपनी पारिवारिक पद्धति से लें।
"ब्रह्मा से लेकर घास के तिनके तक, यह सारा जगत तृप्त हो।" गरुड पुराण इसे संक्षेप-तर्पण कहता है — जब विस्तार से तर्पण न हो सके, तब यह कहकर तीन अंजलि देना।
गरुड पुराण (आचार 213.131) कहता है कि विधि जानने वाले तर्पण पात्र में कभी न करें। जल में खड़े होकर या स्थल पर कुश बिछाकर जल छोड़ने का विधान बताया गया है। घर पर करने का तरीका अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।
इस पर स्रोत एक जैसी बात नहीं कहते — कोई अंगूठे और तर्जनी के बीच से जल छोड़ने को कहता है, कोई दूसरा तरीका बताता है। इसलिए हम कोई एक निश्चित मुद्रा नहीं बता रहे; अपने परिवार की परंपरा देखें या किसी जानकार से पूछें।
पर्व
