शब्द का अर्थ
श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है, जिसका अर्थ है विश्वास और भाव। यानी श्राद्ध वह कर्म है जो श्रद्धा से किया जाए।
यह बात ध्यान देने लायक है। नाम में ही यह लिखा है कि यहाँ मुख्य चीज़ भाव है, आयोजन नहीं।
इसीलिए परंपरा में यह भी कहा गया कि सामर्थ्य न हो तो केवल जल से भी श्राद्ध हो सकता है।
श्राद्ध में क्या किया जाता है
श्राद्ध कोई एक काम नहीं, कुछ कर्मों का समूह है। मुख्य रूप से चार चीज़ें होती हैं।
- तर्पण — जल में काले तिल, जौ और कुश डालकर पितरों को अर्पित करना।
- पिंडदान — पके चावल में घी और काले तिल मिलाकर बनाए गए पिंड अर्पित करना।
- भोजन — ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना।
- विश्वेदेव स्थापना — श्राद्ध का आरंभिक अंग, जो विधिवत श्राद्ध में किया जाता है।
श्राद्ध दोपहर में किया जाता है। अपराह्न काल इसका निर्धारित समय बताया गया है।
श्राद्ध क्यों किया जाता है
इसका उत्तर सीधा है — कृतज्ञता। जिन्होंने हमें बनाया, उन्हें याद करना और उनका मान रखना।
परंपरा में यह कर्म पिछली तीन पीढ़ियों के लिए किया जाता है — पिता, दादा और परदादा, तथा उनके साथ की स्त्रियाँ। पिंडदान में इन्हीं तीनों का स्मरण होता है।
इसके पीछे एक और भाव है — परिवार की डोर बनी रहे। जो चले गए, वे भुला न दिए जाएँ; और जो आगे आएँगे, उन्हें भी यह याद रहे।
यह डर का कर्म नहीं है। इसे ऐसे समझिए जैसे घर में किसी बड़े की पुण्यतिथि पर सब इकट्ठा होते हैं — बस उसका एक व्यवस्थित रूप।
श्राद्ध के कितने प्रकार हैं
यहाँ एक दिलचस्प बात है, और हम इसे छिपाएँगे नहीं। अलग-अलग ग्रंथ अलग-अलग गिनती देते हैं।
| ग्रंथ | प्रकार |
|---|---|
| मत्स्य पुराण | तीन — नित्य, नैमित्तिक, काम्य |
| यम स्मृति | पाँच — ऊपर के तीन, और वृद्धि (नांदी) तथा पार्वण |
| मार्कण्डेय पुराण | छह — नित्य, आभ्युदयिक, एकोद्दिष्ट, सपिंडीकरण, पार्वण, काम्य |
तो "श्राद्ध के कितने प्रकार हैं" का एक ही उत्तर नहीं है। यह इस पर निर्भर करता है कि आप कौन सा ग्रंथ देख रहे हैं।
इन प्रकारों का मतलब क्या है
नाम अलग-अलग हैं, पर जिन कर्मों की बात हो रही है उन पर स्रोत काफ़ी हद तक सहमत हैं।
- नित्य — नियमित रूप से किया जाने वाला, जैसे अमावस्या पर।
- एकोद्दिष्ट (नैमित्तिक) — किसी एक व्यक्ति के लिए, मृत्यु के बाद।
- सपिंडीकरण — वह संस्कार जिससे मृतक को पितरों में सम्मिलित किया जाता है।
- पार्वण — नियत पर्व-तिथियों पर किया जाने वाला। पितृ पक्ष का श्राद्ध यही है।
- काम्य — किसी कामना से किया गया।
- वृद्धि / आभ्युदयिक — विवाह या संतान-जन्म जैसे मंगल अवसरों पर, जब पितरों का आशीर्वाद लिया जाता है।
पितृ पक्ष का श्राद्ध कौन सा है
पितृ पक्ष में जो श्राद्ध होता है, वह पार्वण श्राद्ध है — यानी नियत तिथि पर किया जाने वाला।
यही कारण है कि यह मृत्यु की तिथि से चलता है, अंग्रेज़ी तारीख़ से नहीं। हर साल वही तिथि, चाहे तारीख़ बदलती रहे।
और यह भी ध्यान रखिए कि श्राद्ध केवल पितृ पक्ष में ही नहीं होता। परंपरा में इसके लिए छियानबे अवसर बताए गए हैं, जिनमें साल की हर अमावस्या भी है।
