सर्वपितृ अमावस्या

Sarva Pitru Amavasya · महालय अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। परंपरा में यह सब पितरों का दिन माना गया है — उनका भी जिनकी मृत्यु-तिथि याद नहीं, और उनका भी जिनका कोई दिन छूट गया हो। इसे महालय अमावस्या भी कहते हैं।

संक्षेप में

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। परंपरा में यह सब पितरों का दिन माना गया है — उनका भी जिनकी मृत्यु-तिथि याद नहीं, और उनका भी जिनका कोई दिन छूट गया हो। इसे महालय अमावस्या भी कहते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या क्या है

पितृ पक्ष अमावस्या पर पूरा होता है, और वही दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है। इसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है।

बाक़ी दिनों की एक-एक तिथि होती है और हर तिथि किसी न किसी के लिए। यह दिन अलग है — यह सबके लिए है। इसीलिए इसका नाम ही "सर्व पितृ" है।

पूरे पक्ष में यही दिन सबसे बड़ा माना जाता है, और सबसे ज़्यादा लोग इसी दिन श्राद्ध करते हैं।

यह दिन किसके लिए है

तीन तरह के लोग इस दिन को सबसे ज़्यादा काम में लाते हैं।

  • जिनकी मृत्यु-तिथि मालूम नहीं। पुराने समय में भी सबको हर तिथि याद नहीं रहती थी। इसीलिए यह रास्ता रखा गया।
  • जिनका दिन छूट गया। किसी कारण से अपनी तिथि पर श्राद्ध न हो पाया हो, तो इस दिन कर सकते हैं।
  • जो सब पितरों को एक साथ स्मरण करना चाहते हैं। परिवार में जो भी गए, सबके लिए एक दिन।

अगर आपसे कोई दिन छूट गया है, तो उसे लेकर मन में बोझ मत रखिए। यह दिन इसी के लिए है।

इस दिन क्या किया जाता है

जो बाक़ी दिनों में होता है, वही इस दिन भी — बस भाव यह रहता है कि सब पितरों को एक साथ स्मरण कर रहे हैं।

  • तर्पण — जल में काले तिल डालकर पितरों को अर्पण।
  • पिंडदान — चावल के पिंड, जिनमें घी और काले तिल मिलाए जाते हैं।
  • भोजन — ज़रूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन कराना।
  • गाय, कौए और कुत्ते के लिए भी भोजन रखने की परंपरा है।

तर्पण प्रायः श्राद्ध के अंत में किया जाता है।

इस दिन का समय

श्राद्ध दोपहर में होता है, सुबह नहीं। इसके लिए दिन के तीन हिस्से बताए गए हैं — कुतुप मुहूर्त, रोहिण मुहूर्त और अपराह्न काल।

तीनों एक के बाद एक आते हैं। इनमें अपराह्न काल सबसे लंबा है और मुख्य समय यही माना जाता है।

इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या किस दिन है और उस दिन ये तीनों समय क्या हैं — यह मुख्य पृष्ठ की तालिका में सबसे नीचे की पंक्ति में मिलेगा।

हर अमावस्या पितरों की है

एक बात जो कम लोग जानते हैं — श्राद्ध केवल पितृ पक्ष में ही नहीं होता।

परंपरा में श्राद्ध के लिए छियानबे अवसर बताए गए हैं। इनमें पितृ पक्ष के दिन हैं, सूर्य की संक्रांति के दिन हैं, और साल की हर अमावस्या भी है।

यानी हर महीने की अमावस्या पितरों के तर्पण का दिन मानी जाती है। सर्वपितृ अमावस्या उन सबमें सबसे बड़ी है, क्योंकि वह पूरे पितृ पक्ष का समापन भी है।

तो अगर पितृ पक्ष निकल गया हो, तब भी हर महीने एक दिन आता है जब आप पितरों को जल दे सकते हैं।

छियानबे अवसरों का पूरा पालन आज के समय में कठिन है, यह बात स्रोत स्वयं कहते हैं। इसीलिए पितृ पक्ष और अमावस्या — ये दो ही सबसे अधिक निभाए जाते हैं।

एक बात मन की

बहुत लोग इस दिन एक चुपचाप बोझ लेकर आते हैं — कि तिथि याद नहीं रही, या उस साल कुछ नहीं कर पाए, या घर से दूर थे।

परंपरा ने यह दिन ठीक इसीलिए रखा है। जो छूट गया, उसके लिए रास्ता पहले से बना हुआ है।

याद रखिए, यह कर्म कृतज्ञता का है। जिन्होंने आपको बनाया, उन्हें साल में एक बार ठीक से याद कर लेना — बात बस इतनी सी है।

इस वर्ष की तिथियाँ

पितृ पक्ष 2027 15 सितंबर 2027 से 29 सितंबर 2027 तक है। हर दिन की तिथि, श्राद्ध और मुहूर्त की पूरी तालिका मुख्य पृष्ठ पर है।

सभी श्राद्ध तिथियाँ देखें

स्रोत

  • en.wikipedia.org/wiki/Śrāddha — शास्त्रों में श्राद्ध के 96 अवसर बताए गए हैं, जिनका पूर्ण पालन कठिन है
  • drikpanchang.com/shraddha/info/shraddha-days.html — उन 96 अवसरों में वर्ष की 12 अमावस्याएँ, संक्रांतियाँ तथा पितृ पक्ष के दिन सम्मिलित हैं
  • en.wikipedia.org/wiki/Pitru_Paksha — पक्ष का समापन अमावस्या पर; सर्वपितृ अमावस्या सब पितरों के लिए, चाहे मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो
  • drikpanchang.com/shraddha/info/shraddha.html — मृत्यु-तिथि मालूम न होने पर सर्वपितृ अमावस्या; तर्पण, पिंडदान व भोजन; कुतुप, रोहिण व अपराह्न काल
  • madhwafestivals.com — किसी भी दिन श्राद्ध न हो पाया हो तो अंततः अमावस्या पर किया जा सकता है
  • en.wikipedia.org/wiki/Pinda_(riceball) — पिंड पके चावल में घी व काले तिल मिलाकर बनाए जाते हैं

सर्वपितृ अमावस्या — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न