श्री रामाष्टकम्

śrī rāmāṣṭakam

Shri Ramashtakam

समय
3–4 मिनट
श्लोक
9
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
राम नवमी; चैत्र नवरात्रि; गुरुवार
उद्देश्य:भय-नाश (Freedom from Fear)रक्षा (Protection)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)

श्री रामाष्टकम् आठ श्लोकों की स्तुति है जिसका हर श्लोक "नमामि राममीश्वरम्" पर समाप्त होता है। यह "कृतार्तदेववन्दनं" से आरंभ होकर आठ श्लोकों में पूरी रामकथा क्रम से कह देता है। रचयिता श्रीपरमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द हैं; पाठ 3–4 मिनट का है।

परिचय

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान विष्णु के अवतार और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।

स्रोत: श्रीपरमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द विरचित — आठ श्लोक तथा फलश्रुति सहित

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री रामाष्टकम्
IASTśrī rāmāṣṭakam
देवताश्री राम
मूल स्रोतश्रीपरमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द विरचित — आठ श्लोक तथा फलश्रुति सहित
शुभ दिनराम नवमी; चैत्र नवरात्रि; गुरुवार
पाठ समय3–4 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री रामाष्टकम् आठ श्लोकों की छोटी स्तुति है और इसका हर श्लोक उसी एक पंक्ति पर लौटता है — "नमामि राममीश्वरम्", अर्थात "मैं उन राम-रूपी ईश्वर को नमन करता हूँ।" रचयिता का नाम पाठ के अंत में स्वयं दर्ज है — श्रीपरमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द।

इसकी सबसे उल्लेखनीय बात इसकी बनावट है। यह आठ-आठ अक्षरों के छोटे चरणों में रचा गया है और चारों चरण तुकांत हैं — *वन्दनं, नन्दनम्, चन्दनं, ईश्वरम्*। यही लय इसे उन थोड़े अष्टकों में रखती है जो एक-दो बार सुनने पर ही कंठस्थ हो जाते हैं।

पर असली बात संरचना में है: आठ श्लोक आठ गुण नहीं, पूरी रामकथा क्रम से कहते हैं। श्लोक 1 जन्म व सूर्यवंश; श्लोक 2 विश्वामित्र का यज्ञ, अहल्या-उद्धार ("शिलाविपत्तिहारक") और धनुष-भंग; श्लोक 3 पिता के वचन का पालन और वनगमन; श्लोक 4 मारीच-वध, जटायु-मोक्ष और सुग्रीव से मिलन; श्लोक 5 वानरों से मैत्री, सेतुबंध और रावण-कुल का संहार; श्लोक 6 देवों का हर्ष और वानरों की मनोकामना-पूर्ति; श्लोक 7 शत्रु-मुक्त राज्य की रक्षा और प्रजा के कष्टों का नाश; श्लोक 8 समापन। यानी बत्तीस चरणों में पूरा रामायण।

अंतिम श्लोक की एक पंक्ति ध्यान देने योग्य है — जगत्तमोदिवाकरम्, अर्थात "जगत् के अंधकार के लिए सूर्य"। यह उपमा सूर्यवंश से जुड़ती है, जिसका उल्लेख पहले ही श्लोक में दिनेशवंशनन्दनम् के रूप में हुआ था। स्तुति जहाँ से आरंभ हुई थी, वहीं आकर वृत्त पूरा करती है।

फलश्रुति भी संक्षिप्त और सीधी है: जो एकाग्रचित्त होकर निरंतर इस रघूत्तम-अष्टक का पाठ करता है, वह भव से उत्पन्न भय को नहीं पाता।

संपूर्ण अष्टकम्

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कृतार्तदेववन्दनं दिनेशवंशनन्दनम्। सुशोभिभालचन्दनं नमामि राममीश्वरम्॥१॥

जिन्होंने पीड़ित देवताओं की वंदना स्वीकार की, जो सूर्यवंश के आनंद हैं, और जिनके ललाट पर चंदन सुशोभित है — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

मुनीन्द्रयज्ञकारकं शिलाविपत्तिहारकम्। महाधनुर्विदारकं नमामि राममीश्वरम्॥२॥

जिन्होंने मुनीन्द्र विश्वामित्र का यज्ञ सम्पन्न कराया, जिन्होंने शिला बनी अहल्या की विपत्ति हरी, और जिन्होंने महान धनुष (शिव-धनुष) को तोड़ा — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

स्वतातवाक्यकारिणं तपोवने विहारिणम्। करे सुचापधारिणं नमामि राममीश्वरम्॥३॥

जिन्होंने अपने पिता के वचन का पालन किया, जो तपोवन में विचरण करते रहे, और जो हाथ में सुंदर धनुष धारण किए हैं — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

कुरङ्गमुक्तसायकं जटायुमोक्षदायकम्। प्रविद्धकीशनायकं नमामि राममीश्वरम्॥४॥

जिन्होंने मृग (मारीच) पर बाण छोड़ा, जिन्होंने जटायु को मोक्ष दिया, और जिन्होंने वानर-नायक सुग्रीव को प्रतिष्ठित किया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

प्लवङ्गसङ्गसम्मतिं निबद्धनिम्नगापतिम्। दशास्यवंशसङ्क्षतिं नमामि राममीश्वरम्॥५॥

जिन्होंने वानरों का संग स्वीकार किया, जिन्होंने नदियों के पति समुद्र को (सेतु से) बाँधा, और जिन्होंने दशमुख रावण के समूचे वंश का क्षय किया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

विदीनदेवहर्षणं कपीप्सितार्थवर्षणम्। स्वबन्धुशोककर्षणं नमामि राममीश्वरम्॥६॥

जिन्होंने दीन हो चुके देवताओं को हर्षित किया, जिन्होंने वानरों की इच्छित वस्तुओं की वर्षा की, और जिन्होंने अपने बंधुओं का शोक दूर किया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

गतारिराज्यरक्षणं प्रजाजनार्तिभक्षणम्। कृतास्तमोहलक्षणं नमामि राममीश्वरम्॥७॥

जिन्होंने शत्रु-मुक्त हुए राज्य की रक्षा की, जिन्होंने प्रजाजनों की पीड़ा का भक्षण किया, और जिन्होंने मोह के लक्षण को अस्त कर दिया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

हृताखिलाचलाभरं स्वधामनीतनागरम्। जगत्तमोदिवाकरं नमामि राममीश्वरम्॥८॥

जिन्होंने पृथ्वी का समस्त भार हर लिया, जो नगरवासियों को अपने धाम ले गए, और जो जगत् के अंधकार के लिए सूर्य के समान हैं — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।

॥ फलश्रुति ॥ इदं समाहितात्मना नरो रघूत्तमाष्टकम्। पठन्निरन्तरं भयं भवोद्भवं न विन्दते॥९॥

फलश्रुति: जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर निरंतर इस रघूत्तम-अष्टक का पाठ करता है, वह संसार से उत्पन्न होने वाले भय को नहीं पाता।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. जिन्होंने पीड़ित देवताओं की वंदना स्वीकार की, जो सूर्यवंश के आनंद हैं, और जिनके ललाट पर चंदन सुशोभित है — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  2. जिन्होंने मुनीन्द्र विश्वामित्र का यज्ञ सम्पन्न कराया, जिन्होंने शिला बनी अहल्या की विपत्ति हरी, और जिन्होंने महान धनुष (शिव-धनुष) को तोड़ा — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  3. जिन्होंने अपने पिता के वचन का पालन किया, जो तपोवन में विचरण करते रहे, और जो हाथ में सुंदर धनुष धारण किए हैं — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  4. जिन्होंने मृग (मारीच) पर बाण छोड़ा, जिन्होंने जटायु को मोक्ष दिया, और जिन्होंने वानर-नायक सुग्रीव को प्रतिष्ठित किया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  5. जिन्होंने वानरों का संग स्वीकार किया, जिन्होंने नदियों के पति समुद्र को (सेतु से) बाँधा, और जिन्होंने दशमुख रावण के समूचे वंश का क्षय किया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  6. जिन्होंने दीन हो चुके देवताओं को हर्षित किया, जिन्होंने वानरों की इच्छित वस्तुओं की वर्षा की, और जिन्होंने अपने बंधुओं का शोक दूर किया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  7. जिन्होंने शत्रु-मुक्त हुए राज्य की रक्षा की, जिन्होंने प्रजाजनों की पीड़ा का भक्षण किया, और जिन्होंने मोह के लक्षण को अस्त कर दिया — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  8. जिन्होंने पृथ्वी का समस्त भार हर लिया, जो नगरवासियों को अपने धाम ले गए, और जो जगत् के अंधकार के लिए सूर्य के समान हैं — उन राम-रूपी ईश्वर को मैं नमन करता हूँ।
  9. फलश्रुति: जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर निरंतर इस रघूत्तम-अष्टक का पाठ करता है, वह संसार से उत्पन्न होने वाले भय को नहीं पाता।

लाभ

  • फलश्रुति के अनुसार निरंतर पाठ करने वाला संसार-जनित भय से मुक्त रहता है।
  • आठ श्लोकों में पूरी रामकथा क्रम से आ जाती है, इसलिए पाठ के साथ राम-चरित का स्मरण भी हो जाता है।
  • आठ-आठ अक्षरों के तुकांत चरणों के कारण यह कंठस्थ करने में सबसे सरल अष्टकों में है — बालकों को सिखाने के लिए उपयुक्त।
  • राम नवमी व चैत्र नवरात्रि में रामचरितमानस के दीर्घ पाठ के साथ अथवा उसके स्थान पर संक्षिप्त नित्य-नियम के रूप में पढ़ा जाता है।

कब करें पाठ

राम नवमी परचैत्र नवरात्रि मेंरामचरितमानस अथवा सुंदरकाण्ड के पाठ से पूर्वभय अथवा संकट की स्थिति में

पाठ विधि

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रीराम-दरबार के चित्र अथवा प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर आसन पर बैठें। पहले "ॐ श्री रामाय नमः" तीन बार कहकर आरंभ करें। यह छोटे तुकांत चरणों में है, अतः इसे लयबद्ध रूप से गाकर पढ़ना ही उपयुक्त है — हर श्लोक के अंत में आने वाली टेक "नमामि राममीश्वरम्" पर प्रणाम का भाव रखें। आठों श्लोक पूरे करने के बाद फलश्रुति पढ़ें, तुलसी-दल अर्पित करें और आरती करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — श्री रामाष्टकम् (आधार पाठ; आठ श्लोक व फलश्रुति). रचयिता का नाम यहीं मिला — "इति श्रीपरमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीरामाष्टकं सम्पूर्णम्"। · pavitragranth.com — श्री रामाष्टकम्; आठों श्लोकों व फलश्रुति की क्रम सहित स्वतंत्र पुष्टि · ⚠️ "रामाष्टकम्" नाम से एक अन्य रचना भी प्रचलित है जो "भजे विशेषसुन्दरं" से आरंभ होती है और जिसके श्लोक पूर्णतः भिन्न हैं — भेद दर्ज करने हेतु देखी गई। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित।
रचयिताश्रीपरमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री राम

Lord Rama

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान विष्णु के अवतार और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।

देवता वर्गधर्म · मर्यादा · सत्य · आदर्श
मुख्य मंत्रॐ रां रामाय नमः
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श्री रामाष्टकम् — सामान्य प्रश्न

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