समय
5–6 मिनट
श्लोक
9
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार
उद्देश्य:संकट-निवारण (Relief from Crisis)रक्षा (Protection)साहस (Courage)
✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)
संकटमोचन हनुमानाष्टक गोस्वामी तुलसीदास की आठ छंदों वाली स्तुति है, जिसका हर छंद "को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो" पर समाप्त होता है। आठों छंद रामायण के आठ अलग संकटों की कथा कहते हैं जिन्हें हनुमान जी ने हरा। पूरा पाठ 5–6 मिनट में पूर्ण होता है।
FAQ
श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक — सामान्य प्रश्न
इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की है — वही जिन्होंने रामचरितमानस व हनुमान चालीसा लिखी। यह संस्कृत में नहीं, अवधी में है और मत्तगयन्द छंद में बँधी है। इसकी रचना-तिथि किसी उपलब्ध स्रोत में नहीं मिलती, इसलिए यहाँ कोई संवत् नहीं दिया गया।
आठ छंद, और उनके बाद एक दोहा — "लाल देह लाली लसे…"। "अष्टक" का अर्थ ही आठ है। दोहा अलग से जुड़ा ध्यान-दोहा है, नौवाँ छंद नहीं; वह आरती व चालीसा-पाठ के बाद भी पढ़ा जाता है।
वह पंक्ति — *"को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो"* — इस रचना की टेक है, और यही इसका पूरा तर्क है। हर छंद रामकथा का एक अलग संकट सुनाता है, और अंत में वही निष्कर्ष दोहराता है: "जगत में कौन नहीं जानता कि आपका नाम संकटमोचन है।" आठ बार कथा, आठ बार वही प्रमाण।
क्रम से — (1) बाल्यकाल में सूर्य को निगलना और देवताओं की विनती पर छोड़ना; (2) ब्राह्मण-रूप धरकर श्रीराम व सुग्रीव का मिलन; (3) सीता-खोज तथा समुद्र-तट पर हताश वानरों के प्राण बचाना; (4) अशोक वाटिका में मुद्रिका देकर सीता जी का शोक हरना; (5) संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाना; (6) गरुड़ को लाकर नागपाश काटना; (7) पाताल में अहिरावण-वध; और (8) अंत में स्वयं कवि का निवेदन।
क्योंकि वहीं स्तुति प्रार्थना बन जाती है। पहले सात छंद देवताओं व श्रीराम के संकटों की बात करते हैं; आठवें में तुलसीदास अपनी ओर मुड़ते हैं — *"कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो"* — जब देवताओं तक के संकट आपने टाल दिए, तो मुझ दीन का संकट कितना भारी होगा? यही पूरी रचना की कुंजी है।
यह मतंग मुनि के शाप का संकेत है। उस शाप के कारण बालि ऋष्यमूक पर्वत पर पैर नहीं रख सकता था, और इसीलिए सुग्रीव भयवश वहीं रहते थे। छंद इसी पृष्ठभूमि में कहता है कि उसी मार्ग से श्रीराम आते दिखे और हनुमान जी ने ब्राह्मण-रूप धारण कर उन्हें सुग्रीव तक पहुँचाया।
दोनों तुलसीदास की ही हैं, पर उद्देश्य अलग है। चालीसा 40 चौपाइयों में हनुमान जी का समग्र गुण-वर्णन करती है — कौन हैं, कैसे हैं, क्या शक्ति है। अष्टक 8 छंदों में केवल संकट-हरण के आठ प्रसंग गिनाता है। इसीलिए संकट की स्थिति में विशेष रूप से अष्टक पढ़ने की परंपरा है, और यह छोटा भी है — 5–6 मिनट, जबकि चालीसा 8–10 मिनट।
हाँ, पर वे प्रायः अवधी-मुद्रण के सामान्य भेद हैं और अर्थ नहीं बदलते — जैसे रबि/रवि, बिनती/विनती, सोक/शोक, जुद्ध/युद्ध। यहाँ अवधी रूप रखे गए हैं। एक भेद अर्थ से जुड़ा है: छंद 1 की तीसरी पंक्ति कहीं "रबि कष्ट निहारो" छपती है, कहीं "निवारो"। प्रसंग — देवताओं की विनती पर सूर्य छोड़ना, यानी कष्ट दूर करना — "निवारो" ही माँगता है, इसलिए वही रखा गया है।
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पर्व
