ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः

oṃ aiṃ hrīṃ hanumate rāmadūtāya namaḥ

Ramdoot Hanuman Mantra

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार
उद्देश्य:राम-भक्ति (Devotion)बुद्धि व वाणी (Knowledge)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः — यह हनुमान जी के रामदूत स्वरूप का साधना मंत्र है, जिसमें “ऐं” (वाग्-बीज) और “ह्रीं” (माया-बीज) जुड़े हैं। “रामदूत” सम्बोधन प्रमाणित है — मनोजवं श्लोक का चौथा चरण ही “श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये” है। एक विस्तृत रूप “श्री रामदूताय” सहित भी प्रचलित है।

परिचय

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

स्रोत: हनुमान साधना परंपरा — रामदूत स्वरूप का बीजाक्षर-सहित मंत्र

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः
IASToṃ aiṃ hrīṃ hanumate rāmadūtāya namaḥ
प्रकारसाधना मंत्र
देवताश्री हनुमान
मूल स्रोतहनुमान साधना परंपरा — रामदूत स्वरूप का बीजाक्षर-सहित मंत्र
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनमंगलवार व शनिवार
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

हनुमान जी की समस्त पहचान का केंद्र यही है — वे श्रीराम के दूत हैं। रामायण में लंका पहुँचकर सीता को राम का संदेश देना, मुद्रिका सौंपना और लौटकर राम को चूड़ामणि देना — यही उनका सबसे बड़ा कार्य माना जाता है। "दूत" शब्द को यहाँ छोटा न समझा जाए; परंपरा में कहा जाता है कि सेवक होना ही हनुमान जी का चुना हुआ पद है, और वही उनकी महानता है।

"रामदूत" सम्बोधन पूरी तरह प्रमाणित है — "मनोजवं मारुततुल्यवेगम्" श्लोक, जो हनुमान स्तुति का सबसे प्रसिद्ध पद है, उसका चौथा चरण ही है "श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये"। हनुमत्सहस्रनाम परंपरा में भी "हनुमते रामदूताय" विन्यास मिलता है।

इस मंत्र में दो बीजाक्षर जुड़े हैं: "ऐं" — वाग्-बीज, जिसे वाणी व बुद्धि से जोड़ा जाता है; और "ह्रीं" — माया-बीज। ध्यान रहे कि यह बीजाक्षर-सहित रूप शास्त्रीय मंत्र-सूचियों में नहीं मिला — यह साधना परंपरा का मंत्र है। इसका एक विस्तृत रूप "ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः" भी व्यापक रूप से प्रचलित है; दोनों नीचे दिए गए हैं।

मंत्र

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ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः॥

ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः॥

oṃ aiṃ hrīṃ hanumate rāmadūtāya namaḥ ||

Om Aim Hreem Hanumate Ramadutaya Namah.

ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः॥

oṃ aiṃ hrīṃ hanumate śrī rāmadūtāya namaḥ ||

Om Aim Hreem Hanumate Shri Ramadutaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "ऐं" द्विस्वर बीजाक्षर है (अ + इ = ऐ) और अंत का अनुस्वार नासिक्य ध्वनि के साथ छोड़ना आवश्यक माना जाता है। "ह्रीं" में "ह्र" संयुक्ताक्षर है — "हिरीं" न बनाएँ। "हनुमते" है, "हनुमानाय" नहीं। "रामदूताय" में "दू" दीर्घ है — "दुताय" नहीं। बीजाक्षरों में उच्चारण-शुद्धि पर परंपरा विशेष बल देती है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
ऐंवाग्-बीज — वाणी व बुद्धि से जुड़ा बीजाक्षर
ह्रींमाया-बीज — तंत्र परंपरा का प्रमुख बीजाक्षर
हनुमतेहनुमान को
रामश्रीराम
दूतसन्देशवाहक, दूत
रामदूतायश्रीराम के दूत को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. वाग्-बीज "ऐं" और माया-बीज "ह्रीं" सहित — श्रीराम के दूत हनुमान को नमस्कार।
  2. (दूसरा प्रचलित रूप — "श्री" उपसर्ग सहित) वाग्-बीज व माया-बीज सहित, श्रीराम के दूत हनुमान को नमस्कार।

लाभ

  • परंपरा में इसे राम-भक्ति व सेवा-भाव जगाने से जोड़ा जाता है।
  • "ऐं" वाग्-बीज होने से वाणी व बुद्धि की उपासना से भी जोड़ा जाता है।
  • रामदूत स्वरूप — हनुमान जी की मूल पहचान का मंत्र माना जाता है।
  • रामनवमी व हनुमान जयंती — दोनों पर जप प्रचलित है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: मंगलवार प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

मंगलवार व शनिवार कोहनुमान जयंती व रामनवमी परसुंदरकांड के पाठ के साथकिसी संदेश, वार्ता या यात्रा के आरंभ पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

राम-दरबार या हनुमान जी के विग्रह के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जलाएँ, सिंदूर व लाल पुष्प अर्पित करें और रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। परंपरा में इसे सुंदरकांड के पाठ के साथ जपने की बात कही जाती है, क्योंकि वही काण्ड रामदूत-कार्य का वर्णन करता है। बीजाक्षर-सहित मंत्र होने से उच्चारण-शुद्धि पर ध्यान देना आवश्यक बताया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरारामदूत सम्बोधन — "मनोजवं मारुततुल्यवेगम्" श्लोक का चौथा चरण "श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये" · हनुमत्सहस्रनाम परंपरा — "हनुमते रामदूताय" विन्यास · नोट: यह बीजाक्षर-सहित मंत्र-रूप शास्त्रीय मंत्र-सूचियों में नहीं मिला; स्रोत साधना परंपरा है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री हनुमान

Lord Hanuman

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

देवता वर्गशक्ति · भक्ति · रक्षा · साहस · संकटमोचन
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मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
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ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः — सामान्य प्रश्न

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