योग ज्ञानकोश

योग दर्शन, योग मार्ग, योगासन और प्राणायाम: मूल ग्रंथों और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर

संक्षेप में

योग केवल आसन नहीं है। पतंजलि के लिए योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है, और भगवद्गीता के लिए समता और कर्म की कुशलता। यह ज्ञानकोश योग के दर्शन, मार्गों और अभ्यासों को मूल ग्रंथों से जाँचकर सरल हिंदी में रखता है, सावधानियों के साथ।

योग ज्ञानकोश की श्रेणियाँ

योग क्या है?

ग्रंथ में

आज "योग" शब्द सुनते ही आँखों के सामने चटाई और आसन आते हैं। पर ग्रंथों में यह शब्द कहीं बड़ा है। एक ही शब्द के अलग-अलग ग्रंथों में अलग अर्थ मिलते हैं, और इन अर्थों को एक कर देना योग के साथ अन्याय होगा।

ग्रंथों में योग का अर्थ
ग्रंथकथनअर्थस्रोत
पतंजलि योगसूत्रयोगश्चित्तवृत्तिनिरोधःचित्त की वृत्तियों का निरोधपतंजलि योगसूत्र, 1.2
भगवद्गीतासमत्वं योग उच्यतेसफलता और असफलता में समताभगवद्गीता (Telang अनु.), 2.48
भगवद्गीतायोगः कर्मसु कौशलम्कर्मों में कुशलताभगवद्गीता (Telang अनु.), 2.50
हठयोग प्रदीपिकाहठ विद्या राज योग के लिएशारीरिक साधना, राज योग की सीढ़ीहठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 1.1–3

क्या योग का अर्थ केवल आसन है?

ग्रंथ में

नहीं। योगसूत्र के आठ अंगों में आसन केवल तीसरा है, और उसकी पूरी परिभाषा दो शब्दों में है: स्थिर और सुखद। हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता में आसनों पर विस्तार ज़रूर है, पर वहाँ भी आसन आगे की साधना की सीढ़ी हैं, मंज़िल नहीं।

आज के कई लोकप्रिय आसन इन पुराने हठ-ग्रंथों की सूचियों में नहीं मिलते। वे आयुष मंत्रालय जैसे संस्थानों के अभ्यास में हैं और उपयोगी हैं, पर उन्हें सीधे इन ग्रंथों से जोड़ना सही नहीं। इसलिए हर आसन के पृष्ठ पर हमने बताया है कि वह ग्रंथों में मिलता है या नहीं।

योग का सुरक्षित अभ्यास कैसे करें?

यह चिकित्सा का विकल्प नहीं है

योग किसी रोग का इलाज नहीं है। अभ्यास की जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, और यह चिकित्सक की सलाह का स्थान नहीं लेती।

  • पुराना रोग, दर्द या हृदय की समस्या हो तो पहले चिकित्सक या योग चिकित्सक से पूछिए।
  • गर्भावस्था में योग विशेषज्ञ की सलाह से ही अभ्यास कीजिए।
  • योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में सीखिए। बिना देखरेख सीखने में जोखिम बढ़ता है।
  • नए हैं तो शीर्षासन, सर्वांगासन, पद्मासन और ज़ोर की श्वास जैसे कठिन अभ्यासों से बचिए।

इस कोश में क्या-क्या है?

योग ज्ञानकोश नौ खंडों में है। हर पृष्ठ पर विषय का ग्रंथों में मिलने वाला पूरा वर्णन है, उसके स्रोत के नाम और श्लोक-क्रमांक के साथ; जहाँ ग्रंथ आपस में अलग कहते हैं, वहाँ सब रूप दिए गए हैं।

योग ज्ञानकोश के खंड
खंडक्या मिलेगामुख्य स्रोत
योग का परिचययोग का अर्थ, ग्रंथों की परिभाषाएँ, इतिहास और महत्वपतंजलि योगसूत्र, 1.2; भगवद्गीता (Telang अनु.), 2.48
योग के प्रकारअष्टांग, राज, हठ, कर्म, ज्ञान, भक्ति, ध्यान, मंत्र, लय और कुंडलिनी योगभगवद्गीता (Telang अनु.), 2–12; हठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 4.76
योगासन29 आसन: विधि, लाभ, सावधानी, और ग्रंथों में वर्णनCommon Yoga Protocol (आयुष मंत्रालय), pp. 15–33; हठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 1.19–57
प्राणायामअनुलोम-विलोम, भ्रामरी, शीतली और ग्रंथों के कुंभकCommon Yoga Protocol (आयुष मंत्रालय), pp. 35–38; हठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 2.44–78
शुद्धि क्रियाएँछह षट्कर्म और उनके सब भेदहठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 2.21–38; घेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.12–60
ध्यान और साधनाध्यान की विधि, मंत्र, श्वास, साक्षी, मौन, जप, धारणा और समाधिभगवद्गीता (Telang अनु.), 6.10–36; पतंजलि योगसूत्र, 3.1–3.8
योग दर्शनपतंजलि, चित्त-वृत्ति, अभ्यास-वैराग्य, क्लेश, कर्म, यम, नियम, प्रत्याहार, कैवल्यपतंजलि योगसूत्र, 1.1–4.34
योग के प्राचीन ग्रंथयोगसूत्र, प्रदीपिका, घेरंड, शिव संहिता, योग वासिष्ठ, गीता, योग उपनिषद्हठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 1.1; घेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.1
चक्र और कुंडलिनीसात चक्र, नाड़ियाँ और कुंडलिनी, शिव संहिता और षट्चक्र निरूपण सेशिव संहिता (Vasu अनु.), अध्याय 5

इस कोश को कैसे पढ़ें

हर खंड पर एक छोटा label लगा होता है, जो बताता है कि बात कहाँ से आई है:

  • ग्रंथ मेंबात ग्रंथ में लिखी है, और हमने उसे पढ़ा है।
  • परंपराबात परंपरा या भाष्य से आई है।
  • आधुनिक अभ्यासबात आज के संस्थागत अभ्यास की है, जैसे आयुष मंत्रालय की पुस्तिका।
  • आधुनिक शोधबात आधुनिक शोध से आई है।
  • विद्वानों में मतभेदविद्वान अलग-अलग मत रखते हैं; सब रूप दिए गए हैं।

सनातन धर्म के और खंड

  • ऋषि — वैदिक और पौराणिक ऋषि, उनकी गाथाएँ और योगदान
  • संत — संतों की वाणी और परंपराएँ
  • भक्त — महान भक्तों की कथाएँ

योग के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न