शुद्धि क्रियाएँ (षट्कर्म)

हठयोग की छह शुद्धि क्रियाएँ: ग्रंथ क्या कहते हैं, और कौन इन्हें करे

संक्षेप में

षट्कर्म हठयोग की छह शुद्धि क्रियाएँ हैं: धौति, बस्ती, नेति, त्राटक, नौली और कपालभाति। घेरंड संहिता इन्हें योग की सात सीढ़ियों में पहली, यानी शरीर की शुद्धि, कहती है। हठयोग प्रदीपिका इन्हें उन लोगों के लिए कहती है जिनके शरीर में मेद या कफ की अधिकता हो, और दोनों ग्रंथ इन्हें गुरु से सीखने को कहते हैं।

एक नज़र में

छह कर्म
धौति, बस्ती, नेति, त्राटक, नौली, कपालभाति
घेरंड में भेद
धौति 4 (13 उपभेद), बस्ती 2, कपालभाति 3
किसके लिए
मेद या कफ की अधिकता वाले (प्रदीपिका 2.21)
ग्रंथ में
हठयोग प्रदीपिका 2.21–38; घेरंड संहिता 1.10–60

षट्कर्म कौन-से हैं?

ग्रंथ में

दोनों ग्रंथ छह कर्म गिनाते हैं। घेरंड संहिता नौली को लौलिकी कहती है, और कई कर्मों के भेद भी बताती है।

षट्कर्म और घेरंड संहिता के अनुसार उनके भेद
कर्मघेरंड संहिता के भेदस्रोत
धौतिअंतर्धौति (वातसार, वारिसार, अग्निसार, बहिष्कृत); दंतधौति (दंतमूल, जिह्वा, दोनों कान, कपालरंध्र); हृद्धौति (दंड, वमन, वस्त्र); मूलशोधनघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.13–44
बस्तीजल बस्ती, स्थल (सूखी) बस्तीघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.45–49
नेतिसूत्र सेघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.50–51
लौलिकी (नौली)पेट को एक ओर से दूसरी ओर घुमानाघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.52
त्राटकछोटी वस्तु पर अपलक दृष्टिघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.53–54
कपालभातिवामक्रम, व्युत्क्रम, शीतक्रमघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.55–60

घेरंड संहिता में षट्कर्म का स्थान

ग्रंथ में

घेरंड संहिता योग के सात साधन बताती है और हर एक का फल: छह कर्मों से शुद्धि, आसन से दृढ़ता, मुद्रा से स्थिरता, प्रत्याहार से धीरता, प्राणायाम से हल्कापन, ध्यान से आत्मा का प्रत्यक्ष, और समाधि से निर्लिप्तता, जो निश्चित ही मुक्ति है।

यानी इस ग्रंथ में षट्कर्म योग की पहली सीढ़ी हैं, जिनसे बाकी अभ्यासों के लिए शरीर तैयार होता है।

षट्कर्म किसके लिए हैं?

ग्रंथ में

हठयोग प्रदीपिका कहती है कि जिनके शरीर में मेद या कफ की अधिकता हो, वे पहले षट्कर्म करें; और जिनमें यह अधिकता नहीं, उन्हें इनकी आवश्यकता नहीं। ग्रंथ इन क्रियाओं को गुप्त रखने को भी कहता है, यानी ये गुरु से सीखी जाने वाली चीज़ें हैं।

प्रदीपिका कहती है कि ये छह कर्म शरीर को शुद्ध करते हैं, असाधारण गुण देते हैं, और श्रेष्ठ योगी इन्हें लगन से करते हैं।

प्रदीपिका के अनुसार षट्कर्मों से कफ के दोषों से पैदा मोटापा दूर करके जब प्राणायाम किया जाता है, तो उसमें सफलता आसानी से मिलती है।

प्रदीपिका यह भी बताती है कि कुछ आचार्य मानते हैं कि केवल प्राणायाम से ही सारी अशुद्धियाँ सूख जाती हैं, और वे किसी दूसरे अभ्यास की सलाह नहीं देते।

नाड़ी-शुद्धि के लक्षण

ग्रंथ में

हठयोग प्रदीपिका के अनुसार जब नाड़ियाँ अशुद्धियों से मुक्त होती हैं, तो बाहर के लक्षण दिखते हैं: शरीर दुबला होता है और रंग चमकने लगता है; तब सफलता निश्चित समझनी चाहिए।

अशुद्धियाँ दूर होने पर वायु इच्छा के अनुसार रोकी जा सकती है, भूख बढ़ती है, दिव्य नाद जागता है, और शरीर स्वस्थ होता है।

गजकरणी: प्रदीपिका की एक और क्रिया

ग्रंथ में

छह कर्मों के बाद प्रदीपिका गजकरणी का वर्णन करती है: अपान वायु को कंठ तक ले जाकर पेट का भोजन आदि बाहर निकाल दिया जाता है। ग्रंथ कहता है कि धीरे-धीरे इससे शंखिनी नाड़ी-तंत्र का ज्ञान होता है। इसे हठ में गजकरणी कहते हैं।

सावधानी

ये पृष्ठ ग्रंथ का वर्णन हैं, घर पर करने की विधि नहीं

षट्कर्म के पृष्ठों पर ग्रंथों का पूरा वर्णन और उनके बताए सारे लाभ दिए गए हैं। ये ग्रंथ के कथन हैं; इन्हें किसी रोग का इलाज न मानें।

धौति, बस्ती और नेति जैसी क्रियाएँ शरीर के भीतर की जाती हैं, जिनमें चोट और संक्रमण का जोखिम है। इन्हें योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही सीखिए, और कोई भी रोग हो तो पहले चिकित्सक से पूछिए।

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  • हठ योग — शरीर और प्राण से मन तक पहुँचने वाला मार्ग
  • हठयोग प्रदीपिका — स्वात्माराम का ग्रंथ: आसन, प्राणायाम, मुद्रा और समाधि
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शुद्धि क्रियाएँ (षट्कर्म) — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न