त्राटक क्या है?
ग्रंथ में
त्राटक षट्कर्मों में से एक है, पर बाक़ी पाँच से अलग, यह शरीर के भीतर की क्रिया नहीं है और इसमें मन की एकाग्रता भी साधी जाती है। इसलिए इसे ध्यान के अभ्यासों के पास भी रखा जाता है।
हठयोग प्रदीपिका में त्राटक
ग्रंथ में
हठयोग प्रदीपिका के अनुसार शांत होकर किसी छोटे निशान पर तब तक स्थिर दृष्टि टिकाई जाए, जब तक आँखों में आँसू न भर आएँ। आचार्य इसे त्राटक कहते हैं।
घेरंड संहिता में त्राटक
ग्रंथ में
घेरंड संहिता के अनुसार किसी छोटी वस्तु पर बिना पलक झपकाए तब तक स्थिर दृष्टि रखी जाए, जब तक आँसू न बहने लगें। ज्ञानी इसे त्राटक कहते हैं।
स्वामी शिवानंद की "हठ योग" में त्राटक
परंपरा
Sivananda त्राटक को किसी बिंदु या वस्तु पर बिना पलक झपकाए स्थिर दृष्टि कहते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य एकाग्रता और मन को केंद्रित करने की शक्ति बढ़ाना है। वे इसे हठ, भक्ति, राज और ज्ञान, चारों योग के साधकों के लिए उपयोगी बताते हैं।
उनके अनुसार पद्मासन या सिद्धासन में, या कुर्सी पर भी सीधे बैठकर इसे किया जा सकता है। दृष्टि के लिए वे कई विकल्प बताते हैं: अपने इष्टदेव का चित्र, ॐ का चित्र, सफ़ेद काग़ज़ पर काला बिंदु, कोई चमकता तारा, या घी के दीपक की लौ। नासिका के अग्र भाग पर, या दोनों भौंहों के बीच देखना भी त्राटक है।
वस्तु को देखने के बाद आँखें बंद करके उसका मानसिक चित्र बनाना वे "विज़ुअलाइज़ेशन" कहते हैं। शुरुआत दो मिनट से करने, और समय सावधानी से धीरे-धीरे बढ़ाने को वे कहते हैं; और लिखते हैं कि त्राटक से एकाग्रता की शक्ति बहुत बढ़ती है।
ग्रंथों में त्राटक के लाभ
ग्रंथ में
हठयोग प्रदीपिका कहती है कि त्राटक आँखों के रोग नष्ट करता है और आलस्य आदि को हटाता है। ग्रंथ इसे गहनों की पेटी की तरह बहुत सावधानी से गुप्त रखने को कहता है।
घेरंड संहिता के अनुसार इसके अभ्यास से शांभवी सिद्धि मिलती है, आँखों के सब रोग निश्चित ही नष्ट होते हैं, और दिव्य दृष्टि आती है।
सावधानी: यह क्रिया गुरु से ही सीखिए
यह ग्रंथ का वर्णन है, घर पर करने की विधि नहीं
आँखों में आँसू आने तक देखने से आँखों पर ज़ोर पड़ता है। आँखों की कोई भी समस्या, जैसे जलन, संक्रमण, ग्लूकोमा या हाल की आँख की सर्जरी हो तो यह न करें, और पहले नेत्र-चिकित्सक से पूछें।
कोई भी रोग हो तो पहले चिकित्सक से पूछिए, और यह क्रिया योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही सीखिए।
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- नेति — नासिका-मार्ग की शुद्धि: सूत्र नेति, हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता के अनुसार
