नेति

नासिका-मार्ग की शुद्धि: सूत्र नेति, हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता के अनुसार

संक्षेप में

नेति नासिका-मार्ग की शुद्धि की क्रिया है और षट्कर्मों में तीसरी है। हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता दोनों में धागे की पतली डोरी को नाक से डालकर मुँह से निकालने का वर्णन है। प्रदीपिका इसे मस्तिष्क को शुद्ध करने वाली और दिव्य दृष्टि देने वाली कहती है।

एक नज़र में

षट्कर्म
तीसरा (प्रदीपिका 2.22; घेरंड 1.12)
साधन
धागों की डोरी (सूत्र)
लंबाई
प्रदीपिका: लगभग छह इंच; घेरंड: आधा हाथ
ग्रंथ में
हठयोग प्रदीपिका 2.29–30; घेरंड संहिता 1.50–51

नेति क्या है?

ग्रंथ में

नेति षट्कर्मों में तीसरी क्रिया है, जिसका संबंध नासिका-मार्ग से है। ग्रंथों में इसका जो रूप मिलता है, उसमें धागे की डोरी, यानी सूत्र, का उपयोग होता है।

हठयोग प्रदीपिका में नेति

ग्रंथ में

हठयोग प्रदीपिका के अनुसार धागों से बनी, लगभग छह इंच लंबी डोरी नाक के रास्ते से डाली जाती है, और उसका सिरा मुँह से निकाला जाता है। सिद्ध योगी इसे नेति कर्म कहते हैं।

घेरंड संहिता में नेति

ग्रंथ में

घेरंड संहिता के अनुसार आधे हाथ लंबा पतला धागा लेकर नासिका में डाला जाता है, और उसे भीतर से निकालकर मुँह से बाहर खींचा जाता है। इसे नेति क्रिया कहते हैं।

स्वामी शिवानंद की "हठ योग" में नेति

परंपरा

Sivananda लिखते हैं कि नासिका साफ़ न हो तो साँस अनियमित होती है, और नेति क्रिया नासिका की शुद्धि के लिए है।

वे बिना गाँठ वाले मज़बूत, पतले धागे का वर्णन करते हैं: उसका एक सिरा नासिका में डालकर गहरी साँस से भीतर खींचा जाता है और फिर धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है, दोनों नासिकाओं से। वे मातंगिनी मुद्रा को भी नेति का एक रूप बताते हैं।

ग्रंथों में नेति के लाभ

ग्रंथ में

हठयोग प्रदीपिका नेति को मस्तिष्क को शुद्ध करने वाली और दिव्य दृष्टि देने वाली कहती है, और कहती है कि यह गर्दन और कंधों के ऊपर के सब रोगों को जल्दी नष्ट करती है।

घेरंड संहिता के अनुसार नेति क्रिया के अभ्यास से खेचरी सिद्धि मिलती है, कफ के विकार नष्ट होते हैं, और दृष्टि साफ़ होती है, यानी दूर तक देखने की शक्ति आती है।

सावधानी: यह क्रिया गुरु से ही सीखिए

यह ग्रंथ का वर्णन है, घर पर करने की विधि नहीं

नेति में धागा नाक और गले के भीतर से गुज़रता है। नाक में चोट, बार-बार खून आना, संक्रमण या हाल की सर्जरी हो तो इसे न आज़माएँ।

कोई भी रोग हो तो पहले चिकित्सक से पूछिए, और यह क्रिया योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही सीखिए।

आगे पढ़ें

  • धौति — भीतरी शुद्धि की क्रिया: वस्त्र धौति और घेरंड संहिता के चार भेद, तेरह उपभेद
  • कपालभाति — षट्कर्म, प्राणायाम नहीं: ग्रंथों का वर्णन, तीन भेद और आयुष प्रोटोकॉल
  • शुद्धि क्रियाएँ (षट्कर्म) — हठयोग की छह शुद्धि क्रियाएँ: ग्रंथ क्या कहते हैं, और कौन इन्हें करे
  • हठयोग प्रदीपिका — स्वात्माराम का ग्रंथ: आसन, प्राणायाम, मुद्रा और समाधि

नेति — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न