योग के प्राचीन ग्रंथ

योगसूत्र से हठयोग प्रदीपिका तक: कौन-सा ग्रंथ क्या सिखाता है

संक्षेप में

योग के ग्रंथ एक जैसे नहीं हैं। पतंजलि का योगसूत्र मन और दर्शन का ग्रंथ है, हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता शरीर और प्राण की साधना के, गीता कर्म, ज्ञान और भक्ति के योग की, और योग वासिष्ठ ज्ञान का संवाद है। हर पृष्ठ पर बताया गया है कि वह ग्रंथ हमने किस संस्करण से पढ़ा।

कौन-सा ग्रंथ क्या सिखाता है?

ग्रंथ में

योग के प्रमुख ग्रंथ एक नज़र में
ग्रंथरूपमुख्य विषयस्रोत
पतंजलि योगसूत्र4 पाद, 195 सूत्रचित्त-वृत्ति निरोध, क्लेश, आठ अंग, कैवल्यपतंजलि योगसूत्र, 1.2, 2.29
हठयोग प्रदीपिका4 अध्यायआसन, प्राणायाम, मुद्रा, समाधि; राज योग के लिए हठहठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 1.2; अध्याय 1–4
घेरंड संहिता7 उपदेश, लगभग 350 श्लोकषट्कर्म से समाधि तक सात साधनघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता, भूमिका
शिव संहिता5 अध्यायशिव-पार्वती संवाद; आसन, प्राणायाम, चक्रशिव संहिता (Vasu अनु.), अध्याय 1–5
भगवद्गीता18 अध्याय, हर एक "योग" नाम सेकर्म, ज्ञान, ध्यान और भक्ति का योगभगवद्गीता (संस्कृत विकिस्रोत), अध्यायों के नाम
योग वासिष्ठ6 प्रकरणवसिष्ठ और राम का ज्ञान-संवादयोग वासिष्ठ (Mitra अनु.), Book III (Utpatti Khanda)

इन ग्रंथों को कैसे पढ़ें?

इन ग्रंथों की तिथियों पर विद्वानों में मतभेद है, इसलिए हम कोई सदी नहीं दे रहे। और इनके अभ्यास-वाले भाग, जैसे कुंभक, मुद्रा और षट्कर्म, ग्रंथ स्वयं गुरु से सीखने को कहते हैं। हठयोग प्रदीपिका तो यहाँ तक कहती है कि केवल पुस्तकें पढ़ने से सिद्धि नहीं मिलती।

किस ग्रंथ में क्या मिलेगा?

ग्रंथ में

हर ग्रंथ के पृष्ठ पर उसका विस्तृत परिचय है। यह तालिका बताती है कि किस विषय के लिए कौन-सा ग्रंथ देखें।

योग के प्रमुख ग्रंथ और उनके विषय
ग्रंथरूपमुख्य विषयस्रोत
पतंजलि योगसूत्र4 पाद, 195 सूत्रचित्त-वृत्ति, क्लेश, अष्टांग, संयम, कैवल्यपतंजलि योगसूत्र, 1.1–4.34
हठयोग प्रदीपिका4 अध्याय15 आसन, षट्कर्म, 8 कुंभक, 10 मुद्राएँ, नाद और समाधिहठयोग प्रदीपिका (Sinh अनु.), 1.17–4.78
घेरंड संहिता7 उपदेशषट्कर्म के सब भेद, 32 आसन, 25 मुद्राएँ, 3 ध्यान, 6 समाधिघेरंड और शिव संहिता (Vasu अनु.), घेरंड संहिता 1.10–7.6
शिव संहिता5 अध्यायनाड़ियाँ, 4 प्रमुख आसन, बाधाएँ, 4 योग और 4 साधक, छह चक्रशिव संहिता (Vasu अनु.), 2.13–5.167
योगतत्त्व उपनिषद्उपनिषद्चार योग, हठ के 20 अंग, चार अवस्थाएँ, पाँच धारणाएँयोग उपनिषद् (Adyar, 1920), योगतत्त्व उपनिषद् 19–106
भगवद्गीता18 अध्यायकर्म, ज्ञान, भक्ति और ध्यान योग; स्थितप्रज्ञभगवद्गीता (Telang अनु.), 2.48–72, 6, 12

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आगे पढ़ें

  • योग दर्शन — पतंजलि का योग: चित्त, क्लेश, कर्म और कैवल्य
  • हठ योग — शरीर और प्राण से मन तक पहुँचने वाला मार्ग
  • योग का इतिहास — उपनिषदों से हठ ग्रंथों और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तक

योग के प्राचीन ग्रंथ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न